संविधान पर पुनर्विचार को लेकर ऐसा सोचते हैं RSS चीफ मोहन भागवत

लाइव सिटीज डेस्कः RSS चीफ मोहन भागवत का संविधान के प्रति क्या सोचना है, उन्होंने दुनिया के सामने रखा है. मोहन भागवत का मानना है कि संविधान पर पुनर्विचार की फिलहाल जरूरत नहीं है. उन्होंने यह भी कहा संविधान की प्रस्तावना में बाद में जोड़े गए सोशलिस्ट और सेक्युलर शब्द को प्रस्तावना में रखना चाहिए या नहीं इस पर सोचना चाहिए. उन्होंने कहा कि ‘इंडिया दैट इज भारत’ की बजाय सिर्फ भारत ही हो, इस पर भी विचार किया जाना चाहिए.

बता दें कि  शुक्रवार देर शाम भागवत ने दिल्ली में एजुकेशन, इंडस्ट्री, कॉमर्स जगत के चुनिंदा लोगों के साथ ही रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स और रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर्स से मुलाकात की. बताया जा रहा है कि यह चर्चा करीब दो घंटे चली जिसके बाद सबने साथ ही डिनर किया. इसमें करीब 80 लोग शामिल थे. शुरूआत मोहन भागवत ने देश के अहम मुद्दों पर संघ की क्या सोच है यह बताकर की.

संविधान पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए या नहीं इस सवाल के जवाब में मोहन भागवत ने कहा कि संविधान के प्रस्तावना, मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्य देखकर लगता है कि संविधान बहुत अच्छे लोगों ने मिलकर और बहुत समझदारी से बनाया है. इसलिए अभी तो इस पर पुनर्विचार की जरूरत नहीं लगती.

उन्होंने कहा कि इमरजेंसी के वक्त संविधान की प्रस्तावना में सोशलिस्ट और सेक्युलर शब्द जोड़ा गया. उन्होंने कहा कि जब संविधान बन रहा था उस वक्त भी इस पर बात हुई थी कि सेक्युलर शब्द रखा जाए लेकिन फिर यह मत आया कि भारत सेक्युलर ही है तो फिर लिखने की क्या जरूरत. संघ प्रमुख ने कहा कि सोशलिस्ट शब्द का कोई निश्चित अर्थ नहीं रह गया है.

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