मांझी फिर गरमाए, कहा- NDA का कोई नेता मुझे नहीं पूछता, हम भी नहीं बुलाएंगे

पूर्व सीएम जीतनराम मांझी

लाइव सिटीज डेस्क : बिहार की सियासत में बयानबाजी से कई एंगल निकल आते हैं. बयानों से पार्टी के एक्शन के इशारे मिल जाते हैं. NDA सरकार में घटक दलों के बीच चल रहे विरोधाभास के चर्चे भी खूब हो रहे हैं. सबसे ज्यादा अपने बयानों को लेकर सुर्ख़ियों में बिहार के पूर्व सीएम और हम पार्टी के प्रमुख जीतनराम मांझी रहते हैं. अक्सर अपने ही घटक दलों पर बरस पड़ते हैं. आज उन्होंने NDA के नेताओं पर हम पार्टी की अनदेखी का आरोप लगाया.

मांझी ने कहा कि सहयोगी दल कोई भी कार्यक्रम करते हैं तो हमें न्यौता नहीं देते हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा, जदयू रालोसपा और लोजपा जैसी पार्टियाँ मुझे कभी भी अपने कार्यक्रम में बुलाती नहीं है. ऐसे में हम पार्टी भी अगर कोई रैली करेगी तो ऐसे सहयोगी दलों को हम भी नहीं बुलाएंगे. बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में जदयू के ख़राब परफॉरमेंस के बाद नीतीश कुमार ने इस्तीफा देकर जीतनराम मांझी को बिहार का सीएम बना दिया था. फिर कुछ महीने बाद मांझी को इस्तीफा भी देना पड़ा और नीतीश कुमार फिर से सीएम बन गए.

लेकिन उसके बाद से मांझी लगातार अपने बयानों से सुर्ख़ियों में बने रहते हैं. NDA में शामिल होने के बावजूद मांझी अपनी ही पार्टी के खिलाफ लगातार बयान देते रहते हैं. कभी नीतीश कुमार तो कभी किसी ने नेता पर अपनी भड़ास निकालते हैं. वहीँ विपक्ष यानी राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के साथ भी जाने की अटकलें इन पर लगाई जाती हैं. नीतीश के खिलाफ तलवार उठाएंगे मांझी, गया में कह दिये हैं- सतर्क रहे सरकार 

हाल ही में मांझी ने कहा कि आजादी के 70 सालों के बाद भी बिहार पैसेंजर ट्रेन की चाल चल रहा है, जबकि बिहार में राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें चलनी चाहिए. यही वजह है कि बिहार कछुआ की चाल चल रहा है और प्रगति नहीं हो रही है. वर्ष 2014 के चुनाव में ज्यादा सीट से हार के बाद नीतीश कुमार ने नैतिकता कह कर इस्तीफा दिया था, लेकिन उनमें उनकी कूटनीति थी. हम सिर्फ नाम के मुख्यमंत्री थे. सारा कार्य नीतीश कुमार करते थे. सिर्फ हमको दिखावे के लिए सीएम की कुर्सी पर बैठाया था.

मांझी यहीं पर नहीं रुके. उन्होंने कहा कि लेकिन जब हम लोगों के सामने काम करने लगे तो हमें ही पागल कहने लगे और हमें सीएम पद से हटा दिया. उन्होंने कहा कि जब कुंवर सिंह ने 80 वर्ष की उम्र में तलवार उठा ली थी, तो हमरा तो 73 वर्ष ही हुआ है. अब हमहुँ तलवार उठा लेगें. सरकार सतर्क हो जाये.

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