SC का फैसला : HIV पीड़िता का नहीं होगा गर्भपात, बिहार सरकार दे 3 लाख

लाइव सिटीज डेस्क : पटना की HIV और बलात्कार पीड़ित महिला को सुप्रीम कोर्ट से गर्भपात की इजाजत नहीं मिली है. बता दें कि 26 सप्ताह की गर्भवती का गर्भपात संभव है या  नहीं इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने AIIMS की एक मेडिकल टीम गठित कर 6 मई तक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था. AIIMS ने अपने रिपोर्ट में पटना IGIMS की रिपोर्ट को ही बरकरार रखते हुए कहा कि पीड़ित महिला का यदि गर्भपात किया गया तो उसके जान को खतरा हो सकता है. कोर्ट ने बिहार सरकार को रेप विक्टिम फंड से चार हफ्ते के भीतर पीड़िता को तीन लाख रुपये देने के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने कहा कि महिला के इलाज का सारा खर्च बिहार सरकार उठाएगी और इलाज पटना के इंदिरा गांधी इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में होगा.  

दरअसल, पटना की सड़कों पर रह रही यह बेसहारा महिला HIV पॉजिटिव है. इसके साथ पटना की सड़कों पर किसी ने बलात्कार कर लिया. जिसके बाद आज यह महिला 26 सप्ताह की गर्भवती हो चुकी है. 



सुप्रीम कोर्ट में दीपक मिश्रा की अगुवाली वाली बेंच ने कहा कि महिला पहले ही बहुत दर्द झेल चुकी है. अब उसके साथ कुछ भी बुरा नहीं होना चाहिए. AIIMS टीम को यह निर्देश दिया गया था कि लेटेस्ट 6 मई तक महिला की मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट को सौंपे.  तब तक सामाजिक संस्था NGO कोशिश इनका ख्याल रखें. यह महिला रेप की शिकार होने के बाद पटना के शांति कुटीर में रहती है. इसके लिए सरकार की ओर से पेश अपर सोलिसिटर जनरल पीएस नरसिम्हा और तुषार मेहता को निर्देश दिया कि इस पीड़िता को कोई दर्द नहीं होना चाहिए. इनका पूरा ख्याल रखा जाए. इनके ट्रेवल और खाने-पीने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.

बता दें कि इससे पहले पीड़ित महिला के गर्भपात कराने को लेकर पटना हाई कोर्ट में भी याचिका डाली गई थी. जिस पर कोर्ट ने IGIMS की एक मेडिकल टीम गठित कर महिला के स्वास्थ्य की जांच करने का निर्देश दिया था. 17 मार्च को कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई कि अबोर्शन में सर्जिकल प्रोसेस से गुजरना होगा. इस दौरान महिला के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा. अत्यधिक खून का स्राव और बेहोशी जैसे हालात उत्पन्न हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में यह संभव नहीं है.

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