रवीश ने कहा– हवा में 25 हेलीकाप्‍टरों में नेता सिर्फ चोरी के पैसे से उड़ते हैं

नई दिल्‍ली : जाने-माने टीवी एंकर और पत्रकार रवीश कुमार आज रविवार की सुबह नई दिल्‍ली के एक ग्राउंड पर दर्शकों के साथ सवाल-जवाब के सेशन में थे . इसका प्रसारण फेसबुक पर लाइव था . साथ में,देश के दूसरे बड़े पत्रकार राजदीप सरदेसाई भी थे . तीखे सवाल-जवाब का दौर चल रहा था . 

चर्चा शुरु हुई ट्विटर और फेसबुक हैंडल पर महत्‍वपूर्ण शख्सियतों को ट्रोल कर दी जाने वाली गालियों की . रवीश ने कहा – जान लीजिए,गाली देश नहीं बक रहा है . संगठित गिरोह पैदा हो गया है . इसे पैदा किया गया है . गुंडे तैयार किये गये हैं . कई तरीके की ताकतें पीछे हैं . मकसद,जो ठीक न लगे,उसे गालियों से जवाब दो . मैं जानना चाहता हूं कि ये शुरुआत कब हुई 2014 से कि 2015 से या फिर 2016 में . जरा गाली देने वालों से पूछिए कि क्‍या वे अपने घरों में भी गाली से बातें करते हैं . 

दर्शक दीर्घा से रवीश की संपत्ति का सवाल भी आ गया . तब रवीश बोले – मेरे पास जो भी है,सौ फीसदी ईमानदारी का पैसा है . ईमानदार हूं,इसलिए नोट बदलने बैंकों की लाइन में लगने नहीं गया था . वे बोले – पैसे का सवाल उनसे पूछिए,जो 25 हेलीकाप्‍टरों से हवा में उड़ते हैं . उनके पास कौन-सा कमाई और मेहनत का पैसा है . हेलीकाप्‍टरों में उडने को पैसा सिर्फ हराम और हलाल से उनके पास आता है . नेता कब कमाई के लिए मेहनत करते हैं . इसलिए जब कोई हेलीकाप्‍टर उड़ता दिखे तो कहना शुरु करिए कि चोर जा रहा है .

रवीश से पूछा गया कि आप रहते-रहते खामोश हो जाते हैं/पीछे हट जाते हैं – आखिर क्‍यों ? रवीश ने जवाब दिया कि मैं टेस्‍ट का प्‍लेयर हूं . ओवर में पांच गेंदों को झेलता-देखता-समझता हूं . फिर छठे गेंद पर छक्‍के मार देता हूं . तो हो गया न हिसाब बराबर . अपनी ताकत की चर्चा करते हुए रवीश ने कहा कि मेरे जीवन में एकाकीपन बहुत है . लोगों से बहुत घुलता-मिलता नहीं हूं . अपना काम लगातार करता रहता हूं . फिर लड़ने के लिए तैयार हो जाता हूं . असली योद्धा तो वो है,जो जबरिया कालर ऊंचा किए लोगों का कालर अपने दम नीचे कर देता है . 

इस सेशन में राजदीप सरदेसाई ने कहा कि रवीश जब मीडिया इंडस्‍ट्री में आए थे,ता उनके हेयर कट देवानंद की तरह थे . वे रिपोर्टर बनना चाहते थे . लेकिन उनकी टांग कई लोग खिंच रहे थे . मैंने तब समझाया . देवानंद किस्‍म हेयर कट खत्‍म करने की सलाह भी दी थी . पर रवीश नहीं माने . अपने धुन के जिद्दी थे . सो,आगे बढ़ते गये . वे नार्थ इंडियंस जो आदतन अपने इलाकाई लोगों को आगे नहीं आने देना चाहते,रवीश को नहीं रोक पाये . उन्‍होंने रवीश की तुलना क्रिकेटर महेन्‍द्र सिंह धोनी से की . कहा- धोनी भी छोटे शहर से आए और छा गए . रवीश ने भी बिहार के मोतिहारी से चलकर आज इस मुकाम पर पहुंचकर दुनिया को जतला दिया कि छोटे शहर वाले भी दुनिया भर में छा जाना जानते हैं .

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