‘आपके योगदान के लिए शुक्रगुजार हैं भारतीय’ पीएम मोदी ने माही को लिखी भावुक चिट्ठी, धोनी ने कहा-शुक्रिया

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने 74वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अंतराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कर दिया. महेन्द्र सिंह धोनी की घोषणा के बाद देश दुनिया में उनके चाहने वालों ने अपने अपने विचार व्यक्त किए थे.

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी धोनी के सन्यास की घोषणा को भावुक क्षण करार देते हुए उन्हें पत्र लिखा है. पीएम के पत्र को माही ने अपने ट्वविटर अकाउंट पर शेयर कर प्रधानमंत्री को शुक्रिया भेजा है.



धोनी ने ट्विटर पर लिखा, ‘एक कलाकार, सैनिक और खिलाड़ी को तारीफ की कामना होती है. वो चाहते हैं कि उनकी मेहनत और कुर्बानियों को सभी पहचानें. शुक्रिया पीएम नरेंद्र मोदी, आपकी तरफ से मिली तारीफ और शुभकामनाओं के लिए.’

पत्र में पीएम मोदी ने लिखा कि आप में नए भारत की रुह झलकती है, जहां युवाओं की किस्मत उनके परिवार का नाम तय नहीं करता है, बल्कि वे अपना खुद का मुकाम और नाम हासिल करते हैं. 15 अगस्त 2020 को आपने सादगी भरे अंदाज में एक छोटा वीडियो शेयर किया जो पूरे देश में एक लंबी और बड़ी बहस के लिए काफी था. 130 करोड़ भारतीय नागरिक निराश हैं लेकिन साथ ही आपने पिछले डेढ़ दशक में भारत के लिए जो किया उसके लिए आपके शुक्रगुजार भी हैं.’ 

‘आपके करियर को आंकने का एक तरीका आंकड़ो के चश्मे से देखने का है. आप भारतीय क्रिकेट के सबसे कामयाब कप्तानों में शुमार किए जाते हैं. भारत को दुनिया में टॉप टीम बनाने में आपका अहम रोल रहा है. क्रिकेट इतिहास में आपका नाम दुनिया के बेस्ट बल्लेबाजों में, बेस्ट कप्तानों में और बेशक बेस्ट विकेटकीपर्स में लिखा जाएगा. मुश्किल हालात में आप पर निर्भरता और मैच को पूरा करने का आपका स्टाइल, खास तौर पर 2011 वर्ल्ड कप फाइनल, कई पीढ़ियों तक लोगों को याद रहेगा.’

आगे उन्होंने लिखा है ‘धोनी का नाम सिर्फ उनके करियर के आंकड़ो के लिए याद नहीं किया जाएगा और न ही किसी इकलौते मैच को जीतने में उनकी भूमिका के लिए जाना जाएगा. आपको सिर्फ एक प्लेयर के तौर पर देखना नाइंसाफी होगी. आपको देखने का सही तरीका एक फिनॉमिना है. एक छोटे शहर से उठकर आप नेशनल लेवल पर छा गए, आपने अपने लिए नाम बनाया और सबसे अहम ये है कि देश का गौरव बढ़ाया.’

साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘आपकी तरक्की और उसके बाद के जीवन ने उन करोड़ो नौजवानों को प्रेरणा दी तो महंगे स्कूल या कॉलेजो में नहीं जा पाए और न ही वो किसी नामी गिरामी परिवार से आते हैं लेकिन उनके पास खुद को सबसे ऊंचे स्तर पर स्थापित करने की क्षमता है. हम कहां से आए हैं यह बहुत ज्यादा मायने नहीं रखता जब तक हमें यह पाता हो कि हम किस तरफ जा रहे हैं- आपने यही भावना पेश की और कई युवाओं को इससे प्रेरित किया.’