क़तर में इन बिहारियों की ज़िन्दगी खतरे में है, क्या पीएम मोदी करेंगे इनकी मदद !

गोपालगंज (टीएनमिश्र) : रोजी-रोटी की तलाश में सात समंदर पार गये करीब 200 से अधिक भारतीय युवक कतर में फंस गये हैं. इनमें बिहार के गोपालगंज जिले के भी लगभग 60 युवक शामिल हैं. कतर के जंगल में फंसे युवकों की जिंदगी खतरे में है. इनको भोजन-पानी समय से नहीं मिल पा रहा है. कंपनी ने भी इन कामगारों को स्वदेश भेजने से इनकार कर दिया है. अब पीएम नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगाई है.

दोहा कतर में क्यूबीईसी कंपनी में फंसे युवाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से वतन वापसी की गुहार लगायी है. रविवार को कंपनी में फंसे गोपालगंज के बरौली थाना क्षेत्र के मोगल बिरैचा गांव के लालबाबु प्रसाद के पुत्र रंजीत कुमार, हथुआ के मिर्जापुर गांव के चंद्रदीप तिवारी के पुत्र दुर्गेश कुमार, फुलवरिया थाना क्षेत्र के चौबे परसा निवासी राजीव नंदन सिंह के पुत्र जिउत कुमार, विजयीपुर के मुसेहरी गांव के रंजीत कुमार ने ‘लाइव सिटीज’ को वीडियो और तस्वीर भेजकर आपबीती सुनाई.

युवकों ने बताया कि गोपालगंज के जादोपुर, मांझा, बरौली, हथुआ, विजयीपुर, भोरे और कुचायकोट थाना क्षेत्र के करीब 60 युवक कंपनी में फंसे हैं. छह माह पूर्व लाख-लाख रुपये खर्च कर कबूतरबाजों के चंगूल में फंस कर पैसा कमाने के लिए कतर आये थे. कंपनी में 25-25 हजार रुपये प्रतिमाह की सैलरी रखा था. लेकिन, वहां जाने के बाद सैलरी में कटौती के साथ खाना-पीना भी नसीब नहीं हो रहा है. इधर, कतर में फंसे युवकों के परिजनों की चिंता बढ़ गयी है.

डीएम से मिलेंगे परिजन, मदद की गुहार लगाएंगे

कतर में फंसे युवकों के परिजनों ने सोमवार को जिलाधिकारी से मिलकर वतन वापसी के लिए गुहार लगाने की बात कही है. बरौली थाना क्षेत्र के मोगल बिरैचा गांव के लालबाबु प्रसाद व हथुआ थाना क्षेत्र के मिर्जापुर गांव के चंद्रदीप तिवारी ने बताया कि जिलाधिकारी से मिलकर बेटे को वतन वापस बुलाने के लिए गुहार लगायेंगे. हालांकि जिला प्रशासन को फंसे युवकों के बारे में किसी तरह की जानकारी नहीं है.

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