आनंद किशोर अभी BSEB के चेयरमैन बने रहेंगे, फर्जी स्‍कूलों पर कसेगा तेज शिकंजा

पटनाः तमाम चर्चाओं और कयासों के बीच सरकार के सूत्रों से इस बात के स्‍पष्‍ट संकेत मिले हैं कि बिहार स्‍कूल एग्‍जामिनेशन बोर्ड के चेयरमैन आनंद किशोर अभी बने रहेंगे. फर्जी टॉपर प्रकरण के बाद सूबे के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी चेयरमैन आनंद किशोर से खफा चल रहे हैं. चौधरी के गुस्‍से की वजह से ही इनके हटाये जाने की चर्चा तेज हो गई थी. नये चेयरमैन के रुप में बहुतों ने बेहद सख्‍त माने जाने वाले आईएएस के के पाठक का नाम तेजी से लेना शुरु कर दिया था. पर यह सबों को पता है कि के के पाठक का मेल कभी किसी मंत्री से बैठा नहीं. वे खत्‍म सिस्‍टम को ठीक तो कर देते हैं,लेकिन काम बिना दखल करते हैं.

सरकार के सूत्र कह रहे हैं कि मंत्री अशोक चौधरी और चेयरमैन आनंद किशोर के रिश्‍तों को सुधार दिया जाएगा. कंफ्यूजन खत्‍म करा दिये जायेंगे. अभी जैसा माहौल है, उसमें सरकार आनंद किशोर से बोर्ड का जिम्‍मा नहीं ले सकती. ऐसा होने पर संदेशा और खराब जाएगा. यह दूसरी बात है कि आनंद किशोर काम के बोझ में बहुत अधिक दबे हैं. वे बोर्ड के चेयरमैन तो हैं ही,साथ में पटना प्रमंडल के आयुक्‍त और जेल आईजी भी.

सरकार ने माना है कि खराब रिजल्‍ट को लेकर जो चुनौतियां सामने हैं,उसमें किशोर को हटाना कतई ठीक नहीं है. पहले इन चुनौतियों से पार पाना है. छात्रों की शिकायतें बहुत तेजी से दूर करने की कोशिश करनी है. इसके लिए आनंद किशोर काम कर रहे हैं. कंप्‍लीमेंटरी एग्‍जामिनेशन का आयोजन जल्‍द कराना है. सरकार ने पहली बार एक से अधिक विषयों में परीक्षा लेने का फैसला किया है. इसके लिए भी आवश्‍यक तैयारी करनी है. और तो और, अभी मैट्रिक की परीक्षाओं के नतीजे घोषित करने हैं. सारा काम आनंद किशोर ने किया है, फिर ऐसे में कोई दूसरा आएगा, तो उसे बोर्ड के सिस्‍टम को समझने में ही काफी वक्‍त लग जाएगा. फर्जी स्‍कूलों की नकेल कस देनी है. नकेल कसने की इस कार्रवाई में सैंकड़ों स्‍कूल की संबद्धता रद हो सकती है. पहले लालकिशोर ब्रांड वाले स्‍कूल सिर्फ जांच की जद में आये थे.

मुख्‍य मंत्री नीतीश कुमार ने भी आज सोमवार को जन संवाद कार्यक्रम के दौरान मीडिया को कहा कि नतीजे सख्‍त परीक्षा के कारण प्रभावित हुए. बोर्ड की व्‍यवस्‍था पर वे विशेष कुछ नहीं बोले. गणेश पर कहा कि उम्र का झोल किसको पता था. वैसे यह दूसरी बात है कि आनंद किशोर को बनाये रखने को मंत्री अशोक चौधरी को राजी कराना होगा. वे ज्‍यादा अड़े,तो फिर कुछ भी हो सकता है. पर इतना तय है कि विकल्‍प के रुप में के के पाठक का नाम मिला, तो पाठक को लेना शायद वे भी पसंद न करें.

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