नीतीश कुमार ने वर्चुअल रैली में लालू-राबड़ी शासन पर साधा निशाना, कहा- याद कर लीजिए वो दौर क्या था जब लोग गवाही से डरते थे

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्चुअल रैली में लालू-राबड़ी शासन को जमकर धो डाला. नीतीश कुमार ने कहा कि पति-पत्नी के राज को भूल गए क्या? उस राज में होने वाला नरसंहार याद है न? विधि व्यवस्था क्या थी? उन्होंने कहा कि पहले क्राइम होने के बाद गवाह घर से बाहर निकल पाता था? शाम होने के पहले लोग घर में घुस जाते थे.

आगे उन्होंने कहा कि चंद लोगों के कारण यह सब होता था. उन्होंने कहा कि कुछ लोग गाड़ी में राइफल व बंदूक निकाल कर चलते थे. वे यहीं पर नहीं रुके. लालू के जेल में रहने को लेकर भी कटाक्ष किया. कहा कि अंदर बैठकर ट्वीट करते हैं, कोई बाहर से ही न लिखता होगा. हमने भी शुरू किया था. संजय झा से ट्वीट लिखवाया था. लेकिन हमें यह ठीक नहीं लगा, सो बाद बंद कर दिया.
दरअसल, नीतीश कुमार आज पूरे तल्ख तेवर में थे. उन्होंने कहा कि याद कीजिए वह दौर. जब ​बिहार नक्सलियों की समस्या से जूझ रहा था. यहां सामूहिक नरसंहार हुआ करते थे. हमारी सरकार ने उन पर विराम लगाया. आज क्या स्थिति है. यह छिपा नहीं है. हमने क्रिमिनल व कॉमनलिज्म को बर्दाश्त नहीं किया. जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम किया. पहले क्या होता था. आप सब उसके गवाह हैं. ​



आगे उन्होंने कहा कि न्यायालयों से लेकर सरकारी व्यवस्था तक. आपराधिक मामलों में तेजी से ट्रायल का सिलसिला शुरू किया गया. पहले प्रदेश में जो शासन व्यवस्था थी. उस समय लोग गवाही से भागते थे. उन्हें डर होता था. शाम होने से पहले लोगों को घर पहुंचने की जल्दी होती थी. इतना भय था. कई लोग बाहर निकलते थे तो उनके पास राइफल होती थी. उन्हें सत्ता का साथ था. उनकी तस्वीरें आज भी मौजूद हैं. आप चाहे तो सोशल मीडिया पर देख् सकते हैं. आज भी इनकी कारस्तानी सब देख रहे हैं. ​क्राइम की स्थति तब क्या थी, आज क्या है. नक्सलियों की स्थिति पहले क्या थी? हमने हर तरफ अपराध पर काबू पाया. उसके बाद गांवों तक तक विकास पहुंचाया. गरीब तबकों को अधिकार दिया. उनकी स्थिति बेहतर हुई. गांवों में अपराधियों को पकड़ तुरंत ट्रायल हो जाती है.

नीतीश ने कहा कि हर साल केंद्र की ओर से जारी आंकड़ों पर भी नजर डाल लें. उस अनुसार राष्टीय औसतदर की आंकड़ों पर नजर डालें. उसमें अपराध की घटना राष्टीय स्तर पर प्रति 1 लाख में 383.5 है. उसमें ​बिहार में अपराध की घटनाओं का प्रति 1 लाख 232.1 है. वहीं अगर राज्यों की बात कर लें. बिहार का सामान्य अपराध में देश भर में 23 वां स्थान है. साथ ही नीतीश ने यह भी क​हा कि हम अपराध नियंत्रण करने में इसलिए कामयाब रहे. उसकी वजह थी कुशल रणनीति. पहले भूमि विवाद को लेकर 60 प्र​तिशत की अपराधिक मामले प्रकाश में आते थे.

नीतीश कुमार ने अपराध की कई श्रेणियों का आंकड़ों के साथ जिक्र किया. साथ ही कहा यह आंकड़े पहले के मुकाबले कम हुए हैं. लोकायुक्त के माध्यम से विवाद रोकने की रणनीति बनी. कुछ लोगों ने केवल वोट लिया, मगर हमने कुछ खास धर्म संप्रदाय का भी ख्याल रखा. कब्रिस्तान घेराबंदी की. मूर्ति चोरी पर रोक लगवायी. मंदिर की भी घेराबंदी करायी. आज प्रदेश में हर तरफ अपराधी बेहाल हैं. प्रदेश में क्राइम, कॉम्यूनलिज्म व करप्शन पर नियंत्रण कर लिया गया है.