लालू प्रसाद की सुरक्षा से NSG वापस, मांझी के साथ भी अब CRPF नहीं

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प्रतीकात्मक फोटो

पटना : बिहार के सियासी तापमान को बहुत गरम कर देने वाली बड़ी खबर आ रही है. फैसला भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने लिया है. तत्काल प्रभाव से राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की NSG सुरक्षा वापस होगी. उन्हें अबतक Z+ केटेगरी की सुरक्षा मिली हुई थी. आगे उनके साथ कैसी सुरक्षा होगी, अभी तय होना है. केंद्र ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को Z+ की मिली सुरक्षा भी वापस कर ली है. उनके साथ किसी भी केटेगरी में CRPF को तैनात करने का आदेश अभी नहीं प्राप्त हुआ है. इसके बाद जीतन राम मांझी काफी नाराज हो गए हैं.

केंद्रीय गृह मंत्रालय की सुरक्षा वापसी का आदेश आज 26 नवंबर सन्डे को दोपहर में पटना को प्राप्त हुआ है. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के साथ लंबे अरसे से Z+ केटेगरी के तहत नेशनल सिक्यूरिटी गार्ड (NSG) के कमांडो तैनात रहते थे. मालूम हो कि कुछ माह पहले केंद्र ने अशोक चौधरी को भी मिली Y केटेगरी की सुरक्षा वापस कर ली थी. तब चौधरी बिहार में महागठबंधन की सरकार में शिक्षा मंत्री और बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष थे.

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NSG सुरक्षाकर्मियों के घेरे में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद (फाइल फोटो)

लालू प्रसाद को अब Z केटेगरी की सुरक्षा मिल सकती है

जानकार बता रहे हैं कि Z+ केटेगरी को घटा कर अब लालू प्रसाद को Z केटेगरी की सुरक्षा मिल सकती है. लेकिन इस आशय का आदेश अभी होना है. Z केटेगरी में किसी भी तरीके से NSG कमांडो नहीं मिल सकते हैं. केंद्र सरकार ने Z केटेगरी मंजूर कर ली, तो CRPF के जवान लालू प्रसाद की सुरक्षा में तैनात किये जायेंगे. केंद्र सरकार के इस फैसले को निश्चित तौर पर बिहार की राजनीति में अलग-अलग चश्मे से देखा जाएगा. वैसे तो केंद्र कहेगा कि उसने सुरक्षा एजेंसियों की इनपुट पर निर्णय लिया है.

सुरक्षाकर्मियों के घेरे में पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी (फाइल फोटो)

जीतन राम मांझी के साथ अब CRPF नहीं

केंद्र ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की Z+ केटेगरी की सुरक्षा ही ख़त्म की है. कोई नई केटेगरी अभी नहीं दी गई है. ऐसे में उनके साथ CRPF नहीं रह सकती. अभी तैनात CRPF वापस हो रही है. मांझी केंद्र के इस फैसले से बहुत उदास हैं. वे आज दिन में गया में थे, शाम को पटना लौटे हैं. माना जा रहा है कि भाजपा के साथ अन-बन के कारण नुकसान हो गया. मांझी गया में बेहद नक्सल प्रभावित इलाके से आते हैं. ऐसे में उनकी सुरक्षा को हमेशा जरुरी माना जाता रहा है.

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