स्वर्गीय रामविलास पासवान को मिले भारत रत्न, जीतनराम मांझी ने राष्ट्रपति को लिख दी चिट्ठी

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : लंबे अर्से तक भारत की जनता के दिलों पर राज करने वाले दिवंगत राजनेता रामविलास पासवान पंचतत्व में विलीन हो गए. पटना के दीघा घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ. इसके साथ ही उन्हें भारत रत्न देने की मांग उठने लगी है.

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा है. जिसमें इन्होंने स्वर्गीय पासवान जी को भारत रत्न देने की मांग की है. साथ ही दिल्ली स्थित उनके आवास को पासवान स्मारक बनाए जाने की बात कही है.



जीतनराम मांझी ने स्वर्गीय रामविलास पासवान को जनता का नायक बताते हुए कहा कि प्रदेश ही नहीं देश के गरीब, शोषित, वंचित और शोषितों को उन्होंने आवाज देने का काम किया. समाज के गरीब तबके के विकास के लिए हरसंभव काम किया. अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उनके द्वारा किए गए कार्य दूसरों के लिए एक प्रेरणादायक साबित होगा. ऐसे नेता का खोने का गम हम सभी को ताउम्र रहेगा.

मांझी से पहले लोजपा सांसद पशुपति कुमार पारस ने भी स्वर्गीय रामविलास पासवान को भारत रत्न देने की मांग की. अपने दिवंगत भाई को याद करते हुए सांसद पारस ने कहा कि उनका जीवन समाज के लिए प्रेरित था. राजनीतिक हो या फिर व्यक्तिगत जीवन दोनों ही उन्होंने समाज के लिए समर्पित किया था.

बता दें कि 1969 में पहली बार विधायक बने पासवान अपने साथ के नेताओं, लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार से सीनियर थे. 1975 में जब आपातकाल की घोषणा हुई तो पासवान को गिरफ्तार कर लिया गया, 1977 में उन्होंने जनता पार्टी की सदस्यता ली और हाजीपुर संसदीय क्षेत्र से जीते. तब सबसे बड़े मार्जिन से चुनाव जीतने का रिकॉर्ड पासवान के नाम ही दर्ज हुआ.

2009 के चुनाव में पासवान हाजीपुर की अपनी सीट हार गए थे. तब उन्होंने NDA से नाता तोड़ राजद से गठजोड़ किया था. चुनाव हारने के बाद राजद की मदद से वे राज्यसभा पहुंच गए और बाद में फिर NDA का हिस्सा बन गए. 2000 में उन्होंने अपनी लोकजनशक्ति पार्टी बनाई. पासवान ने अपने राजनीतिक जीवन में 11 बार चुनाव लड़ा और 9 बार जीते. 2019 का लोकसभा चुनाव उन्होंने नहीं लड़ा, वे राज्यसभा सदस्य बने. अभी मोदी सरकार में खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री थे.

पासवान के नाम कई उपलब्धियां हैं. हाजीपुर में रेलवे का जोनल ऑफिस उन्हीं की देन है. अंबेडकर जयंती के दिन राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा पासवान की पहल पर ही हुई थी. राजनीति में बाबा साहब, जेपी, राजनारायण को अपना आदर्श मानने वाले पासवान ने राजनीति में कभी पीछे पलट कर नहीं देखा. वे मूल रूप से समाजवादी बैकग्राउंड के नेता थे.