साढ़े 10 लाख फर्जी पैन कार्ड इकोनॉमी खराब करने के लिए छोटी संख्या नहीं

लाइव सिटीज डेस्क : देश में फर्जी पैन कार्ड की संख्या एक-दो हजार नहीं, बल्कि् लगभग साढ़े 11 लाख है. इनमें से लगभग साढ़ें 10 लाख पैन कार्ड तो इनकम टैक्स पेयी से जुड़ा हुआ है. देश की अर्थव्यवस्था को खराब करने के लिए यह संख्या कोई छोटी नहीं है. यह कहना है सुप्रीम कोर्ट का.

दरअसल पैन कार्ड और आधार कार्ड को लिंक किये जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हो रही सुनवाई में यह मामला सामने आया. कोर्ट को बताया गया कि देश में जांच के दौरान पता चला है कि कुल 11.35 लाख पैन कार्ड फर्जी हैं. फर्जी इन कार्डों में से 10.52 लाख सीधे इनकम टैक्स पेयी से जुड़े हुए हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह कुल कार्ड का 0.4 परसेंट है और देश की इकॉनोमी को डैमेज करने के लिए साढ़े 10 लाख कोई छोटी संख्या नहीं है.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में आधार की अनिवार्यता के खिलाफ हो रही सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण बातें सामने आयीं. जस्टिस एके सीकरी की बेंच ने यह भी कहा कि इतनी बड़ी संख्या में फर्जी पैन कार्ड का होना देश के लिए बेहद नुकसानदेह है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पैन कार्ड और आइटी रिटर्न के लिए आधार को अनिवार्य करने के लिए बजट में इनकम टैक्स की धारा 139 एए को शामिल करने कोे सही ठहराया और कहा जिन लोगों के पास आधार कार्ड नहीं है और न आधार एनरोलमेंट आईडी है, उन्हें आधार अनिवार्यता से ‘आंशिक राहत’ दी जाती है.

कोर्ट ने यह भी कहा कि आंशिक राहत का मतलब यह नहीं कि आधार कार्ड की अनिवार्यता खत्म हो गयी. इस साल की 1 जुलाई से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने और पैन के लिए आवेदन के दौरान आपको आधार नंबर या आधार नंबर एनरोलमेंट आइडी का जिक्र करना होगा.

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