19 वर्षों से नरसंहार की टीस झेलते लक्ष्मणपुर बाथे के गौरव ने UPSC में किया कमाल

लाइव सिटीज डेस्क/अरवल( राकेश कुमार) : इरादे मजबूत हों तो हर बाधा दूर हो जाती है. परिस्थितियां जैसी भी हों, वे आपकी मजबूत इच्छाशक्ति के आगे अनुकूल हो जाती हैं. फिर तो मंजिल आपके कदमों में होती है.

लक्ष्मण बाथे गांव का लाडला गौरव कुमार ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. लक्ष्मणपुर बाथे गांव पर लगे नरसंहार के ‘दाग’ को धोने का यह अच्छा प्रयास है.

जी हां, अरवल स्थित लक्ष्मणपुर बाथे गांव के उस नरसंहार को याद कर लोग आज भी सिहर उठते हैं. उस गांव में वर्ष 1997 में नरसंहार में 58 लोगों की हत्या कर दी गयी थी. लेकिन यह सुखद है कि अब उस गांव की स्थिति बदलने लगी है.

युवाओं में पढ़ने की ललक जग गयी है, उनमें कुछ करने की जिद ने गांव की तस्वीर बदल दी है. माटी के लाल का आइएएस बनने पर खुशी से पूरा गांव इठला रहा है.

गौरव की मां गांव वालों को मिठाई खिलाती हुईं.

पेशे से किसान संजीव कुमार के लिए ऐसे गांव में पढ़ाना कठिन चुनौती थी. फिर उनकी माली हालत भी इस कदर ठीक नहीं थी कि अपने बेटों को पढ़ाने के लिए खर्चे जुटा सकें. ऐसे में पति-पत्नी ने मेहनत मजदूरी कर अपने बेटे के खर्च उठाने में जुट गए.

अपने बेटे को पढ़ाने के लिए उन्हें कर्ज भी लेना पड़ा. अपने माता-पिता की इस मेहनत को गौरव ने समझा. उन्होंने यूपीएसएसी कंपीट कर उनके सपने को साकार कर दिया. आज उनकी इस उपलब्धि पर पूरा गांव खुश है.

गौरव की उपलब्धि पर खुश हैं ग्रामीण.

गौरव की मां चुन्नी देवी बताती हैं कि अपने बेटे को पढ़ाने के लिए उनलोगों ने कड़ी मेहनत की है. बचपन से ही उनका बेटा होनहार था. स्कूल के शिक्षक गौरव के बड़े अधिकारी बनने की बात करते थे, जिससे उन्हें अपने बेटे को पढ़ाने की प्रेरणा मिली.

गांव के स्कूल से मैट्रिक तक की पढ़ाई करने के बाद गौरव आगे की पढ़ाई के लिए पटना पहुंचा, लेकिन पटना में पढ़ाई का खर्च उठाना माता-पिता के लिए काफी कठिन था, फिर भी उन्होंने अपने लाडले के रास्ते में बाधा को नहीं आने दिया.

इसी घर में पढ़ाई करता था गौरव.

आज माता-पिता की ही देन है कि इस विषम परिस्थिति में ही गौरव ने यूपीएससी में अच्छे रैंक लाकर अपने माता-पिता के सपनों को तो पूरा किया ही है, पूरे गांव का नाम भी रोशन किया. उनकी इस सफलता से पूरा लक्ष्मणपुर-बाथे गांव खुशी में झूम रहा है.

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