ट्रेन में ज्‍यादा कंफर्ट महसूस करते हैं, इमरजेंसी में ही फ्लाइट्स पकड़ते हैं

पटना (लाइव सिटीज के लिए मिताली) : पिछले हफ्ते पटना आने के लिए नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन पर खड़ी थी . प्‍लेटफार्म पर राजधानी एक्‍सप्रेस के आने का इंतजार कर रही थी . आस-पास जमा लोग बिहार के सियासी संकट को बहस छेड़े थे . इनसे जान रही थी कि कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी ने बिहार इश्‍यु को डिस्‍कस करने के लिए अपने नेताओं को आज दिल्‍ली बुला रखा था . बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी और मदन मोहन झा का नाम विशेष रुप से लिया जा रहा था . 

प्‍लेटफार्म पर चहलकदमी करती हुई मैं कुछ आगे बढ़ गई . तभी मेरी नजर डा. मदन मोहन झा पर टिक गई . मैं कभी मिली नहीं हूं . सोशल मीडिया से जानती रही हूं . मुझे थोड़ा आश्‍चर्य हो रहा है . मंत्री के परसेप्‍शन वाला कोई ताम-झाम नहीं है . मुझे लगा कि बिहार में इतनी हलचल है,सोनिया गांधी दिल्‍ली में मीटिंग कर रहीं हैं,फिर ये प्‍लेटफार्म पर आम मुसाफिरों की तरह क्‍यों टहल रहे हैं . शायद किसी को छोड़ने आये हों . मेरी सोच की वजह है कि मंत्री आम तौर पर ट्रेनों से नहीं चला करते . शपथ लेते ही हवा में उड़ने लगते हैं .

सांसदों के बारे में हमें पता है कि वे फ्लाइट्स के टिकट सस्‍ते भी हों,तो दिन के सबसे महंगे फ्लाट्स की टिकट लेंगे . कारण यह कि उन्‍हें टिकट की कीमत के हिसाब से कई तरीके की सुविधाओं के शुल्‍क का भुगतान किया जाता है . टिकट का खर्च भी सरकार वहन करती है . सो,महंगे टिकट लेंगे,तो सुविधा शुल्‍क का पेमेंट भी अधिक प्राप्‍त होगा .

खैर,नई दिल्‍ली से पटना जाने को राजधानी एक्‍सप्रेस अब प्‍लेटफार्म पर आ चुकी है . अब मैं ट्रेन में बिहार सरकार में कांग्रेस के मंत्री मदन मोहन झा को सवार होते देख रही हूं . मतलब यह कि वह किसी को छोड़ने नहीं स्‍वयं राजधानी एक्‍सप्रेस से पटना चलने को आये थे . अब मेरे मन में कई सवाल फिर से खड़े हैं . टिकट जांचने को रेल बाबू आये हैं . मैंने अपनी टिकट जंचवाने के बाद यह पूछ ही लिया कि बिहार के मिनिस्‍टर मदन मोहन झा भी इसी ट्रेन में चल रहे हैं क्‍या ?  रेल बाबू जवाब ‘हां’ में देते हैं . 

आगे टिकट जांचने के बाद रेल बाबू जब वापसी में मेरे पास से फिर‍ से गुजरने को होते हैं,तो उन्‍हें टोकने को मैं रोक लेती हूं . पूछती हूं कि और भी कोई मंत्री साथ में चल रहे हैं क्‍या ?  जवाब ‘नहीं’ में मिलता है . साथ में रेल बाबू यह जरुर बता देते हैं कि मदन मोहन झा अकेले ऐसे मंत्री हैं,जो अब भी रेलवे की सवारी सबसे अधिक करते हैं . दूसरे मंत्री तो हवाई जहाज में उड़ने के आदि हो गये हैं . हां,चेले-चपाटों को साथ ले जाने की मजबूरी हो,तो जरुर ट्रेन में सवार हो जाते हैं .

पटना आने के बाद भी मेरे मन का कौतूहल समाप्‍त नहीं हुआ है . फ्लाइट्स में उड़ने के हकदार होने के बाद भी मंत्री मदन मोहन झा ट्रेन की सवारी ही क्‍यों करते हैं,मुझे जानना है . कइयों से पूछती हूं . पत्रकारों से जानती हूं . मदन मोहन झा बिहार सरकार में राजस्‍व व भूमि सुधार विभाग के मंत्री हैं,उनके महकमे से पता करती हूं . मंत्री बिहार के सियासी संकट को लेकर अधिक व्‍यस्‍त हैं,इसलिए नहीं मिल पाती हूं .

जानकारी प्राप्‍त करने के कई श्रोतों को जोड़ने से पता चलता है कि मदन मोहन झा बिहार सरकार के मंत्रियों में सबसे कम हवाई जहाज की यात्रा करने वाले मंत्री हैं . दिल्‍ली उनका आना-जाना नियमित होता है,लेकिन फ्लाइट्स से कम ट्रेन से अधिक . बहुत इमरजेंसी हो,तभी वे पटना एयरपोर्ट से हवाई सफर करते हैं . बताने वालों ने यह भी बताया कि वे कहते हैं कि हमें ट्रेन में ही ज्‍यादा कंफर्ट महसूस होता है . साथ में,खर्च भी कम है .

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