10 मिनट तक मुलायम के पैर पकड़ गिड़गिड़ाता रहा रेप का आरोपी प्रजापति ! बोला- मुझे बचा लीजिए

लाइव सिटीज डेस्कः रेप के आरोपी गायत्री प्रजापति की समाजवादी पार्टी नेता मुलायम सिंह के पैर पकड़ने वाली खबर पर बवाल मचा है. राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है. मामला राजधानी लखनऊ का है. मुलायम सिंह जेल में गायत्री प्रजापति से मुलाकात करने जेल पहुंचे थे. जहां प्रजापति उनके पैरों में गिरकर रोता रहा. ऐसा जेल सूत्र बता रहे हैं.

बताया जा रहा है कि प्रजापति तकरीबन दस मिनट तक मुलायम सिंह के पैरों में पड़ा रहा. उसने अपनी रिहाई की भीख मांगी. सूत्रों के मुताबिक उसने मुलायम से कहा कि, मैं निर्दोष हूं, मुझे बचा लीजिए. ये मुलाकात 35 मिनट की थी. अकेले में बातचीत हुई.

मालूम हो कि 15 मार्च 2017 से जेल में बंद गायत्री प्रजापति से मिलने मंगलवार दोपहर करीब पौने एक बजे मुलायम जेल पहुंचे. उन्होंने अपने 3 सहयोगियों के साथ जेल में एंट्री की. इसके बाद कोल्ड ड्रिंक की 7 बोतलें और तीन तरह के फलों (केला, सेब, आम) के डिब्बे लाए गए. जैसे ही मुलायम जेल सुपरिटेंडेंट के कमरे में पहुंचे, उसके 3 मिनट के बाद गायत्री, विकास वर्मा और पिंटू सिंह भी आए. हालांकि, सुपरिटेंडेंट के कमरे में गायत्री अकेला गया. बता दें कि पिंटू और विकास भी इस रेप केस में आरोपी हैं.

मुलायम के पास पहुंचते ही गायत्री उनके पैर पकड़कर रोने लगा और कहा, “मुझे बचा लीजिए, मैं निर्दोष हूं. मेरे आग्रह पर आप जेल में मिलने आए, मुझे बाहर निकलवा दीजिए.” गायत्री करीब 10 मिनट तक मुलायम के पैर पकड़े रहा. इस पर मुलायम ने कहा, “तुम निर्दोष हो, जल्द ही छूटोगे. मैं बात करूंगा. जरूरत पड़ी तो सीएम से, नहीं तो पीएम और राष्ट्रपति से भी बात करूंगा.”

20 मिनट के बाद ही सुपरिटेंडेंट के कमरे से एक-एक करके सबको बाहर कर दिया गया. कमरे में सिर्फ 3 लोग ही थे. मुलायम, उनका ओएसडी और गायत्री प्रजापति. कमरे में बात शुरू होने के कुछ ही देर बाद एक फाइल बाहर से पहुंची. इसके बाद दो और लोग अंदर बुलाए गए. फिर पिंटू और विकास भी अंदर गए. हालांकि, ये दोनों 2 मिनट के बाद ही कमरे से बाहर आ गए. इसके बाद कुछ सादे पेपर अंदर भेजे गए.

बताया जाता है कि गायत्री ने डायरी के 2 पन्ने पर मुलायम को जेल से बाहर मीडिया से बोलने की पूरी स्क्रिप्ट लिखवाई. गायत्री और मुलायम के बीच अकेले में करीब 35 मिनट बातचीत हुई.

ये है पूरा मामला

17 फरवरी 2017 को गायत्री और 6 अन्य लोगों के खिलाफ रेप के आरोप में FIR दर्ज की गई थी. विक्टिम महिला ने अपनी शिकायत में कहा था कि एक करीबी ने 3 साल पहले उसकी मुलाकात गायत्री से कराई थी. गायत्री ने उसकी कुछ आपत्तिजनक फोटो ली और कई बार ब्लैकमेल किया. महिला ने आरोप लगाया कि उसके साथ अक्टूबर 2014 से जुलाई 2016 तक गैंगरेप किया गया. जब आरोपियों ने उसकी बेटी से छेड़छाड़ की कोशिश की तो उसने अक्टूबर 2016 में डीजीपी को लेटर लिखकर शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.

मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और कोर्ट ने गायत्री के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया. गायत्री का पासपोर्ट भी जब्त कर लिया गया. इसके बाद 15 मार्च को लखनऊ से गायत्री को पुलिस ने गिरफ्तार किया. मामले में 25 अप्रैल को पॉक्सो कोर्ट के जज ओपी मिश्रा ने गायत्री प्रजापति को जमानत दे दी.

इसके बाद हाईकोर्ट की एडमिनिस्ट्रेटिव कमेटी ने 28 अप्रैल की रात पॉक्सो कोर्ट के जज ओम प्रकाश मिश्र को उनके रिटायरमेंट (30 अप्रैल) से दो दिन पहले सस्पेंड कर दिया. चीफ जस्टिस ने अपने ऑर्डर में लिखा, “जिस तरह से जानकार जज ने अपराध की गंभीरता को अनदेखा करते हुए आरोपी को जमानत देने में जल्दबाजी दिखाई, उससे हमें इन न्यायाधीश की मंशा पर संदेह है, जो खुद 30/4/2017 को रिटायर हो रहे हैं.”

यह भी पढ़ें-

इलाहाबाद हाई कोर्ट की रिपोर्ट: गायत्री प्रजापति की जमानत के लिए जज ने लिए थे 10 करोड़