मंत्री मुकेश सहनी ने मिलाया विपक्ष के सुर में सुर, सीएम नीतीश से कहा- अब लौटा दीजिए MLA-MLC का फंड

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: केन्द्र सरकार ने राज्यों को मुफ्त में टीका देने का ऐलान किया तो बिहार में विपक्ष के साथ-साथ सत्तारूढ दल वीआईपी ने भी जनप्रतिनिधियों की ऐच्छिक कोष को सरकार से मांग कर डाली. पार्टी के अध्यक्ष व मंत्री मुकेश सहनी ने इसके लिए बजापते सीएम को पत्र लिखी है. जिसमें कोरोना महामारी के टीकाकरण के लिए जनप्रतिनिधियों की ऐच्छिक कोष की राशि को वापस लौटने की मांग की गयी है.

मुकेश सहनी ने पत्र में लिखा कि अब केंद्र सरकार द्वारा बिहार सरकार को निःशुल्क टीका उपलब्ध कराने की घोषणा हो चुकी है, ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री ऐच्छिक कोष की राशि को जन प्रतिनिधियों के पूर्व प्रदत शक्ति बरकरार कर देते तो विकास कार्यों को गति मिलेगी. जो 2020 से पूरी तरह ठप पड़ी है. अगर जनप्रतिनिधियों को ऐच्छिक राशि मिल जाती तो अपने क्षेत्र में विकास कार्य, चिकित्सीय सुविधा बेहतर और सुलभ करा सकेंगे.

बता दें कि बिहार में कोरोना की भयावह स्थिति से निपटने को लेकर सरकार ने विधायक औऱ विधान पार्षद फंड में भारी कटौती कर दी है. बिहार के तमाम MLA-MLC के फंड से दो-दो करोड़ रूपये ले लिये गये हैं. सरकार ने इस तरीके से 600 करोड़ रूपये से ज्यादा जुटा लिया है. फंड से दो-दो करोड़ रूपये की राशि को स्वास्थ्य विभाग के कोरोना उन्मूलन कोष में जमा किया कर दिया गया.

दरअसल बिहार में मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के नाम पर विधायकों औऱ विधानपार्षदों को फंड मिलता है. हर MLA या MLC को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में तीन करोड़ की राशि मिलती है, जिसे उनकी अनुशंसा पर खर्च किया जाता है. राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में विधायकों,विधान पार्षदों की अनुशंसा पर खर्च होने वाली तीन करोड़ रूपये की राशि में से दो करोड़ की कटौती कर ली है. अब विधायक-विधान पार्षद सिर्फ एक करोड़ रूपये ही खर्च पायेंगे.

बिहार में अभी विधायकों की संख्या 242 है. वहीं विधान पार्षदों की संख्या भी 70 के करीब है. दोनों की संख्या जोड़ कर 312 होती है. ऐसे में सरकार के कोरोना उन्मूलन कोष में 624 करोड़ रूपये जमा हो गए हैं. हालांकि कई विधायक औऱ विधान पार्षदों ने पहले ही कोरोना से निपटने के लिए अपने फंड से पैसे देने का एलान कर दिया था.