अब बोर्ड भरेगा 50 लाख रुपये का जुर्माना, एडमिशन नहीं लेने की मिली सजा

Patna-High-Court

पटना (एहतेशाम) : मेडिकल प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा में अधिक अंक लाये जाने के बाद भी बीसीईसीईबी (BCECEB) की लापरवाही के कारण मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन से वंचित रह गयीं तीन छात्राओं में से दो को 20-20 लाख एवं एक छात्रा को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश पटना उच्च न्यायालय ने BCECEB को दिया है.

न्यायाधीश चक्रधारीशरण सिंह के एकलपीठ ने याचिकाकर्ता आदिश्री, दिप्ती प्रेयसी एवं मनीषा गौरव की ओर से दायर तीन अलग-अलग रिट याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

Patna-High-Courtयाचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा 2016 में इन लोगों ने मेडिकल कोर्स में नामांकन के लिए परीक्षा दी थी. इन लोगों का नाम मेरिट लिस्ट में ऊपर रहने के बाद भी यह कहते हुए एमबीबीएस कोर्स में नामांकन के लिए काउंसिलिंग नहीं करायी गयी, क्योंकि ये तीनों छात्राएं किसी अन्य कॉलेज में बीडीएस कोर्स में नामांकन करा चुकी थी. वहीं इन छात्राओं से कम अंक हासिल करनेवाले छात्रों का नामांकन एमबीबीएस कोर्स में काउंसिलिंग करा कर किया गया.

सुनवाई के समय कोर्ट में संबंधित पदाधिकारियों में बुलाकर यह जानना चाहा था कि इन छात्राओं का नामांकन अभी भी एमबीबीएस कोर्स में लिया जाना संभव है या नहीं. संबंधित पदाधिकारियों के इनकार किये जाने के बाद कोर्ट ने BCECEB को इसके लिए दोषी मानते हुए आदिश्री एवं दिप्ती प्रेयसी को 20-20 एवं मनीषा गौरव को 10 लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का निर्देश यह कहते हुए दिया कि BCECEB के गलत रवैये के कारण इन छात्राओं का उज्जवल भविष्य खराब हो रहा है.

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