जब्त पोकलेन से बालू निकाल रहे थे माफिया, पुलिस पर उठ रहे सवाल

बिहटा (मृत्युंजय कुमार) : अवैध बालू उत्खनन मामले में पुलिसिया कारनामों का एक नायाब नमूना सामने आया है. एक वर्ष पूर्व जब्त की गयी 23 पोकलेन मशीनों में से 12 मशीनें गायब हो गयीं. लाख प्रयास के बाद भी मशीनें नहीं मिलीं. मशीनों के गायब होने के चक्कर में एक चौकीदार ने भी सुसाइड कर लिया था. अब इसमें नया मोड़ आ गया है. फिर 29 मशीनें पुलिस ने जब्त की हैं.

लेकिन खास बात यह है कि इन 29 मशीनों में वे 12 मशीनें भी शामिल हैं, जो पुलिस कस्टडी से गायब हो गयी थीं. ऐसे में पुलिस पर सवाल उठने लगा है कि आखिर पुलिस कस्टडी से करोड़ों की वे मशीनें माफिया के पास कैसे पहुंचीं. इसे लेकर पुलिस के होश उड़े हुए हैं. दरअसल दोनों छापेमारी के समय पुलिस कप्तान वही, गैंग भी वही और इलाका भी वही. तब पोकलेन मशीनें माफिया के पास पहुंचना पुलिस की मिलीभगत की ओर संकेत करता है.

बता दें कि पिछले साल जब्त 23 मशीनों में से 12 मशीनों के मालिक के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. काफी कोशिश के बाद भी पुलिस को इसका सुराग नहीं मिला. तब पुलिस ने उन बेनामी मशीनों की रखवाली के लिए दो चौकीदारों को लगा दिया. मशीनों के गायब होने के बाद रखवाली कर रहे आनंदपुर के चौकीदार रामजी ने सुसाइड कर लिया. मामला गरम हुआ, फिर धीरे-धीरे ठंडा बस्ता में चला गया. अब एक बार फिर यह मामला गरम हो गया है.

दरअसल सबसे बड़ा गड़बड़झाला का खुलासा तब हुआ, जब एक बार अवैध बालू उत्खनन का मामला राज्य सरकार में गरमाया. पुलिस ने अवैध बालू उत्खनन को लेकर व्यापक छापेमारी की. छापेमारी में इस बार 29 पोकलेन मशीनें मिली हैं, लेकिन पुलिस के लिए असली समस्या यह है कि पहले वाली गायब मशीनें भी इसमें शामिल हैं. पुलिस कार्यशैली पर जब सवाल उठा तो आनन-फानन में सेंट्रल रेंज के डीआइजी राजेश कुमार ने पटना वेस्ट के एसपी रविंद्र कुमार के नेतृत्व में जांच दल का गठन कर इसका जल्द से जल्द पता लगाने का आदेश दे दिया.

 

सूत्रों की मानें तो जब्त मशीनों में ज्यादातर मशीनें राजद विधायक भाई वीरेंद्र के भतीजा सोनू और फौजिया की हैं. वहीं अन्य मशीनें पूर्व उपप्रमुख अनिल कुमार, दिलीप कुमार, गोपाल राय, श्रीराम, मनोहर, ज्ञानी, निरंजन आदि की हैं. इनकी पहचान कर ली गयी है और पुलिस उन लोगों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है. विधायक भी पुलिस के रडार पर हैं.

उधर अब तक की जांच में यह बात भी सामने आयी है कि एक साल पहले हुई कार्रवाई के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया था. इस इलाके में एके 47 सहित अत्याधुनिक हथियारों से लैश फौजिया गिरोह का कब्जा हो गया. सूत्रों की मानें तो तत्कालीन महागठबंधन सरकार में शामिल लोगों का साथ मिलने से यहां आम आदमी से लेकर पुलिस तक के लोग से कतराते रहे. वहीं अधिकतर मशीनों से इंजन और चेचिस नंबर मिटा दिये गये हैं. इससे पुलिस को उनके मालिकों के बारे में पता लगाने में कठिनाई हो रही है. इसी बीच खनन विभाग के अपर सचिव सतीश कुंजर सिंह ने 1 अगस्त को अपने पत्रांक 2005 के माध्यम से पटना, भोजपुर और छपरा के डीएम को पट्टेदार मेसर्स ब्राडसन कमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड के लाइसेंस कैंसिल होने की जानकारी दी है. बहरहाल पोकलेन मशीन का मामला पुलिस के लिए सिरदर्द हो गया है.

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