स्वामी ने ऐसा क्या कह दिया कि मुस्कुराते रहे नीतीश कुमार

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लाइव सिटीज डेस्क : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों उन लोगों से बेहद सावधान रहते हैं जो उन्हें सार्वजनिक सभाओं या प्रेस कांफ्रेस में पीएम मैटेरियल बताकर नारा लगाते हैं या सवाल पूछते हैं. इन सबसे आजिज आकर तीन दिन पहले उन्होंने एलान कर दिया कि वे इतने मूर्ख नहीं हैं कि खुद को देश के अगले पीएम के तौर पर देखें. इसलिए कि उनकी पार्टी बहुत छोटी है.

राजनीतिक हलके में उनके वक्तव्य को इस रूप में लिया गया, एक- वे मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी से टकराव मोल नहीं लेना चाहते हैं, दो-लालू प्रसाद से रिश्ता खराब होने की हालत में उन्हें भाजपा से मदद की उम्मीद है मतलब पीएम पद की दावेदारी कर सीएम की कुर्सी पर आनेवाले किसी जोखिम से बचाव के रास्ते पर चल रहे हैं.

लेकिन, नई दिल्ली के आईआईसी सेंटर के एयरकंडीशंड हाॅल का माहौल उस वक्त तनिक भी गर्म नहीं हुआ, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने प्रवचननुमा भाषण में नीतीश से आग्रह किया कि पीएम बनने के विचार को कतई खारिज नहीं करें. यह देश की जनता की इच्छा है. देश में अच्छे नेताओं की बेहद कमी है और यह भी कि नीतीश अच्छे नेताओं की शर्तों को पूरा करते हैं. खासकर शराबबंदी को लागू कर उन्होंने साबित किया कि देशहित में कठोर फैसले लेने और उसे लागू करने में सक्षम हैं.

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सम्मेलन का आयोजन गंगा को अविरल बनाने के उपायों पर विचार करने के लिए किया गया था. मंच पर कांग्रेस के दिग्गज नेता और गांधी परिवार के करीबी जयराम रमेश भी मौजूद थे. स्वामी के कथन पर रमेश के चेहरे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. हालांकि अगले ही क्षण स्वामी ने गंगा की ठीक से सेवा न करने के लिए कांग्रेस पर भी प्रहार कर दिया. उनका कहना था कि गंगा के प्रति कांग्रेस ने अपना कमिटमेंट पूरा नहीं किया. नतीजे के तौर पर कांग्रेस डूब गई. स्वामी ने भविष्यवाणी की कि गंगा के अपमान के चलते भाजपा का भी यही हाल होगा. अगले चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी भी डूब जाएंगे-गंगा अपने बेटों को देती तो है ही लेकिन, नाराज होने पर बहा भी देती है.

उनका कहना था कि खुद को गंगा का पुत्र बताने वाले नरेंद्र मोदी ने अपनी इस मां के लिए कुछ नहीं किया. मोदी पर जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने भी तीखी टिप्पणी की. लेकिन, उन्होंने नीतीश को मोदी का विकल्प नहीं बताया. इधर नीतीश ने अपने संबोधन में स्वामी की खूब तारीफ की. बोले कि गंगा आंदोलन का नेतृत्व स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद करें तो वह भी उनके आंदोलन के पीछे खड़े रहेंगे. स्वामी ने ऐलान किया कि इस साल अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में बनारस में गंगा संसद का आयोजन करेंगे.

नीतीश ने कहा कि उन्हें आमंत्रण मिले न मिले, वह इस संसद में जरूर जाएंगे. अंदर जगह नहीं मिली तो संसद के प्रवेश दवार पर बैठकर गंगा संसद की कार्यवाही को सुनेंगे. सम्मेलन में शामिल कई वक्ताओं ने पीएम नरेंद्र मोदी की खुल कर आलोचना की. गौर करने की बात यह है कि नीतीश ने अपने संबोधन में एक बार भी मोदी का नाम नहीं लिया.

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