CAG की रिपोर्ट में ‘नमामि गंगे’ प्रोजेक्ट पर बड़ा खुलासा, पढ़िए क्या कर रही है बीजेपी सरकार

लाइव सिटीज डेस्क : CAG रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा हुआ है. इस बार यह खुलासा सरकार के उस महत्वकांक्षी योजना से है. जिसे नमामि गंगे का नाम दिया गया है. यह केंद्र सरकार के उन वादों में शामिल था जिसमें गंगा को स्वच्छ करने की बात की गई थी. लेकिन इन तीन वर्षों में केंद्र की मोदी सरकार गंगा की सफाई का लोगों से किया अपना वादा पूरा नहीं कर पाई है. गंगा नदी की सूरत बदलने को लेकर शुरू की गई नमामि गंगे परियोजना पर आए कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वच्छ गंगा मिशन के लिए आवंटित 2600 करोड़ रुपये का ये सरकार इस्तेमाल ही नहीं कर पाई है. कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि गंगा नदी की सफाई के राष्ट्रीय मिशन के लिए जारी 2133.76 करोड़, 422.13 करोड़ और 59.28 करोड़ रुपये सरकार खर्च ही नहीं कर पाई है.

बता दें कि गंगा की सफाई के लिए आवंटित की गई यह रकम 31 मार्च 2017 तक खर्च की जानी थी. रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि 46 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स, इंटरसेप्शन एंड डायवर्सन प्रोजेक्ट्स और नहर परियोजनाओं की लागत 5,111.36 करोड़ रुपये थी. मालूम हो कि साल 2014 में सरकार बनने के बाद पीएम मोदी ने उमा भारती को नदी विकास और गंगा सफाई मंत्रालय का जिम्मा सौंपा था. जिस वक्त केंद्र सरकार ने गंगा सफाई मंत्रालय का सृजन कर उमा भारती को इसका प्रभार दिया था, उस वक्त लोगों को लगा था कि सरकार गंगा की सफाई को लेकर गंभीर है. लेकिन सरकार कितनी गंभीर है, ये बात कैग कि रिपोर्ट से सामने आ गई है.



रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2,710 करोड़ रुपये की लागत वाली 26 परियोजनाओं में देरी की गई है. इसकी वजह जमीन नहीं होना और ठेकेदारों का धीमी गति से काम करना बताया गया है.मोदी सरकार का तीन साल का कार्यकाल निकल चुका है. लेकिन गंगा सफाई को लेकर नतीजा सिफर रहा है.

इससे पहले आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में से यह खुलासा हुआ था कि सरकार ने गंगा सफाई के लिए बीते तीन सालों में 12 हजार करोड़ रुपये का बजट देने की बात कही थी. लेकिन सरकार ने बजट में इसके लिए सिर्फ 5378 करोड़ रुपये ही आवंटित किए और आवंटित 5378 रुपये में से सिर्फ 3633 करोड़ रुपये खर्च के लिए निकाले गए और इसमें से भी मात्र 1836 करोड़ 40 लाख रुपये ही खर्च किए गए.