NMCH के बंद कमरे में हुई बड़ी साजिश, रहस्यमय तरीके से हो गई लूट के आरोपी मनीष की मौत

पटना/अमित जायसवाल: बिहार के दूसरे सबसे बड़े हॉस्पिटल एनएमसीएच में 12 जनवरी के दिन एक बड़ी साजिश रची गई. वो भी ऐसी कि जिसके बारे में कभी किसी ने सोंचा नहीं होगा. मरीज को हॉस्पिटल में इलाज के लिए एडमिट कराया जाता है. चाहे वो मरीज अपराधी ही क्यों न हो. लेकिन सोर्स के जरिए जो बातें सामने आ रही है वो बेहद हैरान करने वाली है. लूट के आरोपी के खिलाफ एनएमसीएच के अंदर एक बंद कमरे में बड़ी साजिश रची गई. आरोप है कि बंद कमरे के अंदर लूट के आरोपी मनीष कुमार की जमकर पिटाई की गई. उसे इतना पिटा गया कि उसकी नॉर्मल वाली स्थिति बेहद सीरियस बन गई. उसी दिन देर रात को एनएमसीएच से पीएमसीएच रेफर कर दिया गया. जहां उसकी मौत हो गई. मनीष की ये मौत रहस्यमयी बन गई.

सोर्स की मानें तो बंद कमरे में एनएमसीएच में ही काम करने वाले कुछ लोग थे. जिन्होंने कानून को तोड़ा. कानून को अपने हाथ में लिया और मनीष को बेतरतीब तरीके से पिटा.

इस वजह से पकड़ा गया था मनीष

एनएमसीएच के सर्जरी डिपार्टमेंट में पीजी डॉक्टर ममता कुमारी हैं. 12 जनवरी की दोपहर डॉ. ममता के साथ लूटपाट हुई थी. तीन लड़कों ने उनका पर्स और मोबाइल लूटा था. इस दरम्यान चाकू से महिला डॉक्टर के उपर वार भी हुआ था. इसमें दो अपराधी भाग गए थे. जबकि तीसरा पकड़ा गया. पकड़ा गया तीसरा अपराधी ही मनीष कुमार था. उस वक्त पब्लिक की भीड़ ने मनीष की पिटाई भी की थी. लेकिन सूचना मिलते ही आलमगंज थाना की पुलिस मौके पर पहुंच गई और पब्लिक के भीड़ से मनीष को अपने कब्जे में ले लिया था. उस वक्त मनीष की स्थिति अच्छी थी. वो अपने पैरों पर खड़ा था और पैदल भी चल रहा था. ठीक से बोल भी रहा था.

मनीष कुमार (फाइल फोटो)

पैदल घर आने वाले की कैसे हुई मौत?

इस केस की गंभीरता को परिवार वालों की बातों से भी समझा जा सकता है. महिला डॉक्टर के साथ हुई घटना, पब्लिक की पिटाई और पुलिस की गिरफ्त में आने के करीब एक घंटे बाद ही मनीष को लेकर पुलिस टीम सादिकपुर मछुआ टोली स्थित उसके घर गई थी. आॅटो चलाने वाले पिता अनिल यादव और फूफा भरत प्रसाद यादव के अनुसार पुलिस टीम के साथ मनीष घर तक पैदल ही आया था. वो अच्छे तरीके से चल फिर रहा था. उस वक्त चोट के हल्के निशान थे. कुछ देर की जांच के बाद पुलिस टीम वापस मनीष को लेकर चली गई. उसे इलाज के लिए एनएमसीएच में एडमिट कराया. इलाज केे दौरान परिवार का कोई सदस्य हॉस्पिटल में नहीं था. उसी दिन रात 11 बजे अचानक पुलिस टीम फिर से घर पर आई और मनीष के सीरियस होने की जानकारी दी. देर रात 12 से 1 बजे के बीच मनीष को पीएमसीएच ले जाया गया. जहां 13 जनवरी की सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर उसकी मौत हो गई. परिवार वालों को भी यह बात समझ में नहीं आ रही है कि आखिर पैदल चलकर घर आए मनीष के साथ एनएमसीएच में ऐसा क्या हुआ था? सही हालत में दिखने वाले मनीष की अचानक सीरियस कैसे हो गया? परिवार का भी आरोप है कि एनएमसीएच में मनीष के साथ कुछ खतरनाक खेल खेला गया है.

एसएसपी भी हैं वाकिफ, जांच के आदेश

अपराधी कोई भी हो, उसे सजा सिर्फ कानून के जरिए ही दिलाई जा सकती है. लेकिन जो गंदा खेल एनएमसीएच में खेला गया है, उसने एक साथ कई सवाल खड़े कर दिए हैं. इस पूरे खेल की जानकारी पटना पुलिस के सीनियर अधिकारियों को भी हो चुकी है. इस मामले में मनीष के पिता अनिल यादव के बयान पर आलमगंज थाना में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर नंबर 28/2020 दर्ज की गई है.

बड़ी बात ये है कि इस केस को पटना के सीनियर एसपी उपेंद्र कुमार शर्मा ने बेहद गंभीरता से लिया है. इस केस की गंभीरता से जांच करने का आदेश आलमगंज थानेदार सुधीर कुमार को दिया है. एसएसपी के अनुसार हॉस्पिटल में लगे सीसीटीवी के वीडियो फुटेज को खंगाने और दोषीयों को पहचानने का आदेश दिया गया है. आपको बता दें कि एहतियात के तौर पर मनीष की डेडबॉडी का पोस्टमार्टम मजिस्ट्रेट की निगरानी में PMCH में कराया गया है.