लालू की किताब का नाम बदल दिया JDU ने, रखा- ‘गोपालगंज से होटवार भाया रायसीना’

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर बिहार में सियासी पारा चढ़ा हुआ है. बिहार जदयू से एक बड़ी खबर आ रही है. जदयू नेता श्याम रजक के आवास पर पार्टी की तरफ से प्रेस कांफ्रेंस की गई. पटना के हार्डिंग रोड आवास पर जदयू पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में एनडीए के नेता रामकृपाल यादव को जिताने को लेकर संकल्प लिया गया. इस बैठक में संजय सिंह के अलावा कई और नेता मौजूद थे.

इस बैठक में जदयू ने लालू प्रसाद की किताब का नाम भी बदल दिया है. किताब का नाम रखा ‘गोपालगंज से होटवार भाया रायसीना’. संजय सिंह ने किताब के साथ-साथ तेजस्वी यादव को भी नहीं छोड़ा. यहां तक उनके भाई तेजप्रताप पर भी बड़ा आरोप लगाया है. संजय सिंह ने कहा कि तेजस्वी अपने बड़े भाई तेजप्रताप यादव को परिवार में कोई तवज्जों नहीं दे रहे हैं. तेजप्रताप एक सीट की मांग कर रहे लेकिन उनको नहीं दिया जा रहा है. यह दर्शाता है कि तेजप्रताप की परिवार में कितना तवज्जों मिलता है. इसलिए वो ज्यादा पीड़ित है.

संजय सिंह ने कहा कि रामकृपाल यादव यहां भारी मतों से जीतेंगे. उनको मीसा भारती से कोई चुनौती नहीं है. जदयू नेता ने कहा कि पाटिलपुत्र के साथ-साथ बिहार के 40 सीटों पर हमलोग जीतेंगे. विपक्ष कहीं से भी कोई मुकाबला नहीं कर सकता है.

इस बैठक में लालू प्रसाद यादव की किताब ‘गोपालगंज से रायसीना’ पर भी संजय सिंह खूब बरसे. उन्होंने कहा कि इस किताब के बारे में कहा कि इसमें केवल अपने परिवार के बारे में जिक्र हुआ है न कि बिहार में लालू जी 15 साल क्या किये हे उसके बारे में थोड़ा भी जिक्र नहीं हुआ है.

‘गोपालगंज से होटवार भाया रायसीना’

1. हाल ही में लालूजी पर जो पुस्तक आई हैं उसका नाम ही लेखक ने गलत रखा हैं. लालूजी की जीवनी के पुस्तक का नाम ‘गोपलागंज से होटवार भाया रायसीना’ होना चाहिए था तब पुस्तक को देखकर ही पता चल जाता है कि लालूजी पर हैं.

2. अभी लालूजी की राजनीति गोपालगंज पटना रायसीना से होती हुई होटवार तक पहुंची है. अब यह तिहाड़ या बेऊर तक जाएगी. ये तो भगवान और लालूजी का कुकर्म ही निर्णय करेगा.

3. प्रशांत किशोर की वार्तालाप के संबंध में लालूजी द्वारा जो कहा जा रहा उसे चुनौती देते हुए प्रशांत किशोर द्वारा कहा गया कि अगर उस मीटिंग के वार्तालाप को वे उजागर कर देंगे तो लालूजी को शर्मिंदा होना पड़ेगा.

3. अब यह लालूजी को निर्णय लेना है या उनके तथाकथित होनहार पुत्र को कि उन्हें प्रशांत की चुनौती स्वीकार करना है कि नहीं ? जूनियर लालूजी तेजस्वी यादव ने भी यह स्वीकार किया है कि इस काम में कांग्रेस भी लगी हुई थी तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि कांग्रेस की तरफ से कौन-कौन नेता इस कार्य में लगे थे ?

5. पुस्तक लेखन की एक गरिमा होती है. लेखक पुस्तक में उद्धत अंश या घटना को स्पष्ट करें कि वे उस समय स्वयं उपस्थित थें या उन्हें किसी के द्वारा बताया गया. लेखक महोदय से मेरी विनती है कि वे स्पष्ट करें कि प्रशांत किशोर तथा लालूजी से मुलाकात के समय वे उपस्थित थे या उन्हें उन दोनों के द्वारा बताया गया ?

लालूजी के जीवनी पर लिखी गई पुस्तक के लेखक ने कुछ भी नई और सही बात या जानकारी न लिखकर मुलत: स्पष्ट रूप से लालूजी सरीखे भ्रष्ट नेता की छवि सुधारने का कुत्सित प्रयास कर नई पीढ़ी में पुर्नस्थापित करने की एक कोशिश मात्र है जो झूठ और पत्रकारिता का पुलिंदा है.

 

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