हत्या के आरोपी हैं नीतीश, छोड़ें कुर्सी, सीताराम सिंह के परिवार को दिलाएं इंसाफ

लाइव सिटीज डेस्कः महागठबंधन तोड़कर नीतीश कुमार के एनडीए के साथ जाने के फैसले पर अब राजद और अधिक हमलावर हो गया है. आज सोमवार को राजद कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बड़ा खुलासा किया गया. राजद की ओर से एक वीडियो जारी किया गया. इस वीडियो में 1991 से जुड़े हत्या के मामले में मृतक के भाई का बयान मीडिया के सामने रखा गया. वीडियो में दिखाया गया कि मृतक के भाई को अभी भी इंसाफ का इंतजार है.

सीएम नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए राजद के बड़े नेता जगदानंद सिंह ने कहा कि बिहार की कुर्सी पर एक हत्या का आरोपी बैठा है. किसी भी राज्य में 302 का आरोपी सीएम की कुर्सी पर नहीं बैठा. नीतीश कुमार पर हत्या जैसे संगीन आरोप लगे हैं, जिसमें अब तक कोर्ट का फैसला नहीं आया है. इसलिए राजद उनसे इस्तीफे की मांग करता है.

जगदानंद सिंह ने आगे कहा कि जब तक कोर्ट इस मामले में अपना फैसला नहीं दे देता है तब तक नीतीश कुमार को सीएम की कुर्सी पर बैठने का अधिकार नहीं है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में अब तक कोई स्पीडी ट्रायल क्यों नहीं कराया गया. सीएम नीतीश कुमार पर बड़ा आरोप लगाते हुए राजद ने कहा कि नीतीश बिहार में अपराध के सबसे बड़े पोषक हैं. उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए.

राजद की ओर से कहा गया कि सीताराम सिंह का परिवार आज तक हत्याकांड मामले में इंसाफ का इंतजार कर रहा है. नीतीश कुमार को चाहिए कि वो सीताराम सिंह की हत्या के मामले में पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाएं. उन्होंने कहा कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने हमेशा बिहार के हित में काम किया है. लालू प्रसाद इस राज्य को खंडित होने से बचाना चाहते हैं. यही उनका लक्ष्य है.

जगदानंद सिंह ने कहा कि बिहार में जो राजनीतिक बदलाव हुआ है उसके पीछे सिर्फ एक शख्स का हाथ है. जाहिर है कि राजद का यह निशाना सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ ही था. राजद ने कहा कि किसी आदर्श और सिद्धांत के आधार पर यह बदलाव नहीं हुआ है. मालूम हो कि महागठबंधन में भ्रष्टाचार की बात पर सीएम नीतीश ने एनडीए के साथ नई सरकार का गठन किया है.

क्या है पूरा मामला

दरअसल हत्या का यह मामला 26 साल पुराना है, जिसमें पंडारख थानाक्षेत्र में पड़ने वाले ढीबर गांव के रहने वाले अशोक सिंह ने नीतीश कुमार सहित कुछ अन्य लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था. अशोक सिंह ने इस बाबत दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया था कि बाढ़ सीट पर मध्यावधि चुनाव में वह अपने भाई सीताराम सिंह के साथ वोट देने मतदान केंद्र गए थे, तभी इस सीट से जनता दल उम्मीदवार नीतीश कुमार वहां आ गए. उनके साथ मोकामा से विधायक दिलीप कुमार सिंह, दुलारचंद यादव, योगेंद्र प्रसाद और बौधु यादव भी थे. सभी लोग बंदूक, रायफल और पिस्तौल से लैस होकर आए थे.

एफआईआर में आगे कहा गया है कि अचानक नीतीश कुमार ने मेरे भाई को जान से मारने की नीयत से फायर किया, जिससे घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई. एफआईआर के मुताबिक, इस घटना में शिकायतकर्ता के अलावा चार अन्य लोग भी घायल हो गए.

नीतीश के खिलाफ दर्ज इस FIR को लेकर अब यह बात सामने आ रही है कि 1991 का यह मामला वर्ष 2009 में दोबारा उछला था. तब 1 सितंबर 2009 को बाढ़ कोर्ट के तत्कालीन अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (एसीजेएम) रंजन कुमार ने इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया था.

इस पर फिर नीतीश कुमार ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दर्ज कर मामले को रद्द करने की मांग की थी. इस पर हाईकोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत के आदेश पर स्टे लगा दिया और इस हत्याकांड में नीतीश के खिलाफ चल रहे सभी मामलों को उसके पास स्थानांतरित करने को कहा था. हालांकि हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद इन 8 वर्षों के दौरान इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई.

गौरतलब हो कि पिछले दिनों राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की ओर से इस मामले को दोबारा से उठाया गया था. इस पर जदयू की ओर से सभी आरोपों को निराधार बताया गया. जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा था कि लालू प्रसाद को हमेशा गलत आरोप लगाने की आदत रही है. इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने स्टे लगाते हुए सिविल कोर्ट के जज से शोकॉज किया था.

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