80 सालों में कैसे बदला समाज-शहर-परिवार, बता रहे हैं मोती लाल खेतान 

लाइव सिटीज डेस्क : मोती लाल खेतान. बिहार के औद्योगिक घरानों का शहंशाह. राजधानी पटना के फेमस खेतान मार्केट के मालिक. आज शुक्रवार (28 जुलाई) को खेतान साहब 80 वर्ष के हो गये. अपने जीवन में उन्होंने कई झंझावातों को झेला. सपनों को पूरा होते देखा. भले ही शरीर में उम्र का प्रभाव आ गया है, लेकिन सोच में किसी युवा से कम नहीं.

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लाइव सिटीज ने उन्हें जन्म दिन की बधाई देने के साथ ही परिवार से लेकर समाज और व्यापार से लेकर सरकार तक पर बातें कीं. उनके मन को भी टटोला. इस लंबी बातचीत में वयोवृद्ध व्यवसायी ने कई अनछुए पहलुओं को शेयर किया. कई प्रासंगिक बातें बतायीं. अपने दर्द को भी रखा. अपनी खुशियां भी बांटीं. लेकिन वे दुखी थे कि आज हर चीज में गिरावट आ गयी है, लोगों में इंसानियत तक नहीं रही.

वयोवृद्ध व्यवसायी मोतीला खेतान.

खास बात कि खेतान साहब को भारत के तीन राष्ट्रपतियों से मिलने गौरव प्राप्त हुआ. वे पटना सिटी स्थित अपने पुराने मकान में जब रहते थे, तब भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद से मिले थे. इसके बाद जब वे चैंबर आॅफ कॉमर्स के अध्यक्ष थे, तब उनके संस्थान में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम आये थे. इसके बाद नये राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से उनकी भेंट हुई है.

तब कोविंद राष्ट्रपति नहीं बने थे, बिहार के राज्यपाल थे. उस समय राज्यपाल उनके पटना के राजेंद्र नगर स्थित आवास पर मिलने आये थे. इतना ही नहीं, देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से भी उनकी भेंट हुई थी. तब इंदिरा गांधी उनकी फैक्टरी के उद्घाटन में पहुंची थीं. खेतान साहब जब इन सुखद अनुभूतियों से रूबरू करा रहे थे तो उनकी आंखों में आयी खुशियों को महसूसा जा सकता था.

युवा अवस्था में पत्नी के संग मोती लाल खेतान.

प्रस्तुत है वयोवृद्ध व्यवसायी मोती लाल खेतान से हुई लंबी बातचीत के प्रमुख अंश :

लाइव सिटीज : सबसे पहले आप अपने शुरुआती जीवन के बारे में कुछ बताएं ?
उत्तर : मेरा पुश्तैनी घर पटना सिटी स्थित हीरानंद शाह की गली में है. अब मैं राजेंद्र नगर स्थित मकान में रहता हूं. लेकिन आज भी पटना की गलियों से रिश्ता पहले वाला ही है, अपनापन से भरा. वहां की गलियों में ही मेरा बचपन बीता है. मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने 1959 में कॉमर्स से ग्रेजुएशन किया और बिजनेस की दुनिया में आ गया.

ग्रेजुएशन की डिग्री लेने के बाद.

लाइव सिटीज : सरकारी नौकरी या कोई प्राइवेट जॉब के प्रति कोई लगाव नहीं रहा ? 
उत्तर : बिल्कुल नहीं. मेरा शुरू से ही जॉब के प्रति कोई लगाव नहीं रहा था. कॉमर्स की पढ़ाई भी इसीलिए किया था कि मैं बिजनेस के क्षेत्र में आ सकूं. पटना सिटी के निकट बंका घाट हमें रिमोट विलेज के रूप में मिल गया. मैंने वहां अपनी सीमेंट, कंक्रीट की फैक्टरी डाली. 1967 में मैंने इसकी नींच रखी और 1968 में यह चालू हो गया. खास बात रही कि इस फैक्टरी का शुरुआती दौर भी काफी रोचक रहा. उसी साल लास्ट दिसंबर में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का अचानक पटना का प्रोग्राम बन गया. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मेरी फैक्टरी में भी पहुंचीं. उनके साथ पी चिदंबरम भी थे.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जब बिहार के राज्यपाल थे तो उस समय हुई थी भेंट.

लाइव सिटीज : फैक्टरी के क्षेत्र में कोई परेशानी ? 
उत्तर : परेशानी तो हर काम में आ सकती है. उसका मुकाबला कर बस लोगों को आगे बढ़ते रहना है. मुझे भी प्रॉब्लम आयी. लेकिन हर प्रॉब्लम, हर कठिनाई ईश्वर की मदद और लोगों के सहयोग से दूर होती चली गयी. इसके बाद तो फिर कई फैक्टरियां खुलती चली गयीं. सीमेंट के अलावा ह्यूम पाइप, इरिगेशन मैटेरियल्स  समेत अन्य प्रोडक्ट्स का उत्पादन कंपनी में होने लगा.

लाइव सिटीज : सरकार का भी कोई सहयोग मिला था ? 
उत्तर : सरकार से ही तो मेरा पाला पड़ता था. मेरे प्रोडक्ट्स की खपत सरकारी संस्थानों में ही होती थी. हालांकि डॉक्यूमेंट्स से लेकर पेमेेंट तक में परेशानी होती थी, लेकिन यह मेरी आदत में शामिल हो गया. मैं अपनी लाइफ में इसे झेलता रहा. हमें किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हुई. लेट ही सही कामों के बदले पेमेंट होता रहा. लेकिन दिनोंदिन इसमें गिरावट आती चली गयी.

करप्शन बढ़ता चला गया. एक काम के लिए कई-कई बार दौड़ना पड़ता था. यह मेरी बाद की पीढ़ी को नागवार गुजरा. सो हमारे बच्चों ने ट्रैक ही चेंज कर लिया. मेरे दोनों लड़के रामलाल खेतान और श्याम लाल खेतान बिजनेस के ही क्षेत्र में हैं, लेकिन सरकारी टाइप की फैक्टरी से दूर. पुरानी फैक्टरियां बंद हो गयीं. वे प्राइवेट सेक्टर में आ गये. अपने प्रोडक्टस को मार्केट में ही खपत करने लगे और आज भी यह जारी है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बात करते हुए मोती लाल खेतान.

लाइव सिटीज : सरकार जैसी गिरावट किसी और सेक्टर में भी देखने को मिल रहा है क्या ? 
उत्तर : यह दुर्भाग्य है कि यह गिरावट हर क्षेत्र में है. यहां तक कि इंसानियत में भी यह देखने को मिल रहा है. पहले किसी को पैसा देने या किसी से लेने की हिम्मत नहीं होती थी. कर्ज लेने में भी लोग संकोच करते थे, बेटी की शादी भी लोग जमीन बेच कर देते थे. लेकिन अब पहले वाली बात नहीं रही. स्थिति यह हो गयी है कि लोग आपका ही घर बेचकर आपको बाहर का रास्ता दिखा देंगे. हालांकि आज भी मानवता है लेकिन पहले की तरह नहीं. यह शायद ही किसी में अब देखने को मिलती है.

लाइव सिटीज : अच्छा यह बतलाइए कि इतनी लंबी उम्र में समाज व परिवार में क्या बदलाव पाते हैं ? 
उत्तर : काफी बदलाव आ गया है. न पहले वाला समाज रहा और न परिवार. विरले ही परिवार अब संयुक्त रूप से रह रहा है. पहले घर के मुखिया चाहते थे कि हमारे सभी बच्चे एक ही घर में रहे. वे लोग आपस में दुख-सुख शेयर करे. लेकिन अब एकल परिवार ने सारे रिश्ते-नातों को खत्म कर दिया है. पड़ोसी क्या अपने भी तकलीफ में नहीं दौड़ते हैं.

कमोबेश यही स्थिति समाज की भी हो गयी है. समाज भी एक परिवार जैसा था. हमें याद है कि किसी पड़ोसी के यहां गेस्ट आने का प्रोग्राम बनता था तो वह हमसे दो दिन पहले ही कह देते थे फलां दिन फ्रिज का पानी मेरे लिए रख दीजियेगा. पहले लोग बीमार पड़ते थे, दूर के पड़ोसी भी हाल-चाल लेने आ जाते थे. लेकिन, वह सब अब कहने की चीज रह गयी. अब वह न सामाजिक रिश्ता रहा और न उसमें मिठास रही. अब तो मकान मालिक बीमार पड़ते हैं तो उसके रेंटर को भी पता नहीं रहता है. लोग सेल्फिस हो गये हैं. पैसे के पीछे भाग रहे हैं. समाज सेवा से उन्हें कोई मतलब नहीं रह गया है.

पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के साथ एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए.

लाइव सिटीज : आपकी नजर में आपका शहर मतलब पटना कितना बदला ? 
उत्तर : शहर में काफी बदलाव हुआ है. विकास लगातार हो रहा है. कहां हमलोग पहले एक पुल के लिए तरसते थे, आज ओवरब्रिज का जाल बिछ गया है. फ्लैट कल्चर आ गया है. हालांकि यह जरूरी भी है. लेकिन इसके साथ ही हमारा सुकून चला गया है. ट्रैफिक के हॉच-पॉच में शहर उलझ गया है. पहले हमलोग पटना सिटी से फटफटिया से आते थे. रिक्शा चलता था.

टमटम की सवारी होती थी. काफी सुकून था. लेकिन बदलाव में हम फास्ट तो हो गये, पर बढ़ते पॉपुलेशन ने हमें परेशानी में ही डाल दिया. यही हमारी आज की लाइफ स्टाइल हो गयी है. शहर के विकास के साथ हम यदि थोड़ा मानसिक विकास भी कर लें तो बेशक जिंदगी और भी सकून वाली हो जायेगी, इसमें कोई दो राय नहीं है.

लाइव सिटीज : कुछ बचपन की रोचक बातें ?
उत्तर : बचपन का जमाना ही कुछ और था. पटना सिटी की गलियों में बचपन के वे दिन काफी निराले थे. स्कूली दिनों में बच्चे पढ़ाई के बाद खेल के मैदान में नजर आते थे. मेरे घर के बगल में ही गंगा बहती थी. मन किया तो दोस्तों व घरवालों के संग डुबकी लगा आते थे. मिठाई की दुकान से पटना सिटी की प्रसिद्ध मिठाई खुरचन का मजा ले लेते थे.

लेकिन अब इसमें भी काफी बदलाव आ गया है. बच्चे पहले टीवी, वीडियो गेम से चिपके और अब मोबाइल फोन से घंटों उलझे रहते हैं. समाज से कटता जा रहा है. उन्हें खेलकूद भी मतलब नहीं रहा. अब तो पटना सिटी में गंगा भी काफी दूर हो गयी है. वहीं लोग भी अब मशीन हो गये हैं. मेरे जमाने में डॉक्टर भी नाड़ी पकड़ कर मर्ज जान जाते थे,पर यहां भी अब मशीन का दौर आ गया है.

पूरे परिवार के साथ मोती लाल खेतान.

लाइव सिटीज : खोते जा रहे बचपन, परिवार, समाज को बचाने के लिए आपकी कुछ पहल ? 
उत्तर : बिजनेस के साथ ही मेरा समाज सेवा के प्रति भी शुरू से ही काफी रुझान रहा है. यही वजह रही कि मैं लगभग आधा दर्जन सामाजिक संस्थाओं में प्रेसिडेंट रहा, लेकिन अपनी ओर से संस्था में पद पाने की कोई पहल नहीं की. इन संस्थाओं में बिहार चैंबर आॅफ कॉमर्स, बिहार मारवाड़ी दादी सेवा समिति, वन बंधु परिषद, बिहार स्टील रिरॉलिंग मिल्स एसोसिएशन, ह्यूम पाइप इंडस्ट्रीज एसोसिएशन आदि प्रमुख हैं. रही बात बचपन बचाने की तो यह मुझे वनबंधु परिषद में करने का मौका मिला.

वनबंधु की खासियत है कि संस्था की ओर से ग्रामीण बच्चों को फ्री में पढ़ाई से लेकर कोर्स मैटेरियल्स तक दिये जाते हैं. अभी पूरे देश में इस संस्था के अधीन 65000 हजार स्कूल हैं, जिनमें बिहार में 3300 शाखाएं हैं. वर्ष 2007-08 में जब मैं इस संस्था में आया तो उस समय बिहार में 700 स्कूल थे. जब भी मौका मिला बच्चों को प्रोत्साहित करने का काम किया.

लाइव सिटीज : पटना ही नहीं, बिहार में फेमस है खेतान मार्केट, इसके बारे में कुछ बताएं ? 
उत्तर : हां, सही है कि आज खेतान मार्केट बिजनेस के क्षेत्र में धरोहर के रूप में हो गया है. यह इलाके का लैंड मार्क हो गया है. सब भगवान की कृपा है. वर्ष 1989 में खेतान मार्केट की नींव रखी गयी थी. उस समय काफी विवाद सामने आ गये थे. मामला सुपीम कोर्ट तक चला गया था. 1993 में सुप्रीम कोर्ट से मेरे पक्ष में फैसला आया. इसके बाद 1996 में यह चालू हो गया. खेतान मार्केट में 800 दुकानें हैं, लेकिन डिजाइनिंग इतनी अच्छी है कि पूरी बिल्डिंग हवादार है.

लाइव सिटीज : आपको तीन राष्ट्रपतियों से मिलने का गौरव मिला है ? 
उत्तर : यह हमें सौभाग्य मिला है कि हमने तीन राष्ट्रपतियों को देखा है. पहली बार हमें भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद से मिलने का मौका मिला था. पटना सिटी में ही हीरानंद शाह की गली में बारो महाराज रहते थे. उनका राजेंद्र बाबू से काफी बेहतर रिश्ते थे. बारो महाराज ने राजेंद्र बाबू को बहुत पहले ही आशीर्वाद दिये थे कि यह लड़का हीरा है और बहुत आगे बढ़ेगा.

इसके बाद राजेंद्र बाबू राष्ट्रपति बने. तब वे बारो महाराज से मिलने पटना सिटी आये थे. वह रात का वक्त था. उनके आने की सूचना मिलते ही हमलोग लालटेन लेकर देखने के लिए दौड़ पड़े थे. इसी दौरान राजेंद्र बाबू से भेंट हुई थी. वहीं तत्कालीन राष्ट्रपति कलाम साहब से चैंबर आॅफ कॉमर्स के भवन में एक कार्यक्रम के दौरान भेंट हुई.  वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जब राज्यपाल थे तो मेरे घर पर आये थे, वहीं उनसे भेंट हुई थी.

(वयोवृद्ध व्यवसायी मोती लाल खेतान से लाइव सिटीज के लिए राजेश ठाकुर से खास बातचीत)