सुसाइड को कैसे रोकें… यह मलेशिया में बता रही हैं पटना की स्वाति

लाइव सिटीज डेस्क : बिहार के लिए गर्व की बात है कि यहां की बेटी विदेशी धरती पर अपना परचम लहरा रही हैं. मलेशिया में आयोजित काफन्फ्रेंस में वे बता रही हैं कि सुसाइड को कैसे रोकें. कैसे इससे लोगों को बचाएं. वे खासकर युवाओं में घर कर रही सुसाइड की ‘बीमारी’ से काफी दुखी हैं.

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दरअसल पटना के कंकड़बाग में रहनेवाली युवा लेखिका स्वाति अपनी दो किताबों से इन दिनों में काफी चर्चा में हैं. पहला नॉवेल है without a goodbye और दूसरा फोटो स्टोरी बुक है amayra : The essence of life. दोनों ही किताबें सुसाइड से जुड़ी हैं. दोनों में सुसाइड से बचने की बात कही गयी हैं. इस पर इन दिनों वे काफी रिसर्च भी कर रही हैं.

इसी रिसर्च को लेकर मलेशिया में आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में स्वाति ने शुक्रवार को अपना स्पीच दिया है. वहीं WHO के अधिकारियों के आग्रह पर गुरुवार को उन्हें स्पेशल स्पीच के लिए बुलाया गया था. उनकी काफी फोटो स्टोरी बुक amayra : The essence of life को मलेशिया में WHO के अधिकारियों ने ही नहीं, बल्कि विदेशों से कार्यक्रम में भाग लेनेवाले प्रतिनिधियों ने भी पसंद किया और स्वाति को सबों ने बधाई दी.

शुक्रवार को मलेशिया में ‘इंटरनेशनल सुसाइड प्रिवेंशन कॉन्फ्रेंस’ में भाग लेने के बाद स्वाति ने लाइव सिटीज को फोन पर बताया कि सुसाइड से आज हर कोई तबाह है. खासकर युवा पीढ़ी डिप्रेशन में आकर सुसाइड तो कर लेते हैं, लेकिन उनके पीछे परिवार को कितनी पीड़ा झेलनी पड़ती है, ये घरवाले ही समझते हैं.

बता दें कि लगभग 550 डेलिगेट्स में से बिहार से मलेशिया जानेवाली स्वाति एकमात्र प्रतिनिधि है. ‘सुसाइड को कैसे रोका जा सकता है’ पर अपनी बात रखते हुए स्वाति ने कहा कि सुसाइड को रोकने के लिए पूरे समाज को आगे आना होगा. सुसाइड करनेवाला इसके लिए अकेला रेस्पांसिबल नहीं होता है, बल्कि सोसाइटी के कई विंग भी इसके लिए जिम्मेवार होते हैं. वैसे लोगों को भी जागरूक करने की जरूरत है. वे कहती हैं कि मरीज के लिए दवा मार्केट में उपलब्ध है, लेकिन वह कौन सी दवा ले, इसे जानकारी देनेवाला कोई नहीं है. इसे मार्केटिंग के अंदाज में लोगों को अवेयर करने की जरूरत है.

WHO के निदेशक डॉ शेखर सक्सेना (Director of the Department of Mental Health and Substance Abuse) ने डेलिगेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि सुसाइड की खबर को लेकर मीडिया को भी अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेवारी निभानी होगी. उसे अपने न्यूज से लोगों को सुसाइड के प्रति हतोत्साहित करना होगा, साथ ही डिप्रेशन कैसे दूर हो, यह भी बताना होगा. सुसाइड के अधिकतर मामलों में देखा गया है कि इसके पीछे डिप्रेशन बड़ा कारण है.

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