हे प्रभु! आप हमें गंदे तकिये-चादर पर सुलाते हैं, मैले कंबल ओढ़ाते हैं…

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लाइव सिटीज डेस्क : एक तरफ पूरे देश में सफाई अभियान चल रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सफाई पर लोगों को जगा रहे हैं. लेकिन, लगता है इसका रेलवे में पड़ कोई असर नहीं पड़ रहा है. रेलवे का न तो ट्रेनों में यात्रियों को दिये जानेवाले भोजन पर नजर है और न ही सोने के लिए दिये जाने वाले तकिये, चादर व कंबल पर ही कोई ध्यान है.

CAG ने अपनी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया है कि रेलवे की ओर से ट्रेनों में यात्रियों को दिये जाने वाले तकिये, चादर व कंबलों की सफाई महीनों-महीनों तक नहीं होती है. नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने लिनेन कपड़ों और कंबलों की निर्धारित समय पर सफाई नहीं कराने के लिए रेलवे को फटकार लगायी है. CAG ने रेलवे से यह भी कहा है कि मानकों का हर हाल में अनुपालन होना चाहिए. अनुपालन के लिए सख्ती से पालन के लिए एक तंत्र विकसित करने की जरूरत है.
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रिपोर्ट के अनुसार ट्रेनों में इस्तेमाल होनेवाले लिनेन और कंबलों की सफाई और धुलाई में रेलवे के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है. गौरतलब है कि रेलवे बोर्ड का साफ कहना है कि प्रत्येक यात्री के इस्तेमाल किये जाने के बाद लिनेन की धुलाई की जायेगी, लेकिन हकीकत कुछ और ही है. इसी तरह कंबलों की ड्राइ क्लीनिंग हर दो माह पर अनिवार्य है. लेकिन रिपोर्ट के अनुसार इसका पालन नहीं किया जा रहा है.

वर्ष 2012-2013 से 2015-2016 के बीच में CAG ने 33 चयनित कोचिंग डिपो में कंबलों की संख्या और धुले हुए कंबलों के डाटा का स्टडी किया तो यह खुलासा सामने आया. समीक्षा में पाया गया कि 9 क्षेत्रीय रेलवे के 14 चुने हुए कोचिंग डिपो में कोई कंबल की ड्राइ क्लीनिंग नहीं की गयी थी. आश्चर्य बात तो यह है कि पांच रीजनल रेलवे के सात डिपो को छोड़कर बाकी के डिपो में लिनेन की सफाई नहीं की गयी थी.

इसी तरह रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि वर्ष 2015-2016 के दौरान 8 रीजनल रेलवे के 12 कोचिंग डिपो में 6 से 26 माह के अंतराल के बाद कंबलों की धुलाई की गयी थी. इन डिपो में लोकमान्य तिलक टर्मिनस, सियालदह, ग्वालियर, गुवाहाटी, डिब्रूगढ़, लखनऊ, सिकंदराबाद, हटिया, टाटानगर आदि शामिल हैं. कुछ ऐसी ही स्थिति ट्रेनों में यात्रियों की दी जाने वाली तकियों की भी है. उसकी सफाई का भी ध्यान ट्रेनों में नहीं रखा गया है.

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