आपके पास लाख-करोड़ में रुपये हैं, तो यह खबर हरगिज न पढ़ें !

पटनाः बात देश बदलने की होती रही है . कहा गया कि हर भारतीय का अपना बैंक खाता होना चाहिए . बैंकों की शाखाएं आबादी की बसावट के पास होनी चाहिए . जीरो बैलेंस पर बैंक खाते खोलने की बात हुई . बड़ी संख्‍या में खाते खोले भी गये . लेकिन,अब सब कुछ उल्‍टा पड़ रहा है . खबर की हेडि़ंग के अनुसार फिर से स्‍पष्‍ट कर दें कि यह खबर अमीरों के लिए मतलब जिनके पास अधिक रुपये हैं,उनके लिए हरगिज नहीं है .

इस खबर को अमीरों मतलब जिनके पास अधिक रुपये हैं,के लिए इस कारण नहीं माना गया है, क्‍योंकि उनके बैंक खाते कभी मिनिमम बैलेंस का पेनाल्‍टी नहीं खाते हैं . अमीरों की परेशानी तो यह होती है कि मैक्सिमम कैश कैसे बैंकों में जमा रखें . इसके लिए बैंकिंग एक्‍सपर्ट और चार्टर्ड एकांउटेंट से मोटी फीस देकर राय ली जाती है .

बैंकों के खाते महीने की अंतिम तारीख आते-आते या इसके पहले तो उनके खाली हो जाते हैं,जो महीने की तनख्‍वाह/पेंशन/पढ़ाई के लिए मां-बाप से मिलने वाले रुपये आदि पर निर्भर रहते हैं . तारीख थोड़ी गड़बड़ हुई नहीं कि बैंक खाते में शून्‍य-शून्‍य ही दिखता है और फिर मिनिमम बैलेंस की पेनाल्‍टी भरने का रिस्‍क अलग से शुरु हो जाता है . मतलब मिनिमम बैलेंस की मार महीने की कमाई पर आश्रित लोग ही झेलते हैं . केंद्र की मौजूदा सरकार के दिनों में नियमों को और सख्‍त कर दिया गया है .

प्राइवेट बैंक सुविधाओं के नाम क्‍या कर हैं,सबों को पता है . लेकिन देश का बैंक मतलब भारतीय स्‍टेट बैंक भी कहां पीछे है . पिछले दिनों चंद्रशेखर गौड़ नामक एक आरटीआई एक्‍टिविस्‍ट ने भारतीय स्‍टेट बैंक से कुछ जानकारी मांगी थी . जवाब मिला कि फाइनेंशियल ईयर 2017-2018 के पहले क्‍वार्टर में ही बैंक ने मिनिमम बैलेंस न मेंटेन कर पाने के कारण देश के गरीबों के 388.74 लाख बैंक खातों से 235 करोड़ 06 लाख रुपये पेनाल्‍टी के रुप में वसूल लिए हैं .

अब समझने की बात यह है कि अकेले स्‍टेट बैंक ने पहले क्‍वार्टर में 235 करोड़ 06 लाख रुपये गरीबों के बैंक खातों से वसूल लिया,तो फिर दूसरे बैंकों ने और कितना वसूला होगा . प्राइवेट बैंकों की तो बात ही अलग है,क्‍योंकि वहां कब-कितना पैसे किस नाम पर कट जाए,तुरंत पता करना ही मुश्किल होता है .

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