कैबिनेट की बैठक में नहीं पहुंचे तेजस्वी, चौधरी और तेजप्रताप, पोलिटिकल कॉरिडोर में फुसफुसाहट

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लाइव सिटीज डेस्क : बिहार की सियासत में महागठबंधन को लेकर एक पखवारे से तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं. कभी पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम नीतीश कुमार के मिलने को लेकर, तो कभी सोनिया गांधी के कार्यक्रम में भाग नहीं लेने को लेकर और कभी राजद व जदयू में बयानबाजी को लेकर. अब कैबिनेट की बैठक में तीन प्रमुख मंत्रियों के भाग नहीं लेने पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गयी है कि महागठबंधन के अंदर कहीं अंदर ही अंदर कोई ‘खिचड़ी’ तो नहीं पक रही है.



दरअसल नीतीश सरकार की कैबिनेट की बैठक शुक्रवार को हुई. इसमें उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव नहीं पहुंचे. इसके बाद से महागठबंधन के अंदर कथित ‘खिचड़ी’ वाली चर्चा जोर पकड़ ली है. राजनीतिक गलियारों में हो रही चर्चा के अनुसार इंटरमीडिएट के खराब रिजल्ट को लेकर सीएम नीतीश कुमार शिक्षा विभाग के कामकाज से कुछ नाराज चल रहे हैं. सूत्रों की मानें तो खराब रिजल्ट को लेेकर नीतीश कुमार इतने गंभीर हो गये हैं कि उन्होंने सीएम आवास में लगातार दो दिन शिक्षा मंत्री के साथ बैठक की.

सूत्रों की मानें तो गुरुवार को सीएम आवास से निकलने पर शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी इतने नाराज थे कि वे पत्रकारों पर ही बरस पड़े. उन्होंने आर्ट्स टॉपर पर सहानुभूति जताते हुए मीडिया ज्ञान पर ही अंगुली उठा दी. मालूम हो कि आर्ट्स टॉपर गणेश के म्यूजिक ज्ञान पर जब पत्रकारों ने सवाल उठाया तो अशोक चौधरी भड़क गये और कहा कि पूछनेवाला कोई एक्सपर्ट था क्या? इससे उनकी नाराजगी समझी जा सकती है.

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उधर शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव भी नहीं पहुंचे. दरअसल लालू प्रसाद व उनका परिवार इन दिनों भाजपा नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के निशाने पर हैं. तेजप्रताप का नया मामला पेट्रोल पंप को लेकर उठा है. स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप पेट्रोल पंप मामले में फंसते नजर आ रहे हैं. भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने फर्जी कागजात के सहारे पेट्रोल पंप हासिल करने के आरोपों को लेकर तेजप्रताप यादव को नोटिस जारी कर दिया है.

कंपनी ने उनसे 15 दिनों के अंदर लिखित जवाब मांगा है. इसे लेकर विपक्ष नीतीश कुमार को भी घेर रहा है. विपक्ष के सवालों को वे जवाब नहीं दे पा रहे हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है कि इसे लेकर भी नीतीश कुमार अंदर से नाराज चल रहे हैं. वैसे सच यह भी है कि अभी लालू प्रसाद बीमार हैं और तेजप्रताप सूबे के हेल्थ मिनिस्टर भी हैं. IGIMS के डॉक्टर ही लालू प्रसाद की देख-रेख आवास पर कर रहे हैं.

गौरतलब है कि पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित विपक्षियों की हुई बैठक में नीतीश कुमार ने शिरकत नहीं की थी. जबकि, उस बैठक में सोनिया गांधी के अलावा लालू प्रसाद, ममता बनर्जी, सीताराम येचुरी समेत अन्य दिग्गज नेता पहुंचे थे. उस समय भी महागठबंधन में ‘दरार’ को लेकर बिहार की सियासत गरम रही. इसके ठीक अगले दिन  मॉरीशस के प्रधानमंत्री के स्वागत में आयोजित लंच पार्टी में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ नीतीश कुमार भी शामिल हुए थे. तब भी काफी शोर हुआ था कि सोनिया को ‘ना’ और नरेंद्र मोदी को ‘हां’ क्यों. बाद में राजद और जदयू की ओर से नेताओं का बयान आया कि ऐसी कोई बात नहीं है. यहां तक कि उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी ट्वीट कर ‘लंच पॉलिटिक्स’ को ‘चटनी पॉलिटिक्स’ करार दिया और मीडिया पर रायता फैलाने का आरोप लगाया.

बहरहाल एक बार फिर बिहार की सियासत में अंदरुनी चर्चा तेज है कि महागठबंधन में अंदर ही अंदर ‘कुछ’ है. लेकिन यह ‘कुछ’ क्या है, इसे बताने वाला कोई नहीं है.

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