बच्चे को गिरफ्तार करवाना महंगा पड़ा पटना के ADM को, DM ने लिया एक्शन

पटना : नाबालिग विकास आर्या और उसकी फैमिली वालों पर अपने एडीएम होने का रौब दिखाने वाले विरेन्द्र कुमार पासवान अब बुरे तरीके से अपने ही जाल में फंस गए हैं. पटना का एडीएम स्पेशल होने के नाते 13 साल के मासूम विकास आर्या व उसकी फैमिली के साथ काफी बुरा व्यवहार किया था. अपने पोस्ट का दुरुपयोग करते हुए एडीएम साहब ने पुलिस वालों पर दबाव बनवाया और मासूम बच्चे को गिरफ्तार करवा के रिमांड होम भिजवा दिया. जबकि, उसे गांधी मैदान ट्रैफिक थाने की पुलिस जमानत पर थाने से ही छोड़ सकती थी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. पद का दुरुपयोग करनेवाले एडीएम स्पेशल का ये मामला अब काफी तूल पकड़ चुका है.

पटना के डीएम संजय कुमार अग्रवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का आदेश दे दिया है. उन्होंने पूरे मामले पर पटना के एसएसपी मनु महाराज से रिपोर्ट भी मांगी है. डीएम ने साफ कह दिया है कि दोषी पाए जाने पर एडीएम स्पेशल विरेन्द्र कुमार पासवान के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. 25 दिसंबर को एडीएम स्पेशल की ड्यूटी पटना सिटी के बाललीला गुरुद्वारा में लगी हुई थी. फिर वे कदमकुआं में क्या कर रहे थे? इस बात की भी जांच की जा रही है. दोषी पाए जाने पर एडीएम साहब के खिलाफ भी केस दर्ज हो सकता है.



ADM

असलियत जान दंग रह गए SSP
इस मामले में पटना के एसएसपी मनु महाराज पहले ही कार्रवाई कर चुके हैं. उन्होंने गांधी मैदान थाने के थानेदार शशि शेखर चौहान को तलब किया था. इसके बाद उनसे पूछताछ की. एसएसपी ने साफ कहा कि जब बेल थाने से मिल सकता था तो फिर बच्चे का रिमांड होम क्यों भेजा? एसएसपी के इस सवाल का जवाब थानेदार के पास नहीं था. 25 दिसंबर को बच्चे की स्कूटी से एडीएम साहब को धक्का लगा, फिर बच्चे को कदमकुआं थाने से गांधी मैदान ट्रैफिक थाना लाया गया और फिर एफआईआर दर्ज कर उसे मजिस्ट्रेट के पास पेश किया गया. वहां से उसे रिमांड होम भेज दिया गया. इस पूरे प्रकरण को 24 घंटे से अधिक हो चुके थे. आश्चर्य वाली बात यह है कि थानेदार ​शशि शेखर चौहान ने एसएसपी को तो छोड़ दीजिए, अपने ट्रैफिक एसपी पीके दास को भी इस मामले की जानकारी नहीं दी थी. जब एसएसपी ने इस बात को जाना और ट्रैफिक एसपी से बात की तो वे भी दंग रह गए. इसके बाद ही उन्होंने थानेदार को सस्पेंड कर दिया. उनसे पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा. फिर प्रोसिडिंग चलाने का भी आदेश दिया.

स्पेशल केस में मजिस्ट्रेट के पास भेजा गया IO
विकास आर्या बिशप स्कॉट स्कूल के क्लास 9 का स्टूडेंट है. स्कूल में उसका एग्जाम भी चल रहा है. एसएसपी से मिलकर मां और बहन ने जल्द से जल्द उसे रिमांड होम से बाहर करवाने की गुजारिश की थी. चूंकि मामला कोर्ट में जा चुका है. इसलिए एसएसपी ने केस के आईओ विनय कुमार सिंह को स्पेशल केस में मजिस्ट्रेट के पास जाने और सच्चाई से अवगत कराने को कहा था. एसएसपी का आदेश मिलते ही आईओ मजिस्ट्रेट के पास पहुंच गए हैं.

Exclusive : एडीएम ने दिखा दी बच्चे पर हनक, रात भर थाने में रख फिर भिजवा दिया रिमांड होम

आईओ पर भी होनी चाहिए कार्रवाई
कार्रवाई सिर्फ गांधी मैदान ट्रैफिक थाना के थानेदार पर ही नहीं, बल्कि केस के आईओ विनय कुमार सिंह पर भी होनी चाहिए. उन्होंने एडीएम साहब और अपने थानेदार के गलत काम में भरपूर साथ दिया. इन दोनों के कहने पर गलत रिपोर्ट तैयार की. बच्चे के ​फैमिली वाले लगातार साथ बने हुए थे. उसकी रिहाई के लिए लगातार सभी से गुजारिश कर रहे थे, लेकिन आईओ ने मजिस्ट्रेट को लिखे आवेदन में ये लिख दिया कि विकास का कोई जमानतदार नहीं है, इसलिए उसे रिमांड होम भेजा जाए.