AES पर दवा और डॉक्टर नाकाम, लोगों को अब दुआ पर भरोसा

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बिहार के मुजफ्फर समेत अन्य कई जिलों में AES के कहर से मासूम बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है. AES ने सबसे ज्यादा मुजफ्फरपुर को प्रभावित किया है. मुजफ्फरपुर में AES से मरने वाले बच्चों की संख्या 100 के पार जा चुकी है. अभी भी बीमार बच्चों का अस्पताल आना और AES से जिंदगी की जंग जारी है. हालांकि मंगलवार को सीएम नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर पहुंचे थे और उन्होंने पूरी व्यवस्था का जायजा लिया. सीएम नीतीश कुमार के साथ बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी भी मौजूद थे. सीएम के दौरे के बाद मुख्य सचिव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि अस्पताल में इलाज से सरकार संतुष्ट है.

लोगों को अब दुआ से ही है उम्मीद

हालांकि सरकार और डॉक्टरों से निराश लोग अब AES से बचाव के लिए भगवान की शरण में जाने लगे हैं. लोगों का कहना है कि जब डॉक्टर बच्चों को बचाने में नाकाम हो रहे हैं तो अब दुआ का ही सहारा है. स्थानीय लोग अस्पताल की दवा के साथ-साथ दुआ के माध्यम से भी मासूम बच्चों की मौत का सिलसिला रोकने का प्रयास कर रहे हैं.

पूजा के आयोजकों ने बताया कि हम भगवान से बारिश के लिए भी प्रार्थना कर रहे हैं. बता दें कि 42 डिग्री से ज्यादा तापमान होने पर AES ज्यादा कहर बरपाता है. ऐसे में लोग भगवान से बारिश की दुआ कर रहे हैं ताकि जब मौसम थोड़ा ठंडा हो जाए तो शायद मासूम की मौतों का सिलसिला भी ठंडा हो जाए. आपको बता दें कि AES से मुजफ्फरपुर जिले में करीब पांच सौ बच्चे बीमार हो चुके हैं और सौ से ज्यादा की मौत हो चुकी है.

सरकार इलाज से संतुष्ट- मुख्य सचिव

AES के कहर ने सबसे ज्यादा मुजफ्फरपुर के बच्चों को प्रभावित किया है. मुजफ्फरपुर में अबतक 112 बच्चों की मौत हो चुकी है वहीं अन्य जिलों में 29 बच्चों की मौत की ख़बर है. हालांकि कई मंत्रियों ने और नेताओं ने मुजफ्फरपुर का जायजा लिया लेकिन इस बीमारी से बचाव का कोई रास्ता खुलता नहीं दिख रहा है. मंगलवार को सूबे के सीएम नीतीश कुमार भी मुजफ्फरपुर पहुंचे थे. उन्होंने घंटों तक अस्पताल की व्यवस्था जायजा लिया साथ ही बीमार बच्चों का हाल भी जाना.

सीएम के दौरे के बाद मुख्य सचिव दीपक कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि सीएम ने SKMCH के हर बेड पर जाकर जानकारी ली है. उन्होंने कहा कि अस्पताल में डॉक्टरों की कमी नहीं है लेकिन फिर भी पटना के PMCH और दरभंगा के DMCH से डॉक्टरों को बुलाया गया है. साथ ही उन्होंने कहा कि अस्पताल के इलाज से सरकार संतुष्ट है.

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ऐसे में जब डॉक्टर बच्चों को नहीं बचा पा रहे हैं, अब लोगों की आस बस भगवान के ऊपर ही रह गई है. लोगों को मानना है कि दवा जब असर नहीं कर रही है तो शायद दुआ ही असर कर जाए.

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