#एकशामशूरवीरोंकेनाम : कुछ तो है इस बिहार की मिटटी में…, शौर्यपुरुषों की है यह धरती

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बिहार की राजधानी पटना में लाइव सिटीज लोगों को झुमाने के लिए तैयार है. कार्यक्रम का काउंट डाउन शुरू हो गया है. 23 फरवरी शुक्रवार की शाम लाइव सिटीज पटना के एसके मेमोरियल हॉल में ‘एक शाम शूरवीरों के नाम’ का आयोजन कर रहा है. कार्यक्रम में देश के फेमस सिंगर हरिहरन के तराने गूंजेंगे. सिंगर हरिहरन अपने गीतों व गजलों से कार्यक्रम में मौजूद देश के जवानों से लेकर आम आदमी तक का जोश बढ़ाएंगे. लाइव सिटीज ने भी लोगों से अपील की है कि वे तिरंगा के साथ आएं और शूरवीरों को जोश बढ़ाने के लिए आर्मी संग झूमें. उन्हें याद करें. इसी कड़ी में हम बिहार के भी शूर वीरों को याद कर रहे हैं. पढ़िए आगे ऐसी ही एक कहानी…

कुछ तो है इस राज्य की मिट्टी में. आज भी देश की सीमा पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए सबसे ज़्यादा जवान बिहार के ही शहीद होते हैं.  बिहार हमेशा से शौर्यपुरुषों की धरती रही है जिसने देश के लिये अपना सब कुछ दिया. चूँकि यह राज्य है उस भव्य विरासत का जिसकी कल्पना मात्र से हमारा स्वाभिमान जाग जाता है. अपने इतिहास को पढ़ हमें असीमित ऊर्जा का बोध होता है. यह राज्य है दिनकर, रेणु, बेनीपुरी और नागार्जुन जैसे प्रभावशाली साहित्यकारों का. इनकी लेखनी देश की स्वतंत्रता के पहले और बाद भी जनचेतना को हवा देती रही.

भारत छोड़ो आंदोलन में यह दिन 11 अगस्त 1942 को देश कैसे भूल सकता है. यह बिहार और पूरे स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का सबसे अविस्मरणीय दिन था. पटना सचिवालय का गोलीकांड जिसमें बिहार के 7 छात्र शहीद और कई घायल हो गये थे. इसमें उमाकांत प्रसाद सिंह, रामानंद सिंह, सतीश प्रसाद झा, जगपति कुमार, देवीपद चौधरी, राजेन्द्र सिंह और राय गोविंद सिंह थे. उस वक्त ये सभी ग्यारहवीं बारहवीं के ही छात्र थे लेकिन अंग्रेजों के खिलाफ़ स्वंत्रता आंदोलन में भारत माता के लिये अपने प्राण न्योछावर कर दिये. आज इनकी स्मृति आपको पटना सचिवालय में देखने को मिल सकती है. #एकशामशूरवीरोंकेनाम : पटना में गूंजेंगे हरिहरन के तराने, जवानों को याद करेगा लाइव सिटीज

इस आंदोलन में बिहार के करीब 15,000 से अधिक लोग बंदी बनाये गये थे, 7000 से ज़्यादा लोगों को सजा मिली और 134 बिहारियों ने अपनी जान की कुर्बानी दी. इतिहास को जानने वाले लोग कैसे भूल सकते हैं दीवाली की वह रात जब जयप्रकाश नारायण और उनके साथी हज़ारीबाग जेल से भागकर सभी शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रीय झंडे लहराये थे. भारत छोड़ो आंदोलन में महिलाओं की भी अहम भूमिका रही थी. उस समय यह किसी अद्वितीय पराक्रम से कम नहीं था. लाइव सिटीज की ओर से शहीदों को नमन करने पटना आ रहे हैं हरिहरन, गायिकी से देंगे श्रद्धांजलि 

इस आंदोलन को व्यापक बनाने में महिलाओं और चर्खा समिति का बड़ा योगदान था. इन्होंने शुरूआत में ही इस आंदोलन को हवा दे दी थी. 9 अगस्त 1942 को राजेन्द्र प्रसाद की बहन भगवती देवी के नेतृत्व में एक जुलूस निकाला गया था. आप इन महिलाओं के पराक्रम का अंदाज़ा इस बात से लगा सकते हैं कि श्री नरसिंह गोप की पत्नी जिरियावती ने अकेले 16 अंग्रेज सिपाहियों को गोली मार दी थी. राम विनोद सिंह की दो पुत्रियाँ शारदा और सरस्वती को तिरंगा फहराने के जुर्म में चौदह और ग्यारह वर्षों की सजा सुनाई गई थी. इसी तरह सविनय अवज्ञा आंदोलन में भी श्रीमती हसन इमाम और विन्दयवासिनी देवी ने भी महिलाओं का नेतृत्व किया था. इसी तरह बिहार की कई महिलाओं ने पुरूषों के साथ कदमताल मिलाकर स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी भूमिका निभाई थी. बिहार रेजीमेंट की लंबी है शौर्य गाथा, हर बार लहराया जीत का परचम, याद कर रहा है लाइव सिटीज

यह राज्य है उस लिच्छवी गणराज्य का जिसने सिखाया कि आजादी की गंध जिसके केंद्र में गण हो वहीं से आती है. यह राज्य है उस चंद्रगुप्त का जिसने सेल्यूकस को कहा था कि हम मागह हैं और हमारा स्वर इस दुनिया के स्वर से सैदेव ऊँचा रहेगा. यह राज्य है उस अंग प्रदेश के राजा कर्ण की जिसने सालों से अर्जुन के साथ युद्ध की चेतना पाली हुई थी. लेकिन उन्होंने सर्प अश्वसेन के साथ मिलकर अर्जुन का वध नहीं अपनी वीरगति को स्वीकार किया. यह राज्य है उस महाकवि दिनकर का जिसने संसद में तत्कालीन प्रधानमंत्री को अपनी पंक्तियों से चुनौती दी थी.

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