लालू के साथ गठबंधन के सवाल पर मांझी ने दिया है बड़ा जवाब, बीजेपी पर भी बोले

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जीतनराम मांझी (फाइल फोटो)

लाइव सिटीज डेस्क : बिहार के पूर्व सीएम जीतनराम मांझी ने बड़ा बयान दिया है. इनका बयान उस संदर्भ में है जिसमें यह कहा जा रहा था कि उनकी पार्टी और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी लालू प्रसाद के साथ गठबंधन कर सकती है.  साथ ही उन्होंने खुद के सीएम रहते हुए वाकयों का भी जिक्र किया कि कैसे अधिकारी उनकी बातों को अनसुना कर देते थे. मांझी ने एनडीए में अपनी अनदेखी के साथ नीतीश कुमार को लेकर भी कई बातें कही हैं.   लालू से मिले अली अनवर, मांझी-कुशवाहा को दिया न्यौता, नीतीश पर भी बोले
मांझी ने बातचीत में लालू प्रसाद के साथ गठबंधन को लेकर पूछे गये सवाल पर बेबाकी से कहा है कि राजनीति में कुछ भी संभव है. मांझी ने कहा कि यदि नीतीश कुमार भाजपा के खिलाफ लालू प्रसाद यादव से गठबंधन कर सकते हैं, तो वे क्यों नहीं लालू के साथ जा सकते हैं. उन्होंने साफ कहा कि राजनीति में कुछ भी संभव है. मांझी की बातों से स्पष्ट लगा कि आने वाले दिनों में यदि एनडीए में उनके प्रति दृष्टिकोण को बदला नहीं गया, तो वह दूसरा कदम भी उठा सकते हैं.

लालू प्रसाद (फाइल फोटो)

मांझी ने सीएम रहते हुए अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि 2014 लोकसभा चुनावों के बाद उन्हें मुख्यमंत्री बना तो दिया गया, लेकिन उनकी कुछ चलती नहीं थी. उन्होंने बिना लाग लपेट के कहा कि नीतीश कुमार के नौकरशाहों के सामने उनकी एक नहीं चलती थी. पूर्व सीएम मांझी ने यह भी कहा कि वे अपने फैसले सरकार में लागू नहीं कर सके. उन्होंने कहा कि उनकी लगातार उपेक्षा हो रही थी और उनके सीएम रहते उनके ही अधिकारी दूसरों के निर्देशों पर चल रहे थे, तो मजबूरन चार महीने बाद उन्होंने चुप्पी तोड़नी शुरू की.



नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

उन्होंने कहा कि उन्होंने जानबूझकर कोई विवादित बयान नहीं दिया था और उन्हें जो सही लगा वही किया. मांझी ने कहा कि जब नीतीश कुमार उनको हटाना चाहते थे, तो उनको खुलकर बोलना चाहिए था. मांझी ने कहा कि यदि नीतीश सीधे कहते तो वे सीएम की कुर्सी छोड़ देते. बकौल मांझी उन्हें इस बात का दुख है कि उन्होंने दूसरे माध्यम से बात कहलवाई.

उन्होंने कहा कि बीजेपी ने उनका साथ नहीं दिया. मांझी ने कहा कि यदि भाजपा पूरा साथ देती तो वे जरूर सरकार बचा लेते. मांझी ने कहा कि बीजेपी की धोखेबाजी का अंदाजा उन्हें पहले ही लग गया था और मुश्किल घड़ी में साथ देने वाले अपने समर्थक विधायकों को वे परेशानी में नहीं डालना चाहते थे इसलिए फ्लोर पर जाने से पहले अंतिम वक्त में राजभवन जाने का फैसला किया.