Kartik Purnima 2018: पटना के गंगा घाटों पर उमड़े श्रद्धालु, इस बार बन रहा है ये दुर्लभ संयोग

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्कः कार्तिक मास में आने वाली पूर्णिमा के दिन कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) मनाई जाती है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की खास पूजा और व्रत करने से घर में यश और कीर्ति की प्राप्ति होती है. कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीपदान (Deepdan) और गंगा स्नान का बेहद महत्व है. इस बार यह पूर्णिमा आज 23 नवंबर को है. इसी पूर्णिमा के दिन सिखों के पहले गुरु नानक जी का जन्म हुआ था, जिसे विश्वभर में गुरु नानक जयंती (Guru Nanak Jayanti) के नाम से मनाया जाता है. इस जयंती को गुरु पर्व (Guru Parv) और प्रकाश पर्व (Prakash Parv) भी कहते हैं.

पटना में गंगा स्नान को पहुंचे श्रद्धालु

इधर बिहार समेत पूरे देश में कार्तिक पूर्णिमा को लेकर गंगा में स्नान जारी है. बात करें राजधानी पटना की तो गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जमा है. भारी तादाद में लोग गंगा स्नान के लिए पहुंच रहे हैं. वहीं पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह से मुस्तैद दिख रहा है. पटना के एनआईटी घाट और काली घाट पर विशेष इंतजाम किए गये हैं. वहीं गाय घाट पर भी लोगों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है.

साल 2018 का अंतिम पर्व कार्तिक पूर्णिमा सनातन धर्म का बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है. यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को आता है. इसी दिन महादेव ने त्रिपुरासुर नामक असुर का संहार किया था. इसी कारण से इसे त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहते हैं. इस अवसर पर पवित्र नदी का स्नान, दीपदान, भगवान की पूजा, आरती, हवन तथा दान का बहुत महत्व है.

इस बार कार्तिक पूर्णिमा में दिनांक 22 को ही 12 बजकर 55 मिनट पर पूर्णिमा आरंभ होकर 23 को 11 बजकर 11 मिनट पर समाप्त हो जाएगी. यदि इस दिन आप गंगा स्‍नान करते हैं तो आपको विशेष फल की प्राप्‍ति होगी क्‍योंकि इस दिन आकाश से अमृत वृष्टि होती है. इसी अमृत को पाने के लिए लाखों श्रद्धालु धर्मनगरी में स्‍नान करने आते हैं.

पौराणिक कथाएं

कार्तिक पूर्णिमा के बारे में माना जाता है कि इसकी शुरुआत तब हुई थी जब भगवान शिव ने राक्षसों के राजा त्रिपुरासुर का वध किया था. इसीलिए इसे त्रिपुरी पूर्णिमा या त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है कि त्रिपुरासुर ने देवताओं को पराजित कर उनके राज्‍य छीन लिए थे. उसकी मृत्‍यु के बाद देवताओं में उललास का संचार हुआ, इसलिए देव दिवाली कहा गया. देवताओं ने स्‍वर्ग में दीये जलाए. आज भी कार्तिक पूर्णिमा के दिन मंदिरों में और गंगा नदी के घाटों पर दीये प्रज्‍वलित किए जाते हैं.

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