स्विट्जरलैंड में बोतलबंद पानी बहुत महंगा है, अमेरिका में एयरपोर्ट पर फ्री wi-fi नहीं

लाइव सिटीज डेस्कः अभी सैर करने का सीजन चल रहा है. बहुत सारे लोग घरों से निकले हुए हैं. दूसरे देशों की सैर करने जाने वालों की तादाद भारत में बढ़ी है. भारत आने वाले भी बढ़े हैं. दुनिया ग्लोबल विलेज में बदली है, इसलिए कामकाज भी कई देशों में फैले हैं. दुनिया के कई देशों में सैर कर रहे लोग ट्रेवल डायरी अपने सोशल अकाउंट में लिख रहे हैं.



अपने बिहार के मधुबनी वाले राज झा अभी स्विट्जरलैंड में हैं. जो देख रहे हैं,बता रहे हैं. बड़ी जानकारी दी है. आगे आप स्विट्जरलैंड जाने को प्लान कर रहे हैं, तो जरुर ध्यान रखें. राज झा ने बताया है कि स्विट्जरलैंड में बोतलबंद पानी बड़ा महंगा है. भारतीय रुपयों में बात करें तो 750 मिलीमीटर की बोतल खरीदने को 245 रुपये खर्च करने होते हैं.

बोतलबंद पानी की इतनी महंगाई का आशय यह नहीं कि स्विट्जरलैंड में पीने का पानी है ही नहीं. दरअसल, गवर्नमेंट ने बोतलबंद पानी को इतना महंगा इसलिये कर रखा है, ताकि प्लास्टिक का प्रयोग कम से कम हो. स्विट्जरलैंड प्लास्टिक के बोतल से परेशान हो गया था. अब नीचे तस्वीर देखें, स्विट्जरलैंड गवर्नमेंट ने हर जगह पानी के ऐसे नल लगा दिए हैं. बिलकुल शुद्ध पानी है. आप पी सकते हैं,भर सकते हैं.

राज झा ने स्विट्जरलैंड की ट्रेवल डायरी में एक और फोटो अपलोड की है (नीचे देखें). वे लिखते हैं कि इस चित्र को देखकर समझना कि यहाँ क्या चल रहा है,मुश्किल है. यह चर्च के बाहर शादी हो रही है. जितने लोग फोटो के फ्रेम में हैं,कुल उतने ही हैं. कोई पांच ग्रुप थे. सब फूल लाये थे. शैम्पेन खोली गई. दिए समय पर चर्च के भीतर गए. पादरी ने शपथ दिलाई और हो गई शादी. अब आपको बता दें कि स्विट्जरलैंड की ट्रेवल डायरी लिख रहे राज झा Ogilvy & Mather से जुड़े हैं.

स्विट्जरलैंड के बाद बातें अमेरिका की. IFFCO के पब्लिक रिलेशन्स और कम्युनिकेशन्स के हेड हर्षेन्द्र सिंह वर्द्धन अभी एक इंटरनेशनल कांफ्रेंस में भाग लेने को अमेरिका गये हुए हैं. अमेरिका के एयरपोर्ट पर लैंड करते ही इन्होंने wi-fi खोजा. कनेक्ट करने की कोशिश में जान गए कि भारत के एयरपोर्ट्स की तरह यहाँ के एयरपोर्ट पर मुफ्त का wi-fi नहीं मिलता. वैसे हर्षेन्द्र का यह अनुभव चाहे जिन कारणों से भी, अच्छा रहा कि अमेरिका के एयरपोर्ट पर इमीग्रेशन में कोई समस्या नहीं आई.

अगले दिन हर्षेन्द्र मॉर्निंग में अपने होटल में ब्रेकफास्ट करने को तैयार हुए. इंडिया के बारे में तो आप सबों को पता ही है कि बड़े होटलों में कंप्लीमेंट्री ब्रेकफास्ट में इतने सारे व्यंजन होते हैं कि पूछो मत. ऐसे लोग भी मिलेंगे,जो लंच के बदले भी ब्रेकफास्ट ही कर लेते हैं. पर अमेरिका से हर्षेन्द्र बता रहे हैं कि वहां के होटलों में ऐसा नहीं होता. सैंकड़ों तरह के पकवान ब्रेकफास्ट सेशन में नहीं हैं. जो है,वह भी बिलकुल सादा है. अमेरिका के होटलों में इंडिया के होटलों की तरह सर्विस भी नहीं मिलती. अब आगे हर्षेन्द्र इस सवाल के साथ ट्रेवल डायरी को बंद कर देते हैं कि ‘फिर भी हमसे बहुत आगे ये क्यों हैं ?’

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