भारत बंद को एनडीए ने बताया सुपर फ्लॉप, ‘हम’ ने कहा- गुंडागर्दी के लिए माफी मांगे तमाम विपक्षी पार्टियां

लाइव सिटीज,सेंट्रल डेस्क : तीन नये कृषि कानून के विरोध में किसानों की ओर से भारत बंद बुलाया गया था. जिसका देश के कुल 22 विपक्षी दलों ने समर्थन किया. बिहार में भी महागठबंधन समेत विभिन्न विपक्षी पार्टियों ने बंद का समर्थन करते हुए सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया. जिसे एनडीए ने सुपर फ्लॉप करार दिया है.

हम के राष्ट्रीय प्रवक्ता दानिश रिजवान ने बंद को फ्लॉप करार देते हुए कहा कि पूरे बंद के दौरान सड़क पर ना तो किसान दिखे और ना ही नौजवानों ने विरोध किया. सड़क पर सिर्फ विपक्षी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता दिखे. जो गुंडागर्दी करते नजर आए. इनकी गुंडागर्दी के लिए देश कभी इन्हें माफ नहीं करेगा.



दानिश रिजवान ने कहा कि देश के किसान और नौजवान का भरोसा आज भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर है. जिसका जीता जागता उदाहरण आज के बंद में देखने को मिला. बिहार समेत देश के अन्य राज्यों में सिर्फ विपक्षी दल के नेता और कार्यकर्ता प्रदर्शन करते नजर आए. जो बंदी को सफल बनाने के लिए जमकर उत्पात मचाया. ऐसे लोगों को देश से माफी मांगनी चाहिए.

भारत बंद का असर सबसे ज्यादा पटना के डाकबंगला चौराहे पर दिखा. दिनभर ड्रामा चलता रहा. विभिन्न राजनीति दलों ने बवाल किया. यहां तक कि पुलिस के साथ झड़प तक हो गई. मामला इतना बढ़ा कि विपक्ष ने सत्ताधारी दल भाजपा व जदयू के पोस्टर तक फाड़ डाले.

मगर खास बात रही कि जिन किसानों के लिए यह आंदोलन हो रहा था. ऐसे किसान यहां कम ही दिखे. वहीं कोरोना काल में प्रशासन की सख्ती भी काम न आयी. जिला प्रशासन ने जहां कोरोना को लेकर कई सख्त आदेश जारी किये हैं. उनकी खुलेआम अनदेखी की गयी. सोशल डिस्टेंसिंग से लेकर मास्क प्रयोग तक, हर प्रकार से अनदेखी हुई. पुलिस के जवान भी तमाशा देखते रहे. राजनीतिक दलों ने कोरोना को खुलेआम चुनौती दी.

अब सवाल उठता है कि जो कार्यकर्ता इस बवाल में शामिल थे. जो खुलकर प्रदर्शन कर रहे थें. वह अपना विरोध गाईडलाइन के अनुसार भी कर सकते थें. इस प्रकार का प्रदर्शन राजधानी के अन्य इलाकों में भी हुआ. जहां कोरोना को लेकर कोई सख्ती नहीं दिखी. कुछ लोग को छोड़. कई ऐसे थें जों यहां मास्क नहीं लगाकर आये थें. यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण व कोरोना को ध्यान में रखकर भी किया जा सकता था.

डाकबंगला चौराहा अक्सर प्रदर्शन का केंद्र रहता है. यहां गाड़ियों को रोका जा रहा था. कई गाड़ियों पर प्रदर्शनकारी चढ़ भी ​गये. पुलिस के बीच बचाव के बाद उनको वहां से छोड़ा गया. पूरी तरह से यातयाता व्यवस्था चरमरा गयी. दिन भर लोगों को इस बंद से परेशानी उठानी पड़ी. कई राजनीतिक दल के कार्यकर्ता यहां प्रदर्शन करते रहें. बिहार में इस बंद का असर शहरी क्षेत्रों में आंशिक रूप से दिख रहा है.