नरेंद्र मोदी की ‘डिक्शनरी’ से बहुत पहले डिलीट हो गया था ‘माफी’ शब्द

लाइव सिटीज डेस्क (रुद्र प्रताप सिंह) : बड़े-बड़े पत्रकारों का सुरक्षा कवच एनडीटीवी के काम आएगा, इसके आसार कम ही हैं. पूरे प्रकरण में कुछ चीजें छिपाई जा रही हैं. नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद एनडीटीवी के प्रोमोटर प्रणय राय ने उनके साथ हुई अपनी दो मुलाकातों का जिक्र पिछले दिनों किया. मुलाकात के दौरान बातें हुईं, उसका भी जिक्र किया. मगर, किसी वजह से वे पूरी बात नहीं कह पाए. अगर पूरी बात बताने की इच्छा होती तो यह जरूर बताते कि मोदी ने एनडीटीवी के कुछ पुराने क्लीपिंग्स का हवाला देकर उन्हें संकेत दे दिया था कि भले ही देश के आम लोगों के लिए वे अच्छे दिन की कामना करते हैं. राय के लिए उन्हें सिर्फ बुरे दिनों का इंतजार है.

किस क्लीपिंग्स का हवाला दिया

भाजपा सूत्रों ने बताया कि मोदी ने राय को उनके एंकरिंग की एक क्लीपिंग्स का हवाला दिया. इसमें गोधरा कांड के बाबत एनडीटीवी का रिपोर्टर कह रहा है कि इस प्रकरण में मोदी के बचने की उम्मीद नहीं है. रिपोर्टर सवाल कर रहा है-क्या मोदी को जेल भी जाना पड़ सकता है? प्रणय राय कहते हैं-हां, क्यों नहीं? आज न कल उन्हें जेल जाना पड़ सकता है. दावा है कि मोदी ने उस प्रकरण की याद दिलाकर राय को संदेश दे दिया था-हम तो गोधरा कांड में आजतक जेल नहीं गए. इसके आगे कुछ कहने के लिए मोदी कुछ देर रुके. लेकिन, कुछ बोलने के बदले जोरदार ठहाका लगाकर रह गए. यह उस मुलाकात का हिस्सा है, जिसमें राय कच्छ के रन में छुटटी बिताने की सलाह देने के लिए पीएम के प्रति आभार व्यक्त करने गए थे.

पंद्रह साल पुराना है विवाद

मामला आज का नहीं है. इंडिपेंडेंट न्यूज चैनल के तौर पर एनडीटीवी की शुरुआत 2003 में हुई. गोधरा कांड के समय एनडीटीवी एक प्रोडक्शन हाउस हुआ करता था. तब स्टार न्यूज के लिए कंटेट तैयार करने की जिम्मेवारी एनडीटीवी की ही थी. दो मुददे पर गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को सख्त एतराज था. सूरत के दंगे की रिपोर्टिंग के दौरान एनडीटीवी का रिपोर्टर गलियों में घूमकर बता रहा था कि यह हिस्सा सुनसान है. सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है. इसीतरह किसी हनुमान मंदिर को तोड़ने की भी जानकारी आॅन एयर हुई.

मोदी ने दर्ज कराया था विरोध

मोदी ने मधु किश्वर को दिए साक्षात्कार में दोनों घटनाओं का जिक्र किया है. मोदी के शब्दों में-मैंने राजदीप सरदेसाई को फोन कर अपना विरोध दर्ज किया. उन्हें बताया कि सांप्रदायिक हिंसा की रिपोर्टिंग का एक प्रोटोकाॅल होता है. इसमें समुदाय और धार्मिक स्थलों के नाम नहीं लिए जाते हैं. इसी तरह सुनसान गलियों में सुरक्षा न होने की खबर देकर आप किसे सिग्नल दे रहे हैं. आप तो आधे मिनट में अपनी बात पूरी दुनिया में फैला देंगे. लेकिन, शासन को वहां पुलिस भेजने में कम से कम तीन घंटे का समय लग जाएगा. कहते हैं कि सरदेसाई से बातचीत के दौरान मोदी ने इस तरह की खबरों को रोकने या चैनल पर पाबंदी झेलने की धमकी दी थी. चैनल के रवैये में बदलाव नहीं आया. स्टार न्यूज को एक दिन के लिए ब्लैक आउट किया गया. सरदेसाई उस समय एनडीटीवी के पार्ट थे.

चक्रव्यूह में नहीं फंसे मोदी

यह 2009 की बात है. गुजरात में विधानसभा के चुनाव हो रहे थे. एनडीटीवी पर एक कार्यक्रम चलता था-चक्रव्यूह. इसके होस्ट विजय त्रिवेदी मोदी के साथ हेलीकाप्टर में बैठे थे. इंटरव्यू ठीक-ठाक चल रहा था. त्रिवेदी ने आडवाणी और गोधरा को लेकर सवाल किया. वह कह रहे थे कि आडवाणी की उपेक्षा और गोधरा कांड के लिए माफी मांगेंगे क्या? इस सवाल पर मोदी ने डेढ़ ग्लास पानी पीया. सवाल का जवाब नहीं दिया . उनका चेहरा असहज हो चुका था. अगले पड़ाव पर हेलीकाप्टर से उतरे तो लगभग भागते हुए मंच पर चले गए. बताने की जरूरत नहीं है कि त्रिवेदी इसके आगे का सफर हेलीकाप्टर से नहीं कर पाए.

इस पर मोदी की क्या थी टिप्पणी

मोदी के मुताबिक विजय त्रिवेदी ने यह प्रचारित किया कि तीखे सवाल पूछने के चलते मोदी उन्हें हेलीकाॅप्टर से नीचे फेंकना चाह रहे थे. हालांकि, त्रिवेदी ने ऐसा नहीं कहा था . उन्होंने यह कहा था-गनीमत है कि मोदी ने उन्हें हेलीकाप्टर से नीचे नहीं फेंक दिया .\

गोधरा और पठानकोट

पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले में एनडीटीवी पर गोधरा कांड से मिलते-जुलते आरोप लगे. इस कांड में बताया गया कि एनडीटीवी अपनी खबर में पठानकोट एयरबेस की भौगोलिक स्थिति का पूरा ब्यौरा दे रहा था था. सुरक्षा का इंतजाम किधर कमजोर है और गोले बारूद कहां रखे हुए हैं. इस खबर को भी आतंकियों के लिए सिग्नल माना गया. इसमें एनडीटीवी के प्रसारण पर एक दिन की पाबंदी की सिफारिश की गई. सूचना प्रसारण मंत्री वैंकैया नायडू से प्रणय राय की मुलाकात के बाद यह पाबंदी हटी. चश्मदीद बताते हैं कि नायडू से मिलने के लिए प्रणय राय को डेढ़ घंटे तक इंतजार करना पड़ा था.

डिक्शनरी में माफी शब्द नहीं है

नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पर गौर करें तो उनकी डिक्शनरी में माफी जैसा कोई शब्द नहीं है. खासकर यह गुस्ताखी अगर गुजरात और गोधरा से जुड़ी हो तो माफी की संभावना दूर-दूर तक नजर नहीं आती है. दो नजीर बिहार में ही है. एक नम्बर- लोजपा नेता रामविलास पासवान. उन्होंने गोधरा के नाम पर वाजपेयी कैबिनेट से रिजाइन किया था. पासवान मंत्री हैं; लेकिन, उनकी हरेक एक्टीविटीज पर मोदी की कड़ी नजर रहती है. दूसरे हैं पूर्व मंत्री शहनवाज हुसैन. उन्होंने भी गोधरा कांड पर अफसोस जाहिर किया था . मोदी लहर में भी शहनवाज हुसैन हार गए. क्यों? इसे गोधरा का ही प्रताप माना जाता है. हुसैन की जगह कांग्रेसी एमजे अकबर की इज्जत अफजाई का मतलब समझने के लिए अधिक सिर धुनने की जरूरत नहीं है.

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