चिराग को पसंद नहीं है भीड़, दिल्ली में पासवान की कोठी पर अब इंट्री मुश्किल

लाइव सिटीज डेस्क (रुद्र प्रताप सिंह) : नई दिल्ली के जनपथ की 12 नंबर की कोठी केंद्रीय मंत्री और लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान का आवास है. यह अब बिहारियों के लिए आम नहीं रही. इसका बड़ा दरवाजा तो पहले से बंद रहता था, लेकिन छोटा दरवाजा हमेशा खुला रहता था. बिहार का कोई आदमी इस छोटे दरवाजे से बेरोक-टोक कोठी परिसर में जा सकता था. अब यह छोटा दरवाजा भी बंद हो गया. दरवाजे पर तैनात सुरक्षाकर्मी आपको बताएंगे कि यह सुरक्षा के लिहाज से किया गया है. असली वजह दूसरी बताई जा रही है. क्षेत्र भ्रमण के दौरान भीड़-भाड़ पसंद करने वाले चिराग पासवान को आवास पर भीड़ कतई पसंद नहीं है.

प्रवेश से पहले दर्ज कीजिए ब्योरा

नयी व्यवस्था के तहत पासवान की कोठी में प्रवेश से पहले आपको एक रजिस्टर पर अपना पूरा ब्योरा दर्ज करना होगा. मसलन, नाम, पता, मोबाइल नंबर, किनसे मिलना है, मिलने का मकसद क्या है और इंट्री कितने बजे हो रही है. आखिरी से पहले वाले कॉलम में दस्तखत करना है. निकलने के वक्त घड़ी की सूई के अनुसार समय दर्ज होता है. मुश्किल उन्हें होती है, जो दस्तखत नहीं कर पाते हैं. अंगूठे के निशान के लिए स्याही की व्यवस्था नहीं है. सुरक्षाकर्मी बताता है कि इसका इंतजाम भी हो जाएगा. स्टाम्प पैड के लिए कह दिया गया है.

रजिस्टर खुद देखते हैं चिराग

बताया गया कि शाम में चिराग पासवान खुद आगंतुकों के रजिस्टर पर गौर करते हैं. उन नामों पर निशान लगाते हैं, जिनकी मौजूदगी उन्हें पसंद नहीं है. मतलब, अगली बार ऐसे आगंतुक अगर आते हैं तो उन्हें कोठी से बाहर ही रखा जाता है. हां, हाजीपुर और जमुई से आने वाले लोगों के लिए थोड़ी राहत है. ब्योरा दर्ज करने के बाद उन्हें अंदर जाने दिया जाता है. राज्य के दूसरे हिस्से से आने वालों को पार्टी कार्यालय भेज दिया जाता है. भीड़ से बचने के लिए लोजपा और उसके विभिन्न प्रकोष्ठों के कार्यालयों को 12 जनपथ से हटा दिया गया है. सभी कार्यालय सांसद रामचंद्र पासवान के आवास पर भेज दिए गए हैं. कोठी में अब सिर्फ पत्रिका न्याय चक्र का कार्यालय है. पत्रिका के प्रधान संपादक रामविलास पासवान हैं. वह खुद संपादकीय लिखते हैं और प्रमुख आलेखों को प्रकाशित होने से पहले देखते भी हैं. शायद इसीलिए न्याय चक्र के कार्यालय को नहीं छेड़ा गया है. सख्ती और एक तरह की पाबंदी के चलते पासवान के आवास के बाहर पहले की तरह रौनक नहीं है. उसके बदले सन्नाटा पसरा रहता है.

मरीजों के कमरे पर पहले गिरी गाज

एक समय पासवान की कोठी में क्षेत्र के मरीजों और परिजनों के लिए आवासीय सुविधा उपलब्ध थी. उनके स्टाफ मरीजों को अस्पताल पहुंचाते थे. इलाज के लिए डाक्टरों से समय लेते थे. रेल टिकट का कंफर्मेशन और वाहन का इंतजाम भी होता था. अस्पतालों में समय दिलाने के लिए इस समय भी दो स्टाफ हैं. लेकिन, रहने की व्यवस्था 2014 में उसी समय खत्म कर दी गई, जब चिराग पासवान सांसद बनकर आए थे. किसी ने रामविलास पासवान का ध्यान दिलाया तो उनका जवाब था-लूटियन जोन में अतिरिक्त निर्माण गैर कानूनी हैं, इसलिए मरीजों-परिजनों के लिए बनाए गए शेड तोड़ दिए गए. हालांकि यह सच नहीं है. परिसर में एक बड़ा कांफ्रेस हॉल आज भी मौजूद है. इनके अलावा और भी कई छोटे निर्माण किए गए हैं.

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