गुस्से में हैं भाजपा विधायक अनिल सिंह, मंत्री नहीं बनने पर निकाली भड़ास

नवादा (रवीन्द्र नाथ भैया) : बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद नीतीश कैबिनेट में मंत्री पद को लेकर एनडीए में मचा घमासान तो थम गया है लेकिन एक नई चिंगारी उठी है नवादा से. मंत्री पद के लिए अब बीजेपी के भीतर भी कलह की स्थिति दिखाई दे रही है. बीजेपी के अंदर सुलग रही इस चिंगारी से अब तक आप अनजान होंगे. लेकिन पार्टी के भीतर मंत्री पद की चाहत रखनेवालों की कमी नहीं है. विरोध का सुर छेड़ा है नवादा के हिसुआ से भाजपा विधायक अनिल सिंह ने.

2013 से पहले एनडीए की बिहार सरकार में मंत्री रहे कुछ नेता इस वक्त सांसद और केंद्र में मंत्री हैं. लिहाजा नये चेहरों के लिए यह मौका उम्मीदों की किरण जैसा था. नीतीश कैबिनेट में सुशील मोदी, नंदकिशोर यादव और प्रेमकुमार सरीखे नेताओं को छोड़कर सभी चेहरे तकरीबन नये हैं. ऐसे में जो नये चेहरे नीतीश मंत्रिमंडल में जगह पाने की ताक में थे, निराशा हाथ लगने पर आग बबूला हो उठे हैं.

हिसुआ से विधायक अनिल सिंह के बयान से बीजेपी के अंदर असंतोष की चिंगारी भड़क उठी है. दरअसल 29 जुलाई को मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री आवास पर कैबिनेट की पहली बैठक में शामिल होकर जैसे ही पहली बार विधायक से मंत्री बने बीजेपी के एक नेता वीरचंद पटेल पथ स्थित बीजेपी दफ्तर पहुंचे, वहां उनका सामना हिसुआ के विधायक अनिल सिंह से हो गया. खबरों के मुताबिक मंत्री पद की बधाई देने के साथ ही अनिल सिंह उन पर बरस पड़े. कार्यालय के अंदर कमरे में 15 से 20 बीजेपी कार्यकर्ताओं के समक्ष अनिल सिंह ने नवोदित मंत्री से जो कुछ कहा उसकी उम्मीद किसी को नही थी.

अनिल सिंह का आरोप था कि आखिरी वक्त में उनका नाम मंत्रियों की सूची से गायब कर दिया गया. अनिल सिंह का आक्रोश अपने चरम पर था और उन्होनें आवेश में अपनी ही जाति से ताल्लुक रखने वाले नये मंत्री को रीढ़विहीन तक कह दिया. उनका गुस्सा यहीं नही थमा. केंद्र में मंत्री गिरिराज सिंह को लेकर भी उन्होनें तल्ख बातें कह डालीं. बात बिगड़ने ही वाली थी कि पांच-सात मिनट के अंदर ही हिसुआ विधायक पार्टी कार्यालय छोड़कर चल दिये. जिस वक्त का यह वाकया है उस समय पार्टी कार्यालय में इन दोनों नेताओं के अलावा ऑफिस के कर्मचारी भी मौजूद थे.

लाइव सिटीज से खास बातचीत में अनिल सिंह ने यह कबूल किया है कि मंत्रियों की सूची से नाम गायब होने से उन्हें गहरी चोट पहुंची है. अनिल सिंह ने कहा कि बिहार प्रदेश बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक में चारों सदस्यों ने उनके नाम पर मुहर लगा दी थी और उनका मंत्री बनना तय था. लेकिन केंद्र में बैठे बिहार के एक प्रभावशाली मंत्री ने अपने प्रभाव से कोर ग्रुप के फैसले को अंतिम क्षणों में बदलने के लिए बाध्य कर दिया. अनिल सिंह ने मंत्रियों के चयन के लिए गठित कोर ग्रुप में शामिल सुशील मोदी, नित्यानंद राय, नंदकिशोर यादव और संगठन मंत्री का आभार व्यक्त किया है. साथ ही पार्टी फोरम में अपनी नाराजगी दर्ज करवाने की बात भी कही है.

कौन हैं अनिल सिंह ?

अनिल सिंह नवादा जिले के हिसुआ विधानसभा से लगातार तीसरी बार विधायक चुने गये हैं. 2005 में कांग्रेसी दिग्गज आदित्य सिंह को पछाड़ कर अनिल सिंह बीजेपी के टिकट पर विधानसभा पहुंचे थे. हिसुआ विधानसभा 1985 से कांग्रेस का गढ़ माना जाता था. जहां से कमल खिलाकर अनिल सिंह 2005 में सुर्खियों में आये थे. 2001 में राजनीति में आये अनिल सिंह की शुरूआती सफलता ने उस वक्त के राजनीतिक समीक्षकों को चौंका दिया था.

भूमिहार जाति से आने वाले अनिल सिंह बीजेपी के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय के करीबी माने जाते हैं. 2014 लोकसभा चुनाव में अनिल सिंह को नवादा लोकसभा से प्रबल दावेदार माना जा रहा था लेकिन अंतिम वक्त में बीजेपी के फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह को वहां से टिकट मिला और वह डेढ़ लाख वोटों से जीतकर फिलहाल केंद्रीय मंत्री हैं.

यह भी पढ़ें-

नीतीश सरकार पर नरेंद्र मोदी की पैनी नजर, आज केंद्रीय मंत्रियों-सांसदों की बुलाई स्पेशल बैठक
BREAKING : मुगलसराय-गया रेल रूट पर मालगाड़ी डिरेल, 14 डिब्बे पटरी से उतरे
अब Paytm ला रहा है मैसेजिंग एप, Whatsapp को देगा कड़ी टक्कर
लालू बोले – नीतीश करते हैं कुर्मी रैली, हमने कभी यादव रैली नहीं की