चीन ने बना ली ‘नालंदा यूनिवर्सिटी’ और हम 10 वर्षों से काम ही कर रहे हैं…

China

लाइव सिटीज डेस्क : बिहार में दोबारा से नालंदा यूनिवर्सिटी पर काम ही चल रहा है. लगातार उनके वीसी चेंज हो रहे हैं. अभी ठीक से क्लास भी शुरू नहीं हो पायी है. नालंदा के राजगीर में भवन निर्माण की प्रक्रिया जारी है, लेकिन उधर चीन ने अपने यहां ‘नालंदा यनिवर्सिटी’ शुरू भी कर दी है. इसका नाम ननहाई बुद्धिस्ट कॉलेज रखा गया है और इसका मकसद बुद्ध धर्म, दर्शन, वास्तुकला के क्षेत्र में शोध व अनुसंधान को बढ़ावा देना है.

जी हां, इसमें चौंकने की जरूरत नहीं है. दरअसल बिहार ही नहीं, पूरे देश दुनिया में नालंदा का इतिहास रहा है. इसे दोबारा शुरू करने की कोशिश में केंद्र लगा है. इसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है. खास बात कि नालंदा यूनिवर्सिटी को दोबारा खड़ा करने के लिए चीन ने ही भारत को यह आइडिया दिया था.

China

गौरतलब है कि एक जमाना था जब उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नालंदा विवि पूरी दुनिया में देश के साथ ही अपने बिहार को भी गौरवान्वित करता था. इसके अवशेषों की खोज अलेक्जेंडर कनिघंम, तो इसकी स्थापना 450 ई. में गुप्त वंश के शासक कुमार गुप्त ने की थी. भगवान बुद्ध भी यहां आये थे. 5वीं से 12वीं शताब्दी तक बौद्ध शिक्षा केंद्र के रूप में यह विश्वप्रसिद्ध रहा था. यह दुनिया का पहला आवासीय महाविहार था, जहां 10 हजार छात्र एक साथ रहकर पढ़ाई करते थे. इतना ही नहीं, इन छात्रों को पढ़ाने के लिए 2000 शिक्षक भी थे. लेकिन, दुखद रहा कि 1193 में विदेशी आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी ने इस विवि को पूरी तरह बर्बाद कर दिया. किताबों को जला डाला.

भारत के साथ बिहार इसे दोबारा खड़ा करने की कोशिश में लगा है, लेकिन हमसे पहले चीन ने अपने यहां इसकी शुरुआत कर दी है. चीन ने नालंदा यूनिवर्सिटी की तर्ज पर ननहाई बुद्धिस्ट कॉलेज का निर्माण किया है. समुद्र के किनारे नानशान पहाड़ पर स्थित यह कॉलेज 618.8 एकड़ में फैला हुआ है. खास बात कि यह कॉलेज जिस समुद्र तट पर स्थित है, उसे ब्रह्मा की पवित्र भूमि का नाम दिया गया है.

बताया जाता है कि चीन के इस कॉलेज का कॉन्सेप्ट योग वशिष्ठ व महायान बौद्ध धर्म से मिलता-जुलता है. इस कॉलेज में बौद्ध धर्म, तिब्बती बौद्ध धर्म, बौद्ध वास्तुकला डिजाइन व अनुसंधान संस्थान समेत 6 विभाग बनाये गये हैं. इसी तरह यहां तीन भाषाओं क्रमश: पाली, तिब्बती व चीनी भाषा में पढ़ाई होगी. इसकी तैयारी पूरी हो चुकी है और इसी साल सितंबर से इस कॉलेज में पहले बैच की पढ़ाई शुरू हो जायेगी. पहले बैच में कुल 220 छात्र होंगे. जानकारी के अनुसार मॉन्क यीन शुंग को यूनिवर्सिटी का डीन बनाया है.

मालूम हो कि वर्ष 2006 में बिहार में नालंदा विवि फिर से स्थापित करने का आइडिया चीन ने ही भारत को दिया था. 455 एकड़ में बननेवाले नालंदा विवि कैम्पस पर अभी तक काम ही चल रहा है. वर्ष 2007 में संस्थान बनाने व शुरू करने के लिए मेंटर्स की एक टीम बनाई गयी थी. आज भी नालंदा में इस पर काम ही चल रहा है. एक ओर बिल्डिंग का निर्माण चल रहा है तो दूसरी ओर पढ़ाई भी शुरू कर दी गयी है. हालांकि पूरी तरह निर्माण होने में अभी भी समय लगने की बात कही जा रही है. इसी बीच कई वीसी भी बदल गये हैं.

इसे भी पढ़ें : नोटबंदी पर केंद्र सरकार को ‘सुप्रीम’ फटकार, लोगों को क्यों नहीं मिला दूसरा मौका