ट्रिपल तलाकः SC ने फैसला सुरक्षित रखा, याचिकाकर्ता शायरा बानो ने कहा- पाप है यह

लाइव सिटीज डेस्कः ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई गुरुवार को खत्म हो गई. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने माना कि वह सभी काजियों को अडवाइजरी जारी करेगा कि वे ट्रिपल तलाक पर न केवल महिलाओं की राय लें, बल्कि उसे निकाहनामे में शामिल भी करें. अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई से सुनवाई शुरू की थी.

इससे पहले, बुधवार को तीन तलाक के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने AIMPLB से पूछा था कि क्या निकाह के समय निकाहनामा में महिला को तीन तलाक के लिए ‘ना’ कहने का विकल्प दिया जा सकता है? मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने पूछा- क्या यह संभव है कि किसी महिला को निकाह के समय यह अधिकार दिया जाए कि वह तीन तलाक को स्वीकार नहीं करेगी? कोर्ट ने पूछा कि क्या AIMPLB सभी काजियों को निर्देश जारी कर सकता है कि वे निकाहनामा में तीन तलाक पर महिला की मर्जी को भी शामिल करें. इस पर सिब्बल ने कहा था कि बोर्ड के सभी सदस्यों से बात करने के बाद इसका जवाब दिया जाएगा.

वहीं, बोर्ड की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान कहा कि AIMPLB इस मामले में काजियों को अडवाजरी जारी करने को तैयार है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट को इस रीति की वैधता जानने में नहीं पड़ना चाहिए. सिब्बल ने कहा कि किसी समुदाय विशेष के रीति-रिवाजों की वैधता की जांच बेहद नाजुक मामला है और कोर्ट को इसमें नहीं पड़ना चाहिए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सिब्बल से पूछा कि ‘एक रीति जो धर्मशास्त्र के हिसाब से पाप है, वह आखिर कैसे समुदाय के रीति-रिवाजों का हिस्सा हो सकता है?’ वहीं, इस मामले में मुख्य याचिकाकर्ता सायरा बानो की ओर से पेश वकील अमित चड्ढा ने कहा कि मेरा मानना है कि ट्रिपल तलाक पाप है और यह मेरे और मेरे बनाने वाले के बीच एक दीवार है.

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