जिंदगी पर जूनियर डॉक्टरों की जिद भारी, अब तो मरीज भी कहने लगे- मान जाइए ‘धरती के भगवान’

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर नहीं मान रहे हैं. जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का बुधवार को आठवां दिन है. इस आठ दिनों में जिनके घरों में गंभीर बीमारी के मरीज हैं, उन्हें ही पता चल रहा होगा कि उन पर क्या बीत रहा है. बिहार सरकार की हर धमकी बेकार साबित हो गई है.

जूनियर डॉक्टरों की जिद के आगे सरकार की धमकी की ऐसी की तैसी हो गई है. हां, अब डॉक्टर इतना रहम कर रहे हैं कि वे ओपीडी को डिस्टर्ब नहीं कर रहे हैं. रजिस्ट्रेशन काउंटर को बाधित नहीं कर रहे हैं. आने वाले मरीजों को तंग नहीं कर रहे हैं. लेकिन सही से इलाज नहीं होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है. 



बिहार में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल 23 दिसंबर से ही जारी है. लगभग 1300 जूनियर डॉक्टर स्टाइपेंड की राशि बढ़ाने की मांग को लेकर कार्य बहिष्कार किया है. इसका सीधा असर पटना में पीएमसीएच व एनएमसीएच के अलावा दरभंगा में डीएमसीएच, गया में एएनएमसीएच, भागलुपर में जेएलएनएमसीएच व मुजफ्फरपुर में एसकेएमसीएच में पड़ रहा है.

शहर के बाहर से आने वाले मरीजों की परेशानी बढ़ गई है. ऑपरेशन टाले जा रहे हैं. गंभीर रोगों से ग्रस्त दर्जन भर मरीजों की अब तक मौत हो गई है. हड़ताल के शुरुआती दिनों में तो पटना सिटी में एक महिला की मौत हो गई थी, जिस पर मृत महिला के बेटे ने कहा था, आपका तो पैसा बढ़ जाएगा डॉक्टर साहब, लेकिन मेरी मां नहीं लौटेगी. 

दूसरी ओर, सरकार की ओर से भी टाइम टू टाइम धमकी दी गई. ‘नो वर्क नो पे’ की तर्ज पर स्टाइपेंड से राशि काटने की बात कही गई. हॉस्टल से निकालने की धमकी दी गई. कोर्ट में केस करने की चेतावनी दी गई. इसके बाद भी जूनियर डॉक्टर नहीं माने. आज बुधवार को एक बार उन्होंने खुद को ड्यूटी से अलग रखा है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी चौबे और बिहार सरकार में शामिल केंद्रीय मंत्री मंगल पांडेय की अपील को भी डॉक्टरों ने ठुकरा दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पहल करने का आग्रह किया है. कांग्रेस ने भी सरकार से डॉक्टरों के प्रति सहानुभूति रखने की मांग की है. यहां तक कि बीती रात प्रधान सचिव प्रत्यय  अमृत ने भी काम पर लौटने की अपील करते हुए कहा कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा. इस पर जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने साफ साफ कह दिया कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक वे लोग काम पर नहीं लौटेंगे.

अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजन

मरीजों की बढ़ गई है परेशानी

जूनियर डॉक्टर की हड़ताल के कारण पीएमसीएच में मरीजों की परेशानी बढ़ गई है. खासकर दूसरे शहरों से पीएमसीएच आने वाले मरीजों को फजीहत झेलनी पड़ रही है. उनकी न तो सही तरीके से जांच ही की जा रही है और न ही कोई अन्य काम ही हो रहा है. चाहे बात ड्रेसिंग की हो या एक्सरे की अथवा ब्लड चेकिंग की, उन्हें काफी कठिनाई हो रही है. जिन्हें जरा सी भी पहुंच है, वे दूसरे अस्पतालों में चले जा रहे हैं और जिनका कोई नहीं है, वे भगवान भरोसे पड़े हुए हैं.