इस्तीफा या बर्खास्तगीः तेजस्वी के सामने हैं सिर्फ दो विकल्प !

लाइव सिटीज डेस्क (रुद्रप्रताप सिंह) : बीएनआर होटल घोटाले से जुड़े एफआईआर में नामजद होने के बाद उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के पास पद छोड़ने के लिए सिर्फ दो विकल्प बचे हैं. पहला- वह खुद इस्तीफा दे दें. दूसरा- मंत्री पद से बर्खास्तगी के लिए मुख्यमंत्री की ओर से राज्यपाल को भेजी जानेवाली सिफारिशी चिटठी का इंतजार करें.

पद पर बने रहने के लिए उन्हें अधिक से अधिक चार्जशीट दाखिल होने लगने वाला वक्त मिल सकता है. यह वक्त भी अधिक लंबा नहीं होगा. क्योंकि सीबीआई की कार्यप्रणाली की खासियत यही है कि एफआइआर दर्ज करने से पहले चार्जशीट दाखिल करने लायक सबूत जुटा लिये जाते हैं.

फाइल फोटो
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मानसिक रूप से तैयार हैं

सूत्र बताते हैं कि लालू प्रसाद और उनके परिवार के दूसरे सदस्य सीबीआई की कार्रवाई झेलने के लिए मानसिक तौर पर तैयार हैं. बहुत पहले इस संभावना पर विचार किया जा चुका है कि सीबीआइ अगर एफआइआर में तेजस्वी यादव को लपेटती है तो क्या सब हो सकता है. खबर यह भी है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मसले पर लालू प्रसाद से बातचीत कर हैं. नीतीश ने छवि और अपनी सरकार की परम्परा का हवाला देते हुए साफ बता दिया कि किसी चार्जशीटेड को कैबिनेट में नहीं रख सकते हैं. सूत्रों ने दावा किया है कि लालू ने नीतीश को भरोसा दिया है कि चार्जशीट की नौबत आने से पहले वे तेजस्वी से इस्तीफा दिलवा देंगे.

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पहले भी हटे हैं मंत्री

याद दिला दें कि चार्जशीटेड होने के चलते ही नीतीश ने अपनी पहली कैबिनेट से जीतनराम मांझी का इस्तीफा ले लिया था. नवंबर 2005 में मांझी मंत्री पद की शपथ लेकर घर में समर्थकों के साथ जश्न मना रहे थे. रात करीब 10 बजे उन्हें नीतीश ने बुलाया और प्यार से इस्तीफा ले लिया. उन दिनों नीतीश मुख्यमंत्री के सरकारी आवास में नहीं गए थे. एएन कॉलेज के पास एक अपार्टमेंट में रह रहे थे. मांझी वहीं बुलाए गए. दूसरे मंत्री रामानंद सिंह के साथ भी यही हुआ था. चार्जशीटेड होने के बाद उन्हें परिवहन मंत्री का पद छोड़ना पड़ा, जबकि उनकी गिनती नीतीश के करीबी लोगों में होती थी.

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सरकार पर खतरा नहीं

तेजस्वी के कैबिनेट से हटने के बाद भी महागठबंधन की सरकार को राजद का समर्थन मिलता रहेगा. राजद कोटे के मंत्री भी अपने पद पर बने रहेंगे. इसलिए कि राजद के अधिसंख्य विधायक सरकार से अलग होने की राय नहीं रखते हैं. डर यह नहीं है कि भाजपा की मदद से नीतीश सरकार चलती रहेगी. डर यह है कि नीतीश विधानसभा भंग कर मध्यावधि चुनाव की सिफारिश न कर दें.

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तब कौन बनेगा डिप्टी सीएम

बड़ा सवाल यह है कि तेजस्वी के इस्तीफे की हालत में राजद कोटे से कौन बनेगा डिप्टी सीएम. तरह-तरह की हरकतों के चलते लालू के बड़े पुत्र तेज प्रताप चर्चा में बने रहते हैं. स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर उनकी उपलब्धियां कुछ खास नहीं है. उन्हें गंभीर प्रकृति का नहीं माना जाता है. ऐसे में अब्दुल बारी सिद्दीकी इस पद के लिए सबसे उपयुक्त बताए जा रहे हैं.

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वजह है- लालू के परिवार में कोई और इस पद के लायक नहीं है. माय समीकरण को एकजुट रखने के लिए सिद्दीकी को उप मुख्यमंत्री बनाना ठीक रहेगा. सबसे अहम यह कि नीतीश और सिद्दीकी के बीच लंबे समय से अच्छी टयूनिंग है. उस समय भी जब राजद विपक्ष में था, सिद्दीकी और नीतीश के अपनापे के किस्से जब तब चर्चा में आ जाते थे.

 

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