मिजोरम LIVE : नार्थ-ईस्ट में नहीं बचा कांग्रेस का आखिरी किला, 10 साल बाद फिर फिसली सत्ता

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम आज मंगलवार को आ रहे हैं. इनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में चुनाव परिनाओं की चर्चा ज्यादा हो रही है. तेलंगाना के परिणाम भी बहसों में शामिल हैं. हालांकि सुदूर उत्तर-पूर्व का एक राज्य ऐसा है, जो परिणामों की इस चर्चा से बाहर दिख रहा है. यह राज्य मिजोरम है. मिज़ोरम में फिलहाल कांग्रेस की सरकार है और यहां कांग्रेस के सामने लगातार दो कार्यकाल के बाद अपना गढ़ बचाए रखने की चुनौती है.

मिजोरम के इस बार के चुनाव परिणाम कई वजहों से महत्वपूर्ण हैं. यहां 40 सीटों वाली विधान सभा के लिए 28 नवंबर को मतदान हुए थे. वोटिंग 80.15% हुई थी, जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में यहां 83.04% वोटिंग रिकॉर्ड की गई थी. मिजोरम चुनावों के बाद विभिन्न चैनलों द्वारा जो एग्जिट पोल जारी किये गए थे, उनमें मुख्य विपक्षी पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) को 20-22 सीटें मिलने या फिर ‘हंग असेंबली’ की उम्मीद जताई गई थी.

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हालांकि दोपहर 3 बजे तक जब चुनाव परिणामों की स्थिति कुछ साफ़ हुई, तबतक पूर्वोत्तर का कांग्रेस का यह किला भी ढह चुका था. मिजोरम विधानसभा के परिणामों/रुझानों में मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) को स्पष्ट बहुमत मिलता बताया जा रहा है. NDTV द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार MNF को 27, कांग्रेस को 7 तो भाजपा को 1 सीट पर बढ़त मिलती बताई जा रही है.

किन वजहों से महत्वपूर्ण है मिजोरम :

  • मिज़ोरम नार्थ-ईस्ट में एकमात्र राज्य है, जहां कांग्रेस की सरकार है.
  • भाजपा ने यहां आजतक एक भी सीट नहीं जीती है.
  • एग्जिट पोल्स में भी भाजपा के लिए कोई भविष्यवाणी नहीं की गई थी.
  • मिज़ोरम विधानसभा चुनाव में इस बार 15 महिला उम्मीदवार हैं, जो राज्य के चुनावी इतिहास में सबसे ज्यादा हैं. कुल उम्मीदवार 206 हैं.
  • भाजपा ने पहली बार 39 सेटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं.
  • कांग्रेस के मुख्यमंत्री लाल थनहवला दो विधानसभा क्षेत्रों – सेरछिप और चंपाई, से चुनाव लड़ रहे हैं.
  • राज्य में बीते 30 सालों में दो ही मुख्यमंत्री हुए हैं – कांग्रेस के लाल थनहवला और MNF के पु. जोरमथंगा.
  • राज्य में बीते 10 सालों, यानी 2008 से ही कांग्रेस के लाल थनहवला मुख्यमंत्री हैं. उनसे पहले MNF के पु. जोरमथंगा ने भी 10 सालों तक 1998 से 2008 तक सरकार चलाई थी. 1987 में विधायक चुन कर आए जोरमथंगा पहली बार ही राज्य में शिक्षा एवं वित्त मंत्री बने थे. 2008 में उनकी सरकार को हारकर बाहर होना पड़ा और कांग्रेस की सर्कार बनी. लाल थनहवला पहले भी 1989 से 1998 तक मुख्यमंत्री रहे थे. इस तरह से बीते 6 कार्यकालों में मिजोरम में दो ही मुख्यमंत्री रहे हैं.

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