AES पर बिहार में सियासत गर्म, जीतनराम मांझी ने सीएम नीतीश से मांगा इस्तीफा

लाइव  सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बिहार के मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों में AES से मासूम बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है. अब तक बिहार में 150 से अधिक बच्चों की मौत AES के कहर से हो चुकी है. वहीं सरकार के कई मंत्री और अन्य नेताओं ने इस बीच मुजफ्फरपुर पहुंचकर बीमार बच्चों का जायजा लिया. मंगलवार को सीएम नीतीश ने भी मुजफ्फरपुर जाकर बीमार बच्चों का हाल जाना था. हालांकि सीएम के दौरे के बाद मुख्य सचिव ने कहा था कि सरकार अस्पताल के इलाज से संतुष्ट है.

सीएम नीतीश से इस्तीफे की मांग

वहीं बिहार में AES से बच्चों की मौत को लेकर सियासी पारा भी हाई है. बिहार के पूर्व सीएम और हम पार्टी के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने AES से बच्चों की मौत के लिए केंद्र और राज्य सरकार को जिम्मेदार बताया है. उन्होंने कहा कि चमकी बुखार से डेढ़ सौ से अधिक बच्चों की इलाज के अभाव में हुई मौत के लिए केन्द्र और राज्य सरकार दोनों जिम्मेदार हैं. जीतन राम मांझी ने कहा कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए.

नीतीश कुमार आला व्यक्ति हैं

बता दें कि हम प्रमुख जीतनराम मांझी पार्टी कार्यकर्ता के निजी कार्यक्रम में शामिल होने फतुहा पहुंचे थे. मीडिया से बात करते हुए मांझी ने कहा कि वादाखिलाफी और लापरवाही के लिए केंद्र और राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्रियों को भी इस्तीफा देना चाहिए. उन्होंने सीएम नीतीश कुमार पर तंज करते हुए कहा कि ‘नीतीश कुमार आला व्यक्ति हैं. अभी तक मैंने बाढ़ का हवाई सर्वेक्षण करते देखा था. पहली बार लू में हवाई सर्वेक्षण की बात सुनी’.

दिखावटी चीजों पर खर्च करती है नीतीश सरकार

वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन पर निशाना साधते हुए हम सुप्रीमो ने कहा कि 2014 में ही उन्होंने सभी अस्पताल में 100 बेड का आईसीयू लगाने की बात कही थी. आज तक उस वादा को पूरा नहीं किया गया. अब जब मुजफ्फरपुर में 150 से अधिक बच्चों की जान चली गई है तो घड़ियाली आंसू बहाकर फिर से वहीं ऐलान कर रहे हैं. जीतनराम  मांझी ने कहा कि दवा और जांच की व्यवस्था अगर अच्छी होती तो इतने बच्चे  नहीं मरते. केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही गरीबों के प्रति असंवेदनशील है. उन्होंने बिहार सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर म्यूजियम, सभ्यता द्वार और सम्राट अशोक हॉल जैसी दिखावटी चीजों के बदले सरकार अस्पताल पर खर्च करती तो बच्चों की जान बचाई जा सकती थी.

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बता दें कि बिहार में AES का कहर जारी है और मासूम बच्चों की मौत का आंकड़ा 150 के पार पहुंच चुका है. मुजफ्फरपुर के साथ-साथ इस बीमारी का प्रभाव बिहार के 16 जिलों में है. हालांकि मुजफ्फरपुर में इस बीमारी ने सबसे ज्यादा तांडव मचाया है. सिर्फ मुजफ्फरपुर में अबतक AES के कहर से 122 मासूमों की जान जा चुकी है और कितने ही बच्चे अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं या आ रहे हैं.

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