‘तेजस्वी का राजतिलक कर केंद्र में जाएं नीतीश’ कैबिनेट विस्तार के सीएम के बयान पर महागठबंधन ने ऐसे किया कटाक्ष

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बिहार में कैबिनेट विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान पर राजद ने चुटकी ली है. साथ ही तंज भी कसा है. वहीं इसे लेकर कांग्रेस ने भी नीतीश कुमार को घेरा है. राजद ने चुटकी लेते हुए कहा कि नीतीश कुमार अब नेता प्रतिपक्ष तेजस्‍वी यादव को राजगद्दी सौंप दें और राजतिलक कर नेशनल पॉलिटिक्स में जाएं.

पूर्व मंत्री व आरजेडी नेता विजय प्रकाश ने कहा कि बीजेपी नीतीश कुमार को घेरने में लग गई है. उसका मकसद नीतीश कुमार के जदयू को 43 से 13 सीटों पर लाना है. उन्होंने कहा कि अभी भी समय है. नीतीश कुमार को घेरने में कांग्रेस भी पीछे नहीं रही. कांग्रेस प्रवक्ता राजेश राठौर ने कहा कि मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार अब असहाय प्राणी होकर रह गए हैं. मंत्रिमंडल विस्तार उनका विशेषाधिकार है, लेकिन इसके निए वे राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ और बीजेपी के आदेश की प्रतीक्षा में हैं. इस बार उनकी अंतरात्‍मा नहीं जग रही है.



बिहार में नयी सरकार के गठन हुए करीब सवा महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभीतक मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पाया है. मंत्रिमंडल विस्तार में देरी को लेकर राजनीतिक गलियारे में कई तरह से कयास लगाए जा रहे हैं. कोई एनडीए में खटपट की बात कह रहा है तो कोई बीजेपी और जेडीयू कोटे से अधिक मंत्री बनाए जाने को लेकर दोनों के बीच तानातनी का कयास लगा रहा है. जितनी मुंह उतनी बातें हो रही है. लेकिन अबतक मंत्रिमंडल विस्तार नहीं होने के पीछे का मूल कारण क्या है, उसे आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बता दिया.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ कर दिया कि मंत्रिमंडल के विस्तार में उन्हें कोई फैसला नहीं लेना है. इसके लिए बीजेपी को निर्णय लेना है. उन्होंने साफ कर दिया कि उनकी तरफ से कोई देरी नहीं की जा रही है. देरी सिर्फ और सिर्फ बीजेपी की वजह से हो रही है. जैसे ही बीजेपी की ओर से इस तरह के प्रस्ताव आ जाएंगे तुरंत पर उसपर निर्णय ले लिया जाएगा.

राज्यपाल कोटे से एमएलसी मनोनयन और मंत्रिमंडल विस्तार होने की बात इस साल के अंत-अंत तक कही जा रही थी. लेकिन ऐसा संभव होता नहीं दिख रहा है. सभी को उम्मीद थी कि 15 दिसम्बर से पहले सरकार ये दोनों फैसले ले लेगी. लेकिन नीतीश कुमार ने खुद यह बयान दिया कि इसमें भाजपा ने देरी की है, ना कि उनकी तरफ से देरी हुई.

सीएम नीतीश कुमार के इस बयान से साफ दिख रहा है कि बीजेपी और जदयू में समन्वय की कमी के कारण मंत्रिमंडल विस्तार और राज्यपाल कोटे से मनोनयन की बात अटकी हुई है. दोनों में देरी के लिए बीजेपी को ही निर्णय लेना है. सूत्रों की माने तो बीजेपी का सारा निर्णय दिल्ली से होता है. लेकिन दिल्ली में बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व दो तरफ चल रही लड़ाई में इनदिनों व्यस्त है. जिस कारण बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार और राज्यपाल कोटे से मनोनयन को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा है.