‘भ्रष्ट लालू प्रसाद को तब PM मनमोहन सिंह ने बचा लिया था’

पटना : जदयू के वरिष्ठ नेता-सह-बिहार के जल संसाधन मंत्री ललन सिंह ने रेलवे टेंडर घोटाले को लेकर कई खुलासे किये हैं. उन्होंने मामले में सीधे-सीधे तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर राजद सुप्रीमो सह तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को बचाने का आरोप लगाया है. उन्होंने एक अंग्रेजी टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि साल 2008 में जदयू ने इस मामले को कागजातों के साथ उठाया था लेकिन सरकार ने उचित कदम नहीं उठाया.

ललन सिंह ने अंग्रेजी न्यूज़ चैनल रिपब्लिक टीवी से बात करते पूर्व पीएम मनमोहन सिंह पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि साल 2008 में उनके पास लालू प्रसाद से जुड़ी जमीनों की रजिस्ट्री के कई कागजात आये थे. ये कागजात तीन तरह के थे. सिंह ने कहा कि इनमें पहले ऐसे कागजात थे, जिनमें लालू प्रसाद के करीबी प्रेम गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता की ‘डिलाइट मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम पर कई जमीनों की बेहद कम कीमत पर रजिस्ट्री कराई गई थी.

बचा रहे थे
ललन सिंह. फाइल फोटो

बता दें कि रेलवे ने तब पुरी और रांची स्थित भारतीय रेलवे के बीएनआर होटलों के नियंत्रण को पहले आईआरसीटीसी को सौंपा और फिर इसका रखरखाव का काम ‘सुजाता’ और ‘चाणक्या’ होटल्स के मालिकों को दे दिया गया था. आरोप है कि जिन जमीनों की रजिस्ट्री कराई गई, वो इन निजी होटलों के मालिकों की ही थी. यहां यह भी बताते चलें कि ‘डिलाइट मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड’ बाद में ‘लारा’ बन गई जिसके डायरेक्टर्स में लालू परिवार के लोग शामिल थे.

सिंह ने आगे बताया कि कागजातों की दूसरी केटेगरी में ऐसे कई जमीनों की रजिस्ट्री के कागजात हैं, जिनमें कई गरीब लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई और फिर बदले में उनसे एक या दो कट्ठे की जमीन लिखवा ली गई थी. उन्होंने कहा कि ये जमीनें लालू परिवार के सदस्यों के नाम पर ही लिखवाई गई थी. ललन सिंह ने तीसरी केटेगरी के बारे में बताया कि इनमें उन्हें वैसे कागजात मिले थे, जिनमें स्पष्ट था कि चारा घोटाले में लालू प्रसाद के पक्ष के कई गवाहों के परिवार के लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई थी.

जदयू नेता ने कहा कि इन कागजातों को लेकर वे और जदयू के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास गए थे. मनमोहन सिंह को वे कागजात सौंप कर कार्रवाई करने की मांग भी की गई थी. लेकिन सिंह ने कहा कि बाद में मनमोहन सरकार ने उन कागजातों को रेलवे मंत्रालय को ही भेज दिया और मंत्रालय से इन मामलों में टिप्पणी मांगी गई. तब लालू प्रसाद ही केंद्रीय रेल मंत्री थे. उन्होंने सवाल किया कि ये कैसे हो सकता है कि कोई मंत्रालय अपने ही मंत्री के खिलाफ जांच करे.

ललन सिंह ने इस दौरान केंद्र सरकार पर तत्कालीन CAG को भी प्रभावित करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि CAG एक स्वतंत्र संस्था है जो सरकार के खर्चों पर नजर रखती है. ऐसा कैसे संभव है कि CAG की ऑडिट में केंद्रीय मंत्रालय का यह मामला नहीं आया था. और वो भी तब जब उनके द्वारा दिए गए कागजातों को लेकर काफी बहस भी हुई थी इसकी ,मीडिया में रिपोर्टिंग भी की गई थी. उन्होंने कहा कि यह साफ़ है कि तब प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने अपनी सरकार चलाने और सरकार को बचाने के लिए CAG की गतिविधियों को प्रभावित किया.

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