राजनीति नहीं नौकरी करना चाहते हैं कन्हैया

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लाइव सिटीज डेस्क : जेएनयू के एक्स स्टूडेंट्स प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार ने अपने दिल की बात  मीडिया के सामने रखी. कन्हैया ने यह साफ़ किया कि वे पीएचडी की डिग्री लेने के बाद एक बेहतर जॉब करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि मेरी कोई इच्छा नहीं है कि मैं राजनीति में अपनी उम्मीदवारी पेश करूँ. 

बता दें कि कन्हैया को देशद्रोह के मामले में दिल्ली पुलिस ने 16 फरवरी 2016  को गिरफ्तार कर लिया था. जिसके बाद कन्हैया काफी सुर्ख़ियों में आ गए थे. उन्हें जेल भी जाना पड़ा था. उनके प्रभावी भाषण से यह माना जा रहा था कि कन्हैया एक बेहतर पॉलिटिशियन बन सकते हैं. लेकिन हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कन्हैया ने कहा कि मेरी कोई इच्छा नहीं है कि मैं पॉलिटिक्स ज्वाइन करूँ. मैं भी आम छात्रों की तरह पढाई पूरी कर के जॉब करना चाहता हूँ.

कन्हैया ने बातों-बातों में राजनीति में परिवारवाद पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि मैं तो जेएनयू अपनी पढाई करने आया था. चुनावी राजनीति का तो बना-बनाया स्ट्रक्चर है. यदि आप किसी मंत्री के बेटे हैं तो आप सोशल मीडिया पर आपके लिए पोस्ट डालने वाला हायर कर लीजिए. वो आपके ट्विटर, फेसबुक हैंडल मैनेज करता रहेगा. और एक दिन आप भी मंत्री बन जाएंगे. लेकिन मेरे लिए यह ज्यादा महत्वपूर्ण है कि हम कैसे अपने सामाजिक अनुभव को राजनीति में पहुंचा सकते हैं.

कन्हैया ने वर्तमान राजनीति पर हमला बोलते हुए कहा कि भारत को “निर्दलीय राजनीतिक हस्तक्षेप” की जरूरत है क्योंकि देश को एक सामाजिक आंदोलन की जरूरत है. कन्हैया ने कहा पीएम मोदी अपने हर वादे में विफल हुए हैं. उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी 2014 के चुनावों से पहले दो करोड़ नौकरियों का वादा किये थे. जिसे पूरा करने में विफल रहे हैं, और “आर्थिक स्तर पर असफलता से देश के ध्यान को दूर करने के लिए नए-नए विवादों को पैदा कर रहे हैं.”कन्हैया ने आगे कहा कि उपनिवेशवाद के प्रति भारत की प्रतिक्रिया सच्चाई और अहिंसा पर आधारित थी.लेकिन आज, “हिंसक प्रवृत्तियों को उकसाया जा रहा है”

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