नीतीश कुमार ने कहा- हमारा काम है सेवा करना, बाकि को सेवा से कोई मतलब नहीं

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : सीवान के मैरवा के हरेराम उच्च विद्यालय के खेल मैदान में रविवार कोे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चुनावी जनसभा को संबोधित किया. सीएम ने पहले मतदान, फिर जलपान का नारा दिया. नीतीश कुमार लोगों को संबोधित करते हुए एनडीए से जदयू उम्मीदवार कविता सिंह के पक्ष में चुनाव प्रचार किया. उन्होंने कहा कि हमारा काम है सेवा करना लेकिन बाकि को सेवा से कोई मतलब नहीं है, सत्ता से और जो अंदर है वो कहते है फंसा दिया. दोषी है तो सजा मिलेगी ही ना. कोर्ट ने सजा दिया और कहते फंसाया गया हैय

सीएम ने कहा कि 13 वर्षों की सेवा की मजदूरी मांगने आया हूं. मुख्यमंत्री ने लालू प्रसाद का नाम लिए बगैर कहा कि एक ही परिवार के लोगों ने बिहार में 15 वर्षों तक शासन किया. वे सिर्फ अपना विकास करने के अलावा राज्य का कोई काम नहीं किया. सीएम ने देश में मोदी सरकार को फिर से लाने के लिए सीवान लोकसभा के जदयू प्रत्याशी कविता सिंह को वोट देने की अपील की. सीवान पहुंचे सीएम नीतीश कुमार ने पहले लोगों का संबोधित करते हुए अपने किए गए कामों की मजदूरी मांगी. फिर केंद्र सरकार के कामों की सराहना की. सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि सभी मिलकर एनडीए प्रत्याशी कविता सिंह के पक्ष में वोट करें. उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है. विकास के कार्यों से लोगों का भरोसा बढ़ा. किसानों के लिए जो योजना शुरू की उससे लाभ मिलेगा.

महिला के उत्थान के लिए काम किया

नीतीश कुमार ने कहा कि 15 साल तक बिहार में पति-पत्नी का राज था तब किसी को आरक्षण नहीं मिला. जब हमारी सरकार आई तो हमने कानून बनाया. जिसके तहत महिलाओं को 50 फीसदी और अनुसूचित जाति को 16 फीसदी आरक्षण दिया गया. पहले अनुसूचित जाति की क्या स्थिति थी और आज आरक्षण के बाद इनका मान सम्मान समाज में बढ़ा है, महिलाओं का मान सम्मान बढ़ा. अब एक लाख से भी ज्यादा महिलाएं जनप्रतिनीधि के रूप में काम कर रहीं हैं. महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए जीविका समूह बनाया गया जिसमें एक करोड़ महिलाएं जुड़ी, इससे महिलाओं में आत्मविश्वास और चेतना आई है. हमारा लक्ष्य है इस समूह से 10 करोड़ महिलाओं को जोड़ना.

लड़कियों के लिए योजनाओं की शुरूआत की

उन्होंने कहा कि पहले लड़कियां स्कूल नहीं जाती थी, इसलिए हमने पोशाक योजना की शुरुआत की फिर 2008 में साइकिल योजना की शुरुआत की जिससे लड़कियां उत्साहित होकर स्कूल जाने लगीं. पहले स्कूलों में 1 लाख 70 हजार से भी कम लड़कियां थी आज 9 लाख हो गई हैं. हमारी सरकार आने से पहले साढ़े 12 फीसदी बच्चे ऐसे थे जो स्कूल से बाहर रहते थे. जब हमने पता किया ये बच्चे कौन हैं तो पता चला कि ये अल्पसंख्यक और महादलितों के बच्चे हैं. अब हमारी सरकार में यह संख्या एक फीसदी रह गई है. पहले लोग बेटी नहीं चाहते थे. तो हमने परिवार में बेटी होने पर 2000 रुपए की राशि देने की योजना चलाई और बेटी का आधार बनने के बाद 1000 रुपए बढ़ाकर देने का नियम बनाया. इतना ही नहीं जब बेटी इंटर पास करती है तो उसे 10,000 रुपए और ग्रेजुएशन पास करती है तो 25,000 रुपए देने का प्रावधान बनाया.

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