तेजस्वी के आरोप पर एनडीए का करारा जवाब, नौकरी के नाम पर जमीन लिखवाने वाले किसानों की समस्या पर ज्ञान बांट रहे हैं

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बिहार और देश के किसानों को लेकर तेजस्वी ने केन्द्र और राज्य सरकार पर कई आरोप लगाए हैं. जिसपर एनडीए के घटक दलों ने करारा जवाब दिया. हम अध्यक्ष मांझी ने ट्वीट कर कहा कि “नौकरी दिलवाने के नाम पर किसानों के ज़मीन लिखवाने वाले आज प्रेस कांफ्रेंस करके किसानों की समस्या पर ज्ञान बाँट रहें हैं”. ऐसे लोगों को बिहार और पूरा देश जान चुकी है. ये लोग किसानों के नाम पर घड़ियालू आंसू बहाने का काम कर रहे हैं.

वहीं बिहार बीजेपी प्रवक्ता प्रेमरंजन पटेल ने तेजस्वी के आरोप का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें कृषि बिल के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है. सिर्फ सुनी सुनाई बातों को लेकर आरोप लगा रहे हैं. उन्हें पहले कृषि बिल की बारीकियों के बारे में जानकारी हासिल करना चाहिए, तब आरोप लगाना चाहिए. लेकिन वो खुद कृषि बिल की बातों को नहीं जानकर अपने विधायकों को पाठ पठा रहे हैं.



आगे प्रेमरंजन पटेल ने कहा कि बिहार में 2006 से एपीएमसी खत्म कर दिया. जिससे बिहार के किसान खुशहाल है. किसान की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है. लेकिन यह सब तेजस्वी समेत पूरे विपक्ष को नहीं दिखायी दे रहा है. पहले कृषि कानून को अध्ययन कर लें फिर प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाने का काम करे.

बता दें कि किसान नेता चौधरी चरण सिंह की जंयती के मौके पर आरजेडी की ओर से किसान दिवस के रूप में मनाया गया. इस मौके पर तेजस्वी ने कहा कि किसानों के नेता चौधरी चरण सिंह की जयंती पर उनको नमन करते हैं. और जब तक किसानों की मांगें नहीं मानी जातीं तब तक हम उनके साथ हैं. यह कानून किसानों को भिखारी बनाने वाला कानून है. देश के किसानों को सत्तापक्ष वाले गाली दे रहे हैं. जिसे पूरा देश देख रहा है.

केन्द्र की सरकार सभी सरकारी उपक्रम का निजीकरण करने पर तुली हुई है. BSNL के अलावा कई प्रतिष्ठानों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है. तीनों नये कृषि बिल में कई खामियां है. बिहार में तो APMC की मंडी को 2006 में बंद करवा दिया गया. बिहार में किसानों की प्रति परिवार आय सबसे नीचे है. बिहार में सरकार धान खरीद का टारगेट पूरा नहीं कर पा रही है। सरकार किसानों के धान नहीं खरीद पा रही है. बिहार की डबल इंजन की सरकार ने किसानों को मजदूर बना दिया है.

किसानों के मुद्दे पर 29 दिसंबर को लेफ्ट की पार्टियों का राजभवन मार्च करेगी, उसे हमारा समर्थन है. किसानों के मामले में चाहे लेफ्ट हो या कांग्रेस, सभी को हमारा समर्थन है. हम किसानों के मुद्दे पर साथ हैं. किसानो के मुद्दे पर नीतीश सरकार ने चुप्पी साध रखी है.किसान आंदोलन करते हुए 17 किसान शहीद हो गए. इसपर बिहार की डबल इंजन की सरकार का कोई ट्वीट नहीं है.

वहीं एकबार फिर तेजस्वी ने 2021 में बिहार में चुनाव की प्रबल संभावना जताते हुए पार्टी के कार्यकर्ताओं को तैयार रहने को कहा है. उन्होंने कहा कि पार्टी को हमेशा चुनाव के लिए तैयार रहना चाहिए. साथ ही बंगाल में चुनाव लड़ने को लेकर उन्होंने कहा कि इस बात का फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू जी करेंगे.