TOPPER SCAM : पुलिस की गिरफ्त में रैकेट का सबसे बड़ा ठेकेदार संजय कुमार

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फाइल फोटो

लाइव सिटीज डेस्क :  बिहार बोर्ड के फर्जी टॉपर घोटाले में पहले दिन से लगातार खुलासा कर रही लाइव सिटीज की स्‍पेशल इन्‍वेस्‍टीगेशन टीम के सदस्‍य ने अपनी पड़ताल में एक और बड़ा खुलासा किया है. लाइव सिटीज की टीम को तफ्तीश के दौरान ऐसे सबूत मिले जिससे गणेश जैसे फर्जी टॉपरों के ठेकेदार तक पहुंचना आसान हो गया.  मिली जानकारी के अनुसार पटना पुलिस अब इस टॉपर घोटाले के मास्टरमाइंड संजय को गिरफ्तार भी कर चुकी है. 

इस तरह हुआ फर्जी टॉपर के ठेकदार संजय का भंडाफोड़



आज शनिवार सुबह समस्तीपुर में एक ऐसे दलाल का भंडाफोड़ हुआ जो फर्जी तरीके से टॉपर बनाने का ठेका लिया करता था. उस दलाल का नाम संजय है. संजय समस्तीपुर स्थित रोसड़ा के हरिपुर का रहने वाला है.  लाइव सिटीज की इन्वेस्टीगेशन टीम ने जब समस्तीपुर में संजय के पिता राम नारायण सिंह  से बातें की तो उन्होंने बताया कि संजय पटना में अपने परिवार के साथ रहता है. लेकिन वो क्या करता है इस बात की जानकारी उन्हें भी नहीं थी.

संजय कुमार के पिता रामनारायण सिंह

गणेश के मैट्रिक स्कूल से पता चला संजय का ठिकाना 

जब लाइव सिटीज की टीम शिवाजी नगर स्थित संजय गांधी उच्च विद्यालय पहुंची जहां से गणेश ने मैट्रिक पास किया था. तो वहां से संजय का पूरा काला चिटठा सामने आने लगा.

उम्र प्रमाण के लिए दिया गया घोषणा पत्र

वहां के एच एम पति व  पूर्व सचिव से पता चला कि संजय ने ही गिरिडीह के रहने वाले गणेश का नामांकन समस्तीपुर के इस स्कूल में कराया. संजय गांधी उच्च विद्यालय में गणेश ने नौवीं कक्षा में सारे नियमों को ताक पर रख कर सिर्फ घोषणा पत्र के बल पर नामांकन पा लिया था. यह घोषणा पत्र देने वाला कोई और नहीं फर्जी टॉपर का ठेकेदार संजय था.

संजय गणेश का नामांकन उस स्कूल में कराने के लिए खुद उसका अभिभावक बन बैठा. और उसकी जन्म तिथि की जानकरी भी उसने उस घोषणा पत्र में कर दी. लाइव सिटीज की टीम ने स्कूल से उस घोषणा पत्र कि प्रति भी प्राप्त की जिसमें संजय ने लिखा है कि वो गणेश का अभिभावक है और गणेश उसकी देखरेख में उसके ही घर रह कर आठवीं कक्षा तक पढाई की है. इसलिए उसका नामांकन नौवीं कक्षा में किया जाए.

संजय गांधी उच्च विद्यालय

बता दें कि इस स्कूल की स्थापना 1978 में की गई थी. बिहार सरकार से इस स्कूल की संबद्धता को लेकर बताते हैं कि 1983 में इस स्कूल को मान्यता मिली थी. जिसके संस्थापक सचिव रामकुमार चौधरी थे. जांच में यह पता चला है कि संजय गाँधी उच्च  विद्यालय  लक्ष्मीनिया सिर्फ कागज़ पर ही चलता है .एक बोर्ड तक स्कूल में नहीं है . यह वही स्कूल है जहाँ  से इंटर टॉपर गणेश कुमार ने मैट्रिक परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास किया था .

घोषणा पत्र

जांच टीम को मौके पर स्कूल के संचालक तो नहीं मिले लेकिन बुजुर्ग हो चुके पूर्व सचिव रामकुमार चौधरी बताते हैं कि गणेश को संजय ही इस स्कूल में दाखिले के लिए लाया था. जब उनसे पूछा गया कि किस आधार पर गणेश का नामांकन हुआ तो उनका कहना था कि अभिभावक घोषणा पत्र के आधार पर उसका नामांकन किया गया था.  जहां नामांकन के लिए टीसी की जरूरत होती है वहां सिर्फ घोषणा पत्र पर नामांकन मिल जाना इस स्कूल पर बड़ा सवाल खड़ा करता है.

प्रवेश पंजी

बातचीत के दौरान संचालक के परिजन बताते हैं कि गणेश आनुपातिक तौर पर स्कूल आया जाया करता था.  चूंकि सरकारी स्कूलों में पोषाहार की राशि मिलती है. जिसके लिए गणेश के नाम से 10 हजार रुपये का चेक भी पिछले साल 2016 से स्कूल में रखा हुआ है. लेकिन गणेश से संपर्क नहीं हो पाने के कारण गणेश को यह राशि अब तक दी भी नहीं गई है.

स्कूल के भीतर का दृश्य

स्कूल और संजय के परिजन से मिली जानकारी के बाद यह साफ़ हो गया कि संजय ऐसे लोगों को ढूंढ कर इस तरह के स्कूलों में दाखिला कराने यानी दलाली का काम करता था.  फिलहाल संजय पटना पुलिस की गिरफ्त में है.

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