रेप के आरोपी गायत्री प्रजापति को जमानत देनेवाले जज सस्पेंड

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गायत्री प्रजापति का फाइल फोटो

लाइव सिटीज डेस्क : यूपी के अखिलेश सरकार में रेप के ओरापी तत्कालिक मंत्री गायत्री प्रजापति को आप अभी तक भूले नहीं होंगे. पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उसे पिछले साल बर्खास्त कर दिया था, लेकिन मुलायम सिंह के कहने पर प्रजापति को फिर से मंत्री बना दिया था. इसी दौरान अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ओमप्रकाश मिश्रा ने प्रजापति को जमानत दे दी थी. इसी मामले में मिश्रा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सस्पेंड कर दिया है. बता दें सस्पेंड होनेवाले जज 30 अप्रैल को रिटायर होनेवाले हैं.

जानकारी के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार में कैबिनेट मंत्री और गैंगरेप के आरोपी गायत्री प्रजापति को बेल देने वाले अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश को हाई कोर्ट की प्रशासनिक समिति ने सस्पेंड कर दिया. हाई कोर्ट ने सस्पेंड होनेवाले जज मिश्रा के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं. जज ओमप्रकाश मिश्रा के सारे अधिकार भी जब्त कर लिये गये हैं. मालूम हो कि मिश्रा POSCO कोर्ट में तैनात थे.

गायत्री प्रजापति का फाइल फोटो

गायत्री प्रजापति को बेल देने के फैसले के खिलाफ सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान ही जज ओमप्रकाश मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई के संकेत मिल गये थे. इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीश डीबी भोंसले ने कोर्ट से उठते ही इस बाबत निर्देश जारी किया. गौरतलब है कि प्रजापति की जमानत पर विरोध जताते हुए हाई कोर्ट ने कहा था कि जिन स्थितियों में उसे बेल दिया गया है, वह घोर आपत्तिजनक है. बता दें कि जज ओमप्रकाश मिश्रा ने प्रजापति जमानत देते हुए कहा था कि अभियुक्तों के साथ सहवास में महिला की सहमति थी. महिला ने 3 साल से दुष्कर्म होने के बाद भी कहीं शिकायत क्यों नहीं की.

मालूम हो कि अखिलेश सरकार में मंत्री रहे गायत्री प्रजापति पर वर्ष 2014 में एक महिला से रेप व उसकी बेटी से दुष्कर्म की कोशिश के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था. 17 फरवरी को हाई कोर्ट के आदेश पर गायत्री प्रजापति समेत 6 अन्य लोगों पर मुकदमा किया गया था. योगी सरकार के बनने के बाद पुलिस ने प्रजापति को गिरफ्तार करके जेल भेजा था.

उसे लखनऊ के अशियाना इलाके से गिरफ्तार किया गया था.